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पंजाब की किसान जत्थेबंदियों का केंद्र को अल्टीमेटम- 10 दिसंबर तक रद्द हों कृषि कानून, नहीं तो...  

Sun, 22 Nov 2020 01:13 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sun, 22 Nov 2020 01:13 AM IST
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Farmer groups of Punjab gave ultimatum to Center over agriculture bill
किसान जत्थेबंदियों के सदस्य... - फोटो : amar ujala

पंजाब की 30 किसान जत्थेबंदियों ने केंद्र सरकार को 10 दिसंबर तक तीनों कृषि कानून रद्द करने का अल्टीमेटम देते हुए मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की अपील को जनहित में स्वीकार करते हुए 23 नवंबर शाम के बाद अगले 15 दिन के लिए मालगाड़ियों के साथ-साथ सवारी गाड़ियों को चलाने पर सहमति दे दी है। लेकिन जत्थेबंदियों ने रेलवे पार्कों में चल रहे धरनों को भी जारी रखने का एलान किया है। चंडीगढ़ स्थित किसान भवन में भारतीय किसान मंच के प्रधान बूटा सिंह शादीपुर की प्रधानगी में 30 किसान संगठनों ने यह फैसला लिया।

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जत्थेबंदियों ने साफ कर दिया है कि अगर केंद्र सरकार कानून वापस नहीं लेगी तो 10 दिसंबर से दोबारा ट्रेनें रोक दी जाएंगी। इसके अलावा, 52 दिन से चल रहे पंजाब भर में भाजपा नेताओं के घरों के घेराव, मल्टीनेशनल कंपनियों के मॉल, अंबानी के रिलायंस पंपों पर भी पक्के धरने जारी रहेंगे। 26-27 नवंबर को दिल्ली कूच करने के लिए भी सभी 30 जत्थेबंदियों की ओर से पंजाब भर में तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। किसानों ने महीने भर का राशन, ईंधन और अन्य जरूरत की वस्तुएं इकट्ठा कर ली हैं। 
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मुख्यमंत्री से बैठक में इन मुद्दों पर भी हुई चर्चा
भाकियू-एकता डकौंदा के महासचिव जगमोहन सिंह पटियाला ने बताया कि पंजाब की सभी किसान जत्थेबंदियों ने मुख्यमंत्री के साथ पंजाब भवन में बैठक के दौरान रेलवे संबंधी बातचीत के बाद पंजाब स्तर के किसानी मसलों पर भी चर्चा की। किसान नेताओं ने मुख्यमंत्री के ध्यान में लाया कि केंद्र के कृषि कानूनों की तरह अबोहर की मंडी से पंजाब सरकार ने किन्नू खरीदने की इजाजत दी है जो दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे मंडी बोर्ड को करोड़ों का चूना लगा है, इसलिए संबंधित अफसरों पर कार्रवाई की जाए। इसके अलावा यूरिया, गन्ने की अदायगी, लंबे समय से बकाया सहकारी कर्ज की माफी, खराब हुई कपास का मुआवजा और धान के मुद्दे पर भी चर्चा हुई।
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