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Chandigarh News: किसानों ने किया पराली नोटिस के खिलाफ आंदोलन का एलान
Mon, 29 Sep 2025 09:18 PM IST
चंडीगढ़ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़
Updated Mon, 29 Sep 2025 09:18 PM IST
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संवाद न्यूज एजेंसी
जगरांव। भारतीय किसान यूनियन एकता डकौंदा की ओर से ब्लॉक अध्यक्ष तरसेम सिंह बसुवाल की अध्यक्षता में गांव देहड़का में बैठक हुई। जिला अध्यक्ष जगतार सिंह देहड़का विशेष रूप से मौजूद रहे। बैठक में पिछले साल पराली जलाने वाले छोटे किसानों को फिर से नोटिस भेजने की आलोचना की गई। किसान नेताओं ने घोषणा की कि इसके खिलाफ़ आंदोलन चलाया जाएगा। उन्होंने अपील की कि जगरांव क्षेत्र के प्रभावित किसान मंगलवार सुबह 11 बजे एसडीएम कार्यालय जगरांव के सामने एकत्र हों जिससे नोटिस रद्द करवाए जा सकें।
इस बैठक में लुधियाना सेशन कोर्ट द्वारा एक मजदूर का घर साहूकार से बचाने के प्रयास में किसान नेता और मजदूर परिवार को तीन साल की सजा सुनाने की कड़ी निंदा की गई। इसके साथ ही ग्रामीणों ने संगठन के नेतृत्व में प्रभावित परिवारों की मदद के लिए घर-घर से रेह और गेहूं का बीज इकट्ठा करने का फ़ैसला किया। बाढ़ प्रभावित लोगों को 70 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा, ढहे घरों का पुनर्निर्माण और प्रति एकड़ शर्त को हटाने की मांग की गई।किसान नेताओं ने कहा कि बाढ़ प्राकृतिक आपदा नहीं बल्कि प्रबंधन की नाकामी है। उन्होंने धान की फसल में रोग और रंग खराब होने पर किसानों को पूरा बाजार भाव और मुआवजा देने की मांग उठाई। सुप्रीम कोर्ट द्वारा पराली जलाने पर किसानों को जेल भेजने के आदेश को निंदनीय बताया गया। इस मौके पर मांग की गई कि ग्रीन ट्रिब्यूनल की सिफारिशों के अनुसार पराली प्रबंधन पर प्रति क्विंटल या प्रति एकड़ राहत दी जाए।
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जगरांव। भारतीय किसान यूनियन एकता डकौंदा की ओर से ब्लॉक अध्यक्ष तरसेम सिंह बसुवाल की अध्यक्षता में गांव देहड़का में बैठक हुई। जिला अध्यक्ष जगतार सिंह देहड़का विशेष रूप से मौजूद रहे। बैठक में पिछले साल पराली जलाने वाले छोटे किसानों को फिर से नोटिस भेजने की आलोचना की गई। किसान नेताओं ने घोषणा की कि इसके खिलाफ़ आंदोलन चलाया जाएगा। उन्होंने अपील की कि जगरांव क्षेत्र के प्रभावित किसान मंगलवार सुबह 11 बजे एसडीएम कार्यालय जगरांव के सामने एकत्र हों जिससे नोटिस रद्द करवाए जा सकें।
इस बैठक में लुधियाना सेशन कोर्ट द्वारा एक मजदूर का घर साहूकार से बचाने के प्रयास में किसान नेता और मजदूर परिवार को तीन साल की सजा सुनाने की कड़ी निंदा की गई। इसके साथ ही ग्रामीणों ने संगठन के नेतृत्व में प्रभावित परिवारों की मदद के लिए घर-घर से रेह और गेहूं का बीज इकट्ठा करने का फ़ैसला किया। बाढ़ प्रभावित लोगों को 70 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा, ढहे घरों का पुनर्निर्माण और प्रति एकड़ शर्त को हटाने की मांग की गई।किसान नेताओं ने कहा कि बाढ़ प्राकृतिक आपदा नहीं बल्कि प्रबंधन की नाकामी है। उन्होंने धान की फसल में रोग और रंग खराब होने पर किसानों को पूरा बाजार भाव और मुआवजा देने की मांग उठाई। सुप्रीम कोर्ट द्वारा पराली जलाने पर किसानों को जेल भेजने के आदेश को निंदनीय बताया गया। इस मौके पर मांग की गई कि ग्रीन ट्रिब्यूनल की सिफारिशों के अनुसार पराली प्रबंधन पर प्रति क्विंटल या प्रति एकड़ राहत दी जाए।
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