पंजाब में फिर ट्रैक पर किसान: बटाला में रेलवे लाइन पर धरने पर बैठे, 12 ट्रेनें प्रभावित... जानें इनकी मांगें
किसानों की मांग है कि 100 फीसदी बर्बाद हुई फसल पर 50 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए और सरकारी खरीद के वक्त बदरंग गेहूं और नमी की शर्त पर ढील दी जाए।
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पंजाब के बटाला में किसानों का रेलवे ट्रैक पर अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू हो गया है। किसान मजदूर संघर्ष कमेटी से जुड़े किसानों ने विभिन्न मुद्दों पर रेलवे ट्रैक को पूरी तरह से जाम कर दिया है। प्रदर्शन की वजह से 12 ट्रेनें प्रभावित हुई हैं। रावी एक्सप्रेस समेत सात ट्रेनें रद्द रहीं जबकि तीन एक्सप्रेस ट्रेनों को वाया मुकेरियां (होशियारपुर) दिल्ली रूट पर भेजा गया। सोमवार को भी पांच पैसेंजर ट्रेनें रद्द रहने की बात कही गई है। इस वजह से यात्रियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा है।
रेलवे ट्रैक पर बैठे किसानों ने कपड़े उतार कर सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शन की अगुवाई प्रदेश स्तरीय किसान नेता सविंदर सिंह चुताला, लखविंदर सिंह वरियाम नंगल और हरविंदर सिंह मसानिया ने की। संगठन के वरिष्ठ नेता सरवन सिंह पंधेर और जिला गुरदासपुर के प्रधान हरदीप सिंह फौजी ने कहा कि पिछले दिनों ओलावृष्टि से किसानों का बड़ा नुकसान हुआ है। मगर सरकार के मुआवजे के दावे खोखले साबित हो रहे हैं।
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किसानों की मांग है कि 100 फीसदी बर्बाद हुई फसल पर 50 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा दिया जाए और सरकारी खरीद के वक्त बदरंग गेहूं और नमी की शर्त पर ढील दी जाए। किसान नेताओं ने आगे कहा कि भारत माला प्रोजेक्ट के तहत दिल्ली-कटरा एक्सप्रेस-वे के लिए अधिग्रहित जमीन का मुआवजा एक जैसा दिया जाए। किसानों ने सरकारी और गैर-सरकारी चीनी मिलों का बकाया जारी करने और गन्ने का भाव 380 रुपये प्रति क्विंटल के साथ देने की मांग की।
12 ट्रेनें प्रभावित
किसानों के धरने की वजह से 12 ट्रेनें अमृतसर-पठानकोट रेललाइन पर प्रभावित हुई हैं। इन ट्रेनों में अमृतसर-पठानकोट पैसेंजर ट्रेन, अमृतसर-पठानकोट डीएमयू, बीटीआई जाट एक्सप्रेस, एसबीपी जाट एक्सप्रेस, टाटा जाट एक्सप्रेस, रावी एक्सप्रेस, दिल्ली पठानकोट एसएफ एक्सप्रेस, दुर्गा जाट एक्सप्रेस, एडीआई एवीडीके एक्सप्रेस आदि ट्रेन प्रभावित रहीं।
बारिश और ओलावृष्टि ने हमारी फसलों को नष्ट कर दिया है। हमारी कुछ मांगें हैं। और हम चाहते हैं कि सरकार जल्द से जल्द निरीक्षण करने और हमारी मांगों को सुनने एक टीम भेजे। सरवन सिंह पंढेर, महासचिव, किसान मजदूर संघर्ष कमेटी।