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पिता ने जोड़ा हरियाली से नाता, आज 250 गमलों में महक रहे पौधे

Sun, 01 Nov 2020 01:57 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Sun, 01 Nov 2020 01:57 AM IST
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Father connected with greenery, today plants smelling in 250 pots
चंडीगढ़। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट में वकील सेक्टर 8 निवासी रविंदर सिंह गिल पिछले 28 साल से बागवानी कर रहे हैं। आज उनके घर में लगभग ढाई सौ गमले हैं। इनमें 30 से ज्यादा प्रकार के पौधे लगे हुए हैं। उन्होंने बताया कि मूल रूप से वह मोगा के रहने वाले हैं। बचपन से ही हरियाली से उनका नाता जुड़ गया था। उन्होंने कहा कि रोज सुबह अपनी बागवानी में अखबार पढ़ने के साथ चाय चुस्की लेने का मजा ही अलग है। साथ ही चिड़ियों की चहचहाहट और कोयल की मीठी आवाज सुनने में जो सुकून महसूस होता है, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। उन्होंने बताया कि बचपन से अपने पिता के साथ खेतों में जाते थे, वहीं से उनमें बागवानी करने का शौक पैदा हुआ। मौसमी पौधों के साथ पिटूनिया, साल्विया, स्लोकस, गुलदाउदी, डेहलिया, तुलसी, एलोवेरा और स्टीविया नामक पौधों से उनकी बागवानी महक रही है। 28 साल से लगे पाम के पेड़ को देखकर उन्हें बहुत खुशी होती है।
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सुबह-शाम दो घंटे देते हैं बागबानी को
रविंदर सिंह रोजाना अपने पौधों के लिए सुबह छह बजे उठते हैं। दो घंटे पौधों के पीले पत्ते तोड़ने और उन्हें पानी देने का काम करते हैं। उन्होंने बताया कि पानी देने से पौधे दो गुना ज्यादा हरे दिखाई देते हैं। वह पौधों की कटिंग भी खुद ही करते हैं। अपने पौधों को अपनी पसंद का आकार देते हैं।
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यूट्यूब और किताबों से लेते हैं जानकारी
बागवानी को बेहतर बनाने के लिए वह यूट्यूब और किताबें पढ़कर जानकारी हासिल करते हैं। इसके साथ ही वह अपने बेटे के पास विदेश जाते हैं वहां से भी कुछ तरीके यहां आकर अपनाते हैं। उन्होंने कनाडा की तर्ज पर अपनी बागवानी में सोलर लाइट्स लगाई हुई है। इनमें सेंसर लगे हुए हैं। यह अंधेरा होने पर खुद ही जल जाती हैं और दिन निकलने पर खुद ही बंद हो जाती हैं। इसके साथ ही घूमने के लिए खुद ही टाइल्स का प्रयोग करके ट्रैक भी बनाया है।
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कीड़ों से बचाने के लिए नीम का पानी कारगर
उन्होंने बताया कि कीड़ों से बचाव के लिए नीम का पानी काफी उपयोगी होता है। नीम के पत्तों को उबालकर उसे ठंडा कर एक घोल तैयार कर लें। उसके बाद उस घोल को पौधों में डालें। कड़वा होने के कारण कोई भी चींटी या दीमक पौधों को नहीं लगती। इस पानी का पौधों पर कोई दुष्प्रभाव भी नहीं पड़ता। इस गोल का प्रयोग करने से दवाई के छिड़काव की भी बहुत कम आवश्यकता पड़ती है।

सेक्टर 23 से लाते हैं खाद
उन्होंने बताया कि सेक्टर 23 की नर्सरी से वह देसी कार लेकर आते हैं। इसके अलावा गांव से गोबर की खाद बेचने वाले आते हैं उसे खाद का वह प्रयोग करते हैं। उन्होंने बताया कि केंचुएं की खाद का भी वह प्रयोग करते थे जो आजकल आनी बंद हो गई है।
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