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पराली पर घमासान: पंजाब के किसान नेता बोले- हमें बदनाम किया जा रहा, दिल्ली में प्रदूषण की ये वजह बताई

Tue, 07 Nov 2023 08:50 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Tue, 07 Nov 2023 08:50 PM IST
सार

सुखदेव सिंह कोकरीकलां ने मंगलवार को कहा कि किसानों को बेवजह निशाना बनाया जा रहा है और दिल्ली में वायु प्रदूषण को लेकर बदनाम किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यह कैसे संभव है कि पंजाब में पराली जलाने से धुआं केवल दिल्ली में वायु प्रदूषण कर रहा है।

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Farmer leader from Punjab said We are being defamed for pollution of Delhi
फाइल फोटो। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

पंजाब के किसान नेताओं ने मंगलवार को कहा कि दिल्ली में वायु प्रदूषण के लिए उन्हें अनावश्यक रूप से बदनाम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण के प्रमुख स्रोत उद्योग, वाहन और निर्माण क्षेत्र हैं न कि पराली का जलना।

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गौरतलब है कि हर साल अक्तूबर और नवंबर में दिल्ली में प्रदूषण के स्तर में बढ़ोतरी का कारण पंजाब और हरियाणा में धान की पराली जलाने को माना जाता रहा है। राष्ट्रीय राजधानी में वायु गुणवत्ता में हालिया गिरावट के लिए आप और भाजपा ने एक-दूसरे के राज्यों में पराली जलाने को जिम्मेदार ठहराया है।
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पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने सोमवार को कहा था कि सबसे ज्यादा पराली जलाने की घटनाएं भाजपा शासित हरियाणा और उत्तर प्रदेश में सामने आ रही हैं जबकि पंजाब में ऐसे मामले लगातार घट रहे हैं। उधर, हरियाणा के कृषि मंत्री जय प्रकाश दलाल ने राज्य में बढ़ रहे वायु प्रदूषण के लिए पंजाब में जलाई जा रही पराली को जिम्मेदार ठहराते हुए भगवंत मान सरकार की आलोचना की है।

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इस बीच भारतीय किसान यूनियन (उगराहां) के महासचिव सुखदेव सिंह कोकरीकलां ने मंगलवार को कहा कि किसानों को बेवजह निशाना बनाया जा रहा है और दिल्ली में वायु प्रदूषण को लेकर बदनाम किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि यह कैसे संभव है कि पंजाब में पराली जलाने से धुआं केवल दिल्ली में वायु प्रदूषण कर रहा है, जालंधर, अमृतसर और पंजाब के अन्य जिलों में नहीं। कोकरीकलां ने आश्चर्य जताया कि जहां खेतों में आग लग रही है, वहां हवा की गुणवत्ता अच्छी है लेकिन यह आग 300 किमी दूर दिल्ली में प्रदूषण फैला रही है?

पंजाब में किसान पराली पर आग लगाते हैं, क्योंकि उन्हें गेहूं की फसल के लिए खेत तैयार करना होता है। किसानों को नवंबर के पहले पखवाड़े में गेहूं बोने की सलाह दी गई है क्योंकि देरी से बुआई करने पर फसल की पैदावार में गिरावट आ सकती है। पंजाब में 15 सितंबर से छह नवंबर तक खेत में पराली जलाने के कुल 19,463 मामले दर्ज किए गए हैं। यह पिछले साल इसी अवधि में दर्ज 29,999 मामलों की अपेक्षा 35 प्रतिशत कम हैं। पंजाब में सोमवार को पराली जलाने की 2,060 घटनाएं दर्ज की गईं। 

सरकार खेतों से पराली उठाने की व्यवस्था करेः कोकरीकलां

कोकरीकलां ने कहा कि सरकार को खेतों से पराली एकत्र करने के लिए आवश्यक व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए और किसान पराली मुफ्त में देने को तैयार है। राज्य में किसानों की मांग है कि पराली प्रबंधन के लिए उन्हें 200 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिया जाए। 10 एकड़ तक की जोत वाले छोटे किसान पराली प्रबंधन के लिए फसल अवशेष प्रबंधन मशीनरी नहीं खरीद सकते क्योंकि वे पहले से ही कर्ज में डूबे हैं। छोटे किसानों के पास अगली फसल बोने के लिए पराली जलाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। केवल बड़े उत्पादक ही फसल अवशेष प्रबंधन के लिए हैप्पी सीडर, बेलर आदि मशीनें खरीद सकते हैं।

सरकार पराली प्रबंधन की मशीनें उपलब्ध कराएः बुर्जगिल

बीकेयू (डकौंदा) के अध्यक्ष बूटा सिंह बुर्जगिल ने कहा कि सरकार को किसानों, खासकर छोटे किसानों के खिलाफ कार्रवाई करने के बजाय उन्हें फसल अवशेष प्रबंधन के लिए मशीनें या अन्य समाधान उपलब्ध कराने चाहिए। पिछले साल की तुलना में इस सीजन में खेतों में आग लगाने की घटनाओं में 40 फीसदी की कमी आई है।

अगली फसल में देरी नहीं चाहते किसान: लखोवाल

बीकेयू (लखोवाल) के महासचिव हरिंदर सिंह लखोवाल ने कहा कि धान की कटाई और अगली फसल की बुआई के बीच अब बहुत कम समय है और किसान नहीं चाहते कि उनकी अगली फसल में देरी हो क्योंकि इससे उपज में गिरावट हो सकती है।

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