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Chandigarh News: कल से पंचकूला में तीन दिन के लिए डेरा डालेंगे किसान-मजदूर और कर्मचारी
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संगठनों का दावा, पड़ाव के लिए तमाम तैयारियां कर ली गई हैं पूरी
चंडीगढ़। संयुक्त किसान मोर्चा, केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, कर्मचारी संघों के आह्वान पर हरियाणा के हजारों किसान-मजदूर-कर्मचारी 26 नवंबर से लेकर तीन दिन तक पंचकूला में डेरा डालेंगे। इसके लिए तमाम तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष इंद्रजीत, राज्य प्रधान मास्टर बलबीर, महासचिव सुमित सिंह, सीटू प्रदेश अध्यक्ष सुरेखा, उपाध्यक्ष सतवीर सिंह, महासचिव जय भगवान ने दावा किया कि पड़ाव ऐतिहासिक होगा और यहां से आंदोलन का ऐलान होगा।
उन्होंने कहा कि तीन कृषि कानूनों की वापसी के बाद नौ दिसंबर, 2021 को केंद्र सरकार की ओर से अन्य मुद्दों पर दिये गए लिखित आश्वासन से केंद्र सरकार मुकर गई। इस पृष्ठभूमि में संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से आंदोलन को पुनः बहाल करना पड़ा है। देश में केंद्रीय ट्रेड और कर्मचारी फेडरेशन लंबे समय से आंदोलनरत हैं। पहली बार किसान और मजदूर महापड़ाव के लिए देश भर में 26-28 नवंबर को सभी राज्यों के राजभवनों पर तीन दिन का पड़ाव डालेंगे। हरियाणा का महापड़ाव पंचकूला में होगा।
खाने-पीने की तमाम व्यवस्था करेंगे आएंगे किसान
किसान संगठनों ने गांव-गांव जाकर ट्रैक्टर ट्राॅली व अन्य साधनों में खाने-पीने का सामान सहित लोगों को पंचकूला ले जाने की तैयारियां की हैं। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल खरीद की कानूनी गारंटी, बिजली संशोधन बिल की निरस्ती, कर्ज़ा मुक्ति, लंबित मुआवजे, किसान-मजदूर पेंशन, लेबर कोड निरस्ती, न्यूनतम वेतन, मनरेगा आदि सवालों को लेकर प्रदेश भर में जनाक्रोश व्याप्त है।
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कर्मचारी भी झोंकेंगे ताकत
ऑल इंडिया स्टेट गवर्नमेंट एम्पलाइज फेडरेशन के आह्वान पर राज्य कर्मचारी ने भी तीन दिवसीय महापड़ाव का पुरजोर समर्थन का ऐलान किया है। फेडरेशन अध्यक्ष सुभाष लांबा ने बताया कि केंद्र सरकार पुरानी पेंशन बहाली, ठेका संविदा कर्मियों की रेगुलराइजेशन, निजीकरण पर रोक, खाली पदों को पक्की भर्ती से भरने, आठवें पे कमीशन का गठन, 18 महीने के बकाया डीए डीआर का भुगतान, ट्रेड यूनियन एवं लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा, एक्स ग्रेसिया रोजगार स्कीम में लगाई गई शर्तों को हटाने और पेंशनर्स की 65,70,75 व 80 साल की उम्र में बेसिक पेंशन में 5 प्रतिशत बढ़ोतरी करने आदि मांगों की लगातार अनदेखी कर रही है। इस वजह से कर्मचारियों एवं पेंशनर्स में आक्रोश है और वह भी महापड़ाव में शामिल होकर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे।
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चंडीगढ़। संयुक्त किसान मोर्चा, केंद्रीय ट्रेड यूनियनों, कर्मचारी संघों के आह्वान पर हरियाणा के हजारों किसान-मजदूर-कर्मचारी 26 नवंबर से लेकर तीन दिन तक पंचकूला में डेरा डालेंगे। इसके लिए तमाम तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। किसान सभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष इंद्रजीत, राज्य प्रधान मास्टर बलबीर, महासचिव सुमित सिंह, सीटू प्रदेश अध्यक्ष सुरेखा, उपाध्यक्ष सतवीर सिंह, महासचिव जय भगवान ने दावा किया कि पड़ाव ऐतिहासिक होगा और यहां से आंदोलन का ऐलान होगा।
उन्होंने कहा कि तीन कृषि कानूनों की वापसी के बाद नौ दिसंबर, 2021 को केंद्र सरकार की ओर से अन्य मुद्दों पर दिये गए लिखित आश्वासन से केंद्र सरकार मुकर गई। इस पृष्ठभूमि में संयुक्त किसान मोर्चा की ओर से आंदोलन को पुनः बहाल करना पड़ा है। देश में केंद्रीय ट्रेड और कर्मचारी फेडरेशन लंबे समय से आंदोलनरत हैं। पहली बार किसान और मजदूर महापड़ाव के लिए देश भर में 26-28 नवंबर को सभी राज्यों के राजभवनों पर तीन दिन का पड़ाव डालेंगे। हरियाणा का महापड़ाव पंचकूला में होगा।
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खाने-पीने की तमाम व्यवस्था करेंगे आएंगे किसान
किसान संगठनों ने गांव-गांव जाकर ट्रैक्टर ट्राॅली व अन्य साधनों में खाने-पीने का सामान सहित लोगों को पंचकूला ले जाने की तैयारियां की हैं। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल खरीद की कानूनी गारंटी, बिजली संशोधन बिल की निरस्ती, कर्ज़ा मुक्ति, लंबित मुआवजे, किसान-मजदूर पेंशन, लेबर कोड निरस्ती, न्यूनतम वेतन, मनरेगा आदि सवालों को लेकर प्रदेश भर में जनाक्रोश व्याप्त है।
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कर्मचारी भी झोंकेंगे ताकत
ऑल इंडिया स्टेट गवर्नमेंट एम्पलाइज फेडरेशन के आह्वान पर राज्य कर्मचारी ने भी तीन दिवसीय महापड़ाव का पुरजोर समर्थन का ऐलान किया है। फेडरेशन अध्यक्ष सुभाष लांबा ने बताया कि केंद्र सरकार पुरानी पेंशन बहाली, ठेका संविदा कर्मियों की रेगुलराइजेशन, निजीकरण पर रोक, खाली पदों को पक्की भर्ती से भरने, आठवें पे कमीशन का गठन, 18 महीने के बकाया डीए डीआर का भुगतान, ट्रेड यूनियन एवं लोकतांत्रिक अधिकारों की सुरक्षा, एक्स ग्रेसिया रोजगार स्कीम में लगाई गई शर्तों को हटाने और पेंशनर्स की 65,70,75 व 80 साल की उम्र में बेसिक पेंशन में 5 प्रतिशत बढ़ोतरी करने आदि मांगों की लगातार अनदेखी कर रही है। इस वजह से कर्मचारियों एवं पेंशनर्स में आक्रोश है और वह भी महापड़ाव में शामिल होकर सरकार के खिलाफ आवाज बुलंद करेंगे।