आत्महत्या करते अन्नदाता: गीतों में पिरोया दर्द, सरकार पर सवाल
किसानों की आए दिन खुदकुशियों पर पंजाबी गायक ने किसानों के दर्द को गीतों में पिरोते हुए सरकार पर भी सवाल खड़े किए हैं। ‘कौण साड्डे विच पाऊंदा वंडियां, सांझे ने किसानी मसले, काहतों पंद्रह ने जत्थेबंदियां, मुंडेयां नू चिट्टा खा गया, चिट्टा मच्छर है नरमे नूं, साड्डे मंडियां च ख्वाब रूल गए, हुण हस्सणां किसान भुल्ल गए, असीं रह गए गन्ने चूपदे, सरकारा सानू चूप गईयां, साड्डे कर्जे च चाअ दब गए, फुल सरों दे नीं हुण चंगे लगदै, आओ लभ लईयै रल खुशियां, नईयो हल कोई खुदकुशियां’
सूबे में आए दिन किसानों की खुदकुशियों पर पंजाबी गायक अमान सिद्धू ने गीत ‘किसान’ पेश किया है और समय की सरकारों पर सवाल खड़े किए हैं। मुसाफिर बैंड के बैनर तले ‘मेरे रांझा पल्ले पादे’ गीत की कामयाबी के बाद अमान सिद्धू ने किसान गीत पेश किया है।
गीत में कर्ज में डूबकर आर्थिक तौर पर कंगाल हुए किसानों के बारे में बात की गई है, वहीं बच्चों की तरह पाल पोस कर उगाई फसल की मंडी में बेकद्री पर भी प्रकाश डाला गया है। गीत में अमान सिद्धू ने किसानों की भलाई के लिए बनीं विभिन्न यूनियनों, सरकारों के खरीद प्रबंधों पर भी गहरा कटाक्ष किया है।
नुक्कड़ नाटकों के जरिए भी किसानों की हालत को बयान कर रहा मुसाफिर बैंड
बरनाला के गांव सेखा के रहने वाले अमान सिद्धू (35) ग्रेजुएट हैं। उनके पिता भी किसान हैं। बरनाला में हुई किसानों की खुदकुशियों से आहत होकर उनके भतीजे सुखविंदर गुरम ने ‘किसान’ गीत लिखा है।
उनका मुसाफिर बैंड नुक्कड़ नाटकों के जरिए भी किसानों की हालत को बयान कर रहा है। गीत के वीडियो डायरेक्टर तरसेम सिंह सिद्धू हैं और संगीत जी.अरप का है। मुसाफिर बैंड के सिमरनजीत सिंह ने किसान गीत की कामयाबी में खूब सहयोग दिया।
उन्हें आशा है कि किसानों के साथ-साथ हर वर्ग के लोग इस गीत को पसंद करेंगे और सरकारें भी किसानों की हालत को सुधारने के लिए योग्य कदम उठाएंगी। इस गीत को फिलहाल यूट्यूब पर डाला गया है, जहां पर हजारों लोग इसे देख चुके हैं।