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मोदी के फैसले के खिलाफ हुए किसान, किया ऐलान- सड़क पर उतरेंगे

Sat, 03 Dec 2016 09:01 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 03 Dec 2016 09:01 AM IST
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farmers embarassed due to note ban decision of pm modi, bhartiya kisan union give warning
Punjab farmer - फोटो : File Photo
नोटबंदी के फैसले का सबसे बड़ा शिकार किसान हुए हैं। भाकियू ने केंद्र सरकार को चेतावनी दी है कि हालात न सुधरे तो सड़कों पर उतरेंगे। दरअसल, किसानों के पास न तो खाद व कीटनाशक खरीदने के पैसे हैं और न ही मजदूरी देने को। अब नोटबंदी के चलते सब्जियों के भाव गिर गए हैं।
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मौजूदा हालातों को लेकर भारतीय किसान यूनियन की मीटिंग प्रधान बलबीर सिंह राजेवाल की अगुवाई में हुई। जिसमें चेतावनी दी गई कि अगर कैश की पाबंदी खत्म न की गई तो किसान सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। राजेवाल ने कहा कि अगर नोटबंदी के चलते यही हालात रहे तो खेतीबाड़ी बिल्कुल तबाह हो जाएगी।
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मंडी में हर खेत उपज के भाव बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। आलू, गोभी, मटर व अन्य सब्जियों के भाव बुरी तरह गिर गए हैं। सहकारी संस्थाओं में किसानों को कर्ज वापस करने और नया कर्ज लेने में बहुत मुश्किल आ रही है। मजदूरी देने, कीटनाशक व खाद खरीदने को पैसे नहीं मिल रहे हैं।
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इससे रबी की फसलों पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ रहा है। सहकारी मिल्क प्लांट किसानों को दूध के पैसे देने में असमर्थ हैं क्योंकि 24 हजार रुपये प्रति हफ्ते से ज्यादा कैश नहीं निकलवा सकते। सारा दिन बैंकों की लाइनों में लगने के बाद भी दो-चार हजार से ज्यादा नहीं मिल रहे हैं।

पहले कर्ज तले दबा किसान, अब और बढ़ गई मुश्किलें

farmers embarassed due to note ban decision of pm modi, bhartiya kisan union give warning
Punjab farmer - फोटो : File Photo
पहले ही किसान कर्ज तले दब कर आत्महत्याएं कर रहे हैं, अब केंद्र सरकार ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। वक्ताओं ने कहा कि पिछले साल सरकार ने गन्ने का भाव हरियाणा से कम निर्धारित किया। इस साल भी तय तीन सौ रुपये प्रति क्विंटल भाव हरियाणा से कम है। इस बात पर चिंता जताई गई कि अब तक धान की अदायगी नहीं हुई है।

जिसके चलते किसानों को कर्ज पर ज्यादा ब्याज देना पड़ रहा है। समय से कर्ज न लौटाने पर रियायत भी नहीं मिलेगी और जुर्माना देना पड़ेगा। मीटिंग में फैसला किया गया कि सतलुज यमुना लिंक नहर पर यूनियन खुद ही सुप्रीम कोर्ट में नए सिरे से केस दायर करेगी। जिसके लिए राजेवाल की अगुवाई में पांच मेंबरी कमेटी बनाई गई।

दिसंबर में होगी किसान संसद
भाकियू ने दिसंबर में चंडीगढ़ संसद आयोजित करने का फैसला किया है। बलबीर सिंह राजेवाल ने कहा कि चुनाव का बिगुल बजने वाला है। सभी पार्टियां झूठे वादों में फंसा कर किसानों के वोट लेना चाहती हैं। सब कर्ज माफी की बात करते हैं पर कैसे माफ होगा, यह कोई नहीं बताता।

खेती के मुद्दे उलझते जा रहे हैं। इसलिए दिसंबर में किसान संसद बुलाई जाएगी। जिसमें सभी सियासी पार्टियों के प्रतिनिधियों को बुला कर खेती के मुद्दों पर उनका पक्ष लिया जाएगा। किसानों के मुद्दों पर उनकी क्या नीतियां होंगी, यह जाना जाएगा।
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