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पंजाब: कृषि अध्यादेशों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन, अमृतसर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग रोका
Tue, 15 Sep 2020 03:02 AM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमृतसर/पटियाला (पंजाब)
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अमृतसर/पटियाला (पंजाब)
Published by: ajay kumar
Updated Tue, 15 Sep 2020 03:02 AM IST
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अमृतसर में किसानों का धरना।
- फोटो : अमर उजाला
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केंद्र सरकार द्वारा एक अध्यादेश जारी कर लागू किए नए कृषि बिल के विरोध में अलग-अलग किसान संगठनों ने सोमवार को अमृतसर-दिल्ली राष्ट्रीय राजमार्ग के अंतर्गत आते ब्यास पुल पर जाम लगा दिया। अमृतसर-जालंधर को जोड़ने वाले इस पुल पर बैठे किसानों ने केंद्र के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
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वहीं रास्ता अवरुद्ध होने के कारण पुल के दोनों तरफ वाहनों की लंबी-लंबी कतार लग गईं। ट्रैफिक जाम होने की खबर मिलते ही थाना ढिलवां के सब इंस्पेक्टर हरजिंदर सिंह भारी पुलिस के बल के साथ ब्यास पुल पर पहुंचे। उन्होंने वाहन चालकों को दूसरे रास्तों से निकलवाया। गांवों की तरफ के इस रूट के कारण वाहन चालकों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी। देर शाम समाचार लिखे जाने तक किसान संगठनों का ब्यास पुल पर धरना जारी रहा। पुलिस अधिकारी उनसे रास्ता खोलने का आग्रह करते रहे लेकिन किसानों ने उनकी नहीं सुनी।
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पटियाला में किसानों की जोरदार रैली
अखिल भारतीय किसान संघर्ष तालमेल कमेटी के आह्वान पर सोमवार को विभिन्न किसान जत्थेबंदियों ने अनाज मंडी में रोष रैली की। केंद्र सरकार द्वारा पास खेती अध्यादेशों का जोरदार विरोध करते हुए इन्हें वापस लेने समेत बिजली संशोधन बिल 2020 को रद्द करने की मांग की गई। अखिल भारतीय किसान संघर्ष तालमेल कमेटी के पंजाब चैप्टर के प्रधान डॉ. दर्शन पाल ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा पास खेती अध्यादेशों ने जहां सारे देश के किसानों में बड़े स्तर पर बेचैनी, रोष और असुरक्षा पैदा की है, वहीं विशेष तौर पर पंजाब व हरियाणा के किसानों में जबरदस्त रोष है।
इस कारण किसान केंद्र के खिलाफ सड़कों पर उतर आया है। इन तीनों अध्यादेशों से पंजाब का मंडी प्रबंध पूरी तरह तहस-नहस हो जाएगा। राष्ट्रीय व प्रदेश स्तर की सरकारी खरीद एजेंसियां मंडी से बाहर हो जाएंगी और किसानों को अपनी फसल की बिक्री के लिए कारपोरेट घरानों व बड़े प्राइवेट व्यापारियों के रहमो करम पर छोड़ दिया जाएगा।
साथ ही बिजली संशोधन बिल 2020 के लागू होने से पंजाब के किसानों को मिलने वाली मुफ्त बिजली की सुविधा भी धीरे-धीरे छीन ली जाएगी। उन्होंने केंद्र से मांग की है कि इन अध्यादेशों को तुरंत रद्द किया जाए।