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पिता को कोरोना ने छीना, दो बच्चियों के लालन-पालन पर संकट

Wed, 02 Jun 2021 02:36 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Wed, 02 Jun 2021 02:36 AM IST
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Father dies with Corona, how lives two girls
चंडीगढ़। कोरोना ने दो मासूम बच्चियों के पिता को छीन लिया है। सेक्टर 38 में रहने वाले भूपिंदर सिंह अपने घर के इकलौते कमाने वाले व्यक्ति थे। भूपिंदर की मौत के बाद उनकी बेटियों के लालन-पालन पर संकट आ पड़ा है। घर पर इन बच्चियों की मां, दादा और एक चाचा है। मां घरेलू महिला हैं, दादा सीटीयू से सेवानिवृत्त हैं, जबकि चाचा टाइप वन डायबिटीज से पीड़ित हैं। बीमार होने की वजह से वे कुछ काम नहीं करते। बच्चियों के दादा प्रसादा सिंह ने बताया कि उन्हें पेंशन मिलती है, लेकिन इस खर्च से वे बच्चियों को पढ़ा नहीं सकते। छोटा बेटा बीमार रहता है। उसके इलाज में काफी पैसे खर्च हो जाते हैं। उन्होंने प्रशासन से गुहार लगाई है कि वह उनकी बच्चियों की पढ़ाई का खर्च उठाए और उनकी मदद भी करे।
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सेक्टर 38 हाउस नंबर 1887 में रहने वाले 72 वर्षीय प्रसादा सिंह ने बताया कि उनका बड़ा बेटा भूपिंदर सिंह मेडिकल ट्रांसक्रिप्शन का काम करता था। उसकी दो बेटियां हैं। बड़ी बेटी ब्रहमजोत 14 साल की है, जो सेक्टर 38 स्थित श्री गुरु हरकिशन सीनियर सेकेंडरी स्कूल में नौंवी कक्षा में पढ़ती है, जबकि छोटी बेटी बानी चार साल की है। पिछले साल उसका भी दाखिला हुआ था, लेकिन कोरोना की वजह से वह स्कूल नहीं जा पाई।
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वेंटिलेटर नहीं मिलने से गई जान
प्रसादा सिंह ने बताया कि छह मई को भूपिंदर को बुखार आया। बुखार 103 डिग्री के आसपास रहता था। आठ मई को पता चला कि कोरोना हुआ है। मोहाली में डॉक्टर को दिखाने पर बुखार उतर गया था, लेकिन इस दौरान कोरोना ने उसके शरीर को काफी नुकसान पहुंचा दिया था। दस मई को उसका ऑक्सीजन स्तर कम होने लगा। परिजन उसे सेक्टर 32 मेडिकल कॉलेज ले गए। वहां दाखिल होने के बाद 13 मई को डॉक्टरों ने बताया कि भूपिंदर को वेंटिलेटर की आवश्यकता है और मेडिकल कॉलेज में वेंटिलेटर है नहीं। परिजनों ने पीजीआई, सेक्टर 16 हास्पिटल व पंचकूला में पता किया, लेकिन कहीं भी वेंटिलेटर खाली होने की खबर नहीं मिली। बाद में परिजन उसे मोहाली के निजी अस्पताल ले गए, जहां 16 मई को उसकी मौत हो गई।
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