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बासमती में किसानों की रुचि नहीं: पंजाब में सरकार के प्रयासों के बावजूद नहीं बढ़ा रकबा, सही दाम न मिलना कारण
Sat, 12 Jul 2025 07:06 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
राजिंद्र शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sat, 12 Jul 2025 07:06 PM IST
सार
पंजाब में बासमती की खेती वर्ष 2015-16 में 7.63 लाख हेक्टेयर एरिया से कम होकर वर्ष 2024-25 में 6.80 लाख हेक्टेयर एरिया पर पहुंच गई है। पिछले साल सरकार वर्ष 2023 के मुकाबले बासमती का क्षेत्र बढ़ाने में सफल भी रही थी।
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Rice
- फोटो : Istock
विस्तार
पंजाब सरकार के तमाम प्रयासों के बावजूद किसान बासमती की खेती में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। पंजाब सरकार ने इस बार सिर्फ 7 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बासमती की खेती का लक्ष्य तय किया है। इसके बावजूद अभी तक सिर्फ 3.60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही बासमती की रोपाई हो पाई है। किसान सही दाम न मिलने को बासमती की खेती में रुचि न दिखाने का प्रमुख कारण बता रहे हैं।
इस कारण बासमती निर्यातकों की चिंता भी बढ़ गई है। उनका कहना है कि इससे निर्यात पर भी असर पड़ेगा। वे बासमती की मांग पूरी नहीं कर पाएंगे। ईरान-इस्राइल युद्ध के कारण पहले ही प्रदेश के बासमती निर्यातकों को नुकसान उठाना पड़ा है।
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इस कारण बासमती निर्यातकों की चिंता भी बढ़ गई है। उनका कहना है कि इससे निर्यात पर भी असर पड़ेगा। वे बासमती की मांग पूरी नहीं कर पाएंगे। ईरान-इस्राइल युद्ध के कारण पहले ही प्रदेश के बासमती निर्यातकों को नुकसान उठाना पड़ा है।
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बासमती में कम लगता है पानी
पंजाब में बासमती की खेती के लिए जून मध्य से जुलाई के पहले सप्ताह तक का समय उपयुक्त माना जाता है। इस दौरान मौसम भी फसल के लिए अनुकूल होता है, क्योंकि बारिश भी फसल के विकास में मदद करती है। हालांकि किसान जुलाई के पूरे महीने भी बासमती की खेती करते रहते हैं। बासमती के लिए धान की अन्य किस्मों के मुकाबले कम पानी की आवश्यकता होती है। इस कारण पंजाब सरकार भी बासमती की खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित करती है लेकिन इसके कुछ अच्छे परिणाम नहीं मिल रहे।
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