किसानों का चंडीगढ़ कूच: छावनी बने चंडीगढ़ के सारे बॉर्डर, पंजाब में कई किसान हिरासत में, अंबाला में झड़प
किसानों की मुख्य मांगों में 50 हजार करोड़ विशेष पैकेज, घग्गर योजना के तहत सभी नदियों का स्थाई समाधान, किसानों को 50 हजार प्रति एकड़ मुआवजा, पशुओं की मृत्यु और बोरवेल खराब होने पर मुआवजा, खेतों में भरे रेत उठाने के लिए खनन की इजाजत, बाढ़ में जान गंवाने वाले के आश्रितों को 10 लाख मुआवजा, एक साल के लिए सभी ऋण और ब्याज माफ और एमएसपी गारंटी, मनरेगा योजना के तहत 200 दिन तक काम देना शामिल है।
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भारी फोर्स और मुस्तैदी के चलते किसान मंगलवार को चंडीगढ़ में नहीं घुस सके। किसान नेताओं को पहले ही हिरासत में ले लिया गया। सीमाएं सील होने से कुछ समय के लिए जाम की स्थिति बनी और वाहन चालकों को चंडीगढ़ में प्रवेश करने में दिक्कत झेलनी पड़ी। चंडीगढ़ से सटी मोहाली और पंचकूला की सभी सीमाओं पर एहतियातन देर रात तक फोर्स तैनात रही।
बाढ़ से तबाह हुई फसलों का मुआवजा नहीं मिलने से नाराज पंजाब-हरियाणा समेत उत्तर भारत के 16 किसान संगठनों ने मंगलवार को चंडीगढ़ में स्थायी मोर्चा लगाकर धरना देने का एलान किया था। चंडीगढ़ पुलिस के साथ पंजाब व हरियाणा पुलिस ने किसानों को रोकने के लिए सोमवार को ही पुख्ता इंतजाम कर लिए थे। सोमवार रात को ही बैरिकेडिंग कर मोहाली-पंचकूला से लगती चंडीगढ़ की सभी 27 सीमाएं सील कर साढ़े पांच हजार जवानों की तैनाती कर दी गई थी।
मंगलवार सुबह से इन सीमाओं पर पुलिस मुस्तैद रही। सीमाओं पर 100 वाहन भी खड़े किए गए थे, जिनमें ट्रक, टिप्पर भी शामिल थे। इनके अलावा एंबुलेंस, दमकल विभाग की गाड़ियां, वाटर कैनन, वज्र, दंगा रोधी गाड़ियां भी थीं। पैरामिलिट्री और रैपिड एक्शन फोर्स के जवानों को भी लगाया गया था। बड़ी संख्या में फोर्स की तैनाती के चलते पंजाब और हरियाणा के कई जिलों में ही किसान नेताओं और किसानों को आगे बढ़ने से रोक लिया गया।
राज्यपाल के आश्वासन के बाद भी नहीं माने
प्रदर्शन करने वाली किसान यूनियनों में से नौ पंजाब, तीन हरियाणा और एक-एक उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और उत्तराखंड की थी। इनके द्वारा बड़ी संख्या में ट्रैक्टर रैली निकालने की योजना थी। इनकी प्रमुख मांगों में बाढ़ के चलते बर्बाद हुई फसल का मुआवजा जारी किया जाना और सभी फसलों पर न्यूनतम मूल्य निर्धारित करना था। चंडीगढ़ पुलिस समेत पंचकूला और मोहाली के संबंधित अफसरों के साथ बीते दिन दिन किसान यूनियनों के पदाधिकारियों की हुई कई बैठकों के बावजूद यूनियनों ने प्रदर्शन का रास्ता चुना था। इससे पहले बीते रविवार को पंजाब के राज्यपाल ने 11 किसान यूनियनों के नेताओं से बैठक कर उनकी मांगों को केंद्र तक पहुंचाने का आश्वासन दिया था।
मोहाली और पंचकूला पुलिस के बेहतर तालमेल और अथक प्रयासों के चलते किसानों को चंडीगढ़ नहीं पहुंचने दिया गया। रात के वक्त भी बॉर्डर क्षेत्रों में पुलिसकर्मी मुस्तैद रहेंगे ताकि किसान चंडीगढ़ में दाखिल न होने पाएं। कंवरदीप कौर, एसएसपी, चंडीगढ़।
बठिंडा में 12 से अधिक किसान नेता पुलिस हिरासत में
बठिंडा में पुलिस ने 12 से अधिक किसान नेताओं को हिरासत में लिया है। किसान नेताओं में भारतीय किसान यूनियन क्रांतिकारी के नेता पुरुषोत्तम महराज, बलवंत महराज, दर्शन ढिल्लों, तीर्थ राम, गुरजंट सिंह रामपुरा के अलावा एक दर्जन से अधिक किसानों को पुलिस ने हिरासत में लेकर गुप्त जगह पर रखा गया है।
अंबाला में जबरन ट्रैक्टरों से उतार पुलिस वैन में बिठाए
अंबाला-हिसार बाईपास पर चंडीगढ़ कूच को निकले किसानों और पुलिस के बीच झड़प हो गई। पुलिस ने जगह-जगह नाकाबंदी कर शंभू टोल की तरफ ट्रैक्टर-ट्रॉलियों पर जा रहे किसानों को रोका और उन्हें हिरासत में लिया। किसानों व पुलिस के बीच कई जगह धक्का मुक्की भी दिखी। एक जगह किसानों ने पुलिस का नाका ही तोड़ दिया था लेकिन उन्हें पुलिस ने दूसरे नाके पर रोक लिया। वहीं, पुलिस मुलाजिमों ने खुद ट्रैक्टरों की कमान संभालने के बाद उन्हें सुरक्षित स्थानों पर रखा। जबकि किसानों को पुलिस बसों के जरिए हिरासत में लेकर अंबाला सिटी पुलिस लाइन में रखा।
पुलिस ने अंबाला-हिसार हाईवे और शंभू टोल तक जाने वाले सभी लिंक रोड पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया था। वाटर कैनन के साथ बैरिकेड्स लगाए गए थे। अंबाला के अलावा कुरुक्षेत्र से आने वाले किसानों को पुलिस ने हाईवे पर ही रोक लिया। पुलिस अधीक्षक जश्नदीप रंधावा ने खुद मोर्चा संभाला हुआ है।