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Womens Day: परिजन बोले- लॉ की पढ़ाई मत करो शादी नहीं होगी, आज बन गई वाइस चांसलर
Sun, 08 Mar 2020 12:57 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
सुशील कुमार, चंडीगढ़
सुशील कुमार, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Sun, 08 Mar 2020 12:57 PM IST
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प्रो. विनय कपूर मेहरा
पुरुषों की फील्ड में धाक जमाने वाली प्रो. विनय कपूर मेहरा की संघर्ष की कहानी बड़ी है। शुरू से लेकर आज तक वह संघर्ष कर रही हैं और संघर्ष करना उन्हें अच्छा लगता है। यही कारण है कि आज वह कानून के विश्वविद्यालय में पहली महिला कुलपति बनी हैं।
कहती हैं कि परिवार नहीं चाहता था कि आगे पढ़ाई हो और कानून की पढ़ाई करवाने के तो बिल्कुल पक्षधर नहीं थे। कहते थे कानून की पढ़ाई वाली लड़की से शादी नहीं होगी, लेकिन परिवार से लड़कर लॉ किया और आज कानून के शिक्षण संस्थानों को गति प्रदान कर रही हैं।
अमृतसर की रहने वाली प्रो. विनय कपूर मेहरा स्नातक की पढ़ाई कर रही थीं। उसी दौरान परिवार वालों ने शादी की चर्चा शुरू कर दी और लड़का भी देख लिया। प्रो. कपूर ने इसका विरोध किया। कहा कि वह आगे पढ़ना चाहती हैं। काफी संघर्ष के बाद आगे पढ़ने की अनुमति मिली।
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एलएलएम में एडमिशन लेना चाहती थी, उस पर भी परिवार ने आपत्ति लगाई। कहा कि इस समय वातावरण अलग है। कानून की पढ़ाई करने वाली लड़कियों की शादी में दिक्कतें आती हैं। बमुश्किल परिवार को मनाया और उसके बाद नौकरी गुरु नानक देव विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर की लग गई।
12 साल तक प्राइवेट नौकरी की तरह काम किया और बाद में स्थाई हुई। इसके बाद नियमत: प्रमोशन होने चाहिए थे, लेकिन निर्धारित समय के आठ साल बाद प्रोफेसर बनीं। उसके बाद वहीं पर कानून विभाग की एचओडी बनीं और वहां की सिंडिकेट, सीनेट में जगह बनाई।
शिक्षकों केसंगठन में राजनीति भी की, उनकी हर क्षेत्र में पकड़ दी। जिस पाले से वह चुनाव लड़ती थीं वही पक्ष विजेता होता था। उनकी छवि अच्छी थी। उनके काम को देखते हुए पंजाब सरकार ने वर्ष 2016 से 2019 तक इनफॉर्मेशन कमिश्नर बनाया। यहां भी कमिश्नर बनने वाली वह पहली महिला प्रोफेसर थीं। इसी बीच उन्होंने वीआरएस भी ले लिया।
सरकार ने उनकी उपलब्धियों को देखते हुए सोनीपत स्थित डॉ. बीआर आंबेडकर नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर बना दिया। यूनिवर्सिटी की पहली महिला कुलपति बनीं। यूनिवर्सिटी भी नया है। स्टाफ भी नहीं था। यहां चपरासी से लेकर रजिस्ट्रार, वाइस चांसलर तक ने काम किया।
अब धीरे धीरे यूनिवर्सिटी में विद्यार्थियों की संख्या के अलावा शिक्षकों व स्टॉफ की संख्या बढ़ रही है। कहती हैं कि महिलाएं अपने लक्ष्य तय करें और उसे पाने का रास्ता उनके पास है तो रुके नहीं, परिवार विरोध करे तो तथ्यों केसाथ उनके समझाएं और विश्वास में लें। ऐसा करने से आपका सपना पूरा होगा और कामयाबी भी मिलेगी।
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कहती हैं कि परिवार नहीं चाहता था कि आगे पढ़ाई हो और कानून की पढ़ाई करवाने के तो बिल्कुल पक्षधर नहीं थे। कहते थे कानून की पढ़ाई वाली लड़की से शादी नहीं होगी, लेकिन परिवार से लड़कर लॉ किया और आज कानून के शिक्षण संस्थानों को गति प्रदान कर रही हैं।
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अमृतसर की रहने वाली प्रो. विनय कपूर मेहरा स्नातक की पढ़ाई कर रही थीं। उसी दौरान परिवार वालों ने शादी की चर्चा शुरू कर दी और लड़का भी देख लिया। प्रो. कपूर ने इसका विरोध किया। कहा कि वह आगे पढ़ना चाहती हैं। काफी संघर्ष के बाद आगे पढ़ने की अनुमति मिली।
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एलएलएम में एडमिशन लेना चाहती थी, उस पर भी परिवार ने आपत्ति लगाई। कहा कि इस समय वातावरण अलग है। कानून की पढ़ाई करने वाली लड़कियों की शादी में दिक्कतें आती हैं। बमुश्किल परिवार को मनाया और उसके बाद नौकरी गुरु नानक देव विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर की लग गई।
12 साल तक प्राइवेट नौकरी की तरह काम किया और बाद में स्थाई हुई। इसके बाद नियमत: प्रमोशन होने चाहिए थे, लेकिन निर्धारित समय के आठ साल बाद प्रोफेसर बनीं। उसके बाद वहीं पर कानून विभाग की एचओडी बनीं और वहां की सिंडिकेट, सीनेट में जगह बनाई।
शिक्षकों केसंगठन में राजनीति भी की, उनकी हर क्षेत्र में पकड़ दी। जिस पाले से वह चुनाव लड़ती थीं वही पक्ष विजेता होता था। उनकी छवि अच्छी थी। उनके काम को देखते हुए पंजाब सरकार ने वर्ष 2016 से 2019 तक इनफॉर्मेशन कमिश्नर बनाया। यहां भी कमिश्नर बनने वाली वह पहली महिला प्रोफेसर थीं। इसी बीच उन्होंने वीआरएस भी ले लिया।
सरकार ने उनकी उपलब्धियों को देखते हुए सोनीपत स्थित डॉ. बीआर आंबेडकर नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की वाइस चांसलर बना दिया। यूनिवर्सिटी की पहली महिला कुलपति बनीं। यूनिवर्सिटी भी नया है। स्टाफ भी नहीं था। यहां चपरासी से लेकर रजिस्ट्रार, वाइस चांसलर तक ने काम किया।
अब धीरे धीरे यूनिवर्सिटी में विद्यार्थियों की संख्या के अलावा शिक्षकों व स्टॉफ की संख्या बढ़ रही है। कहती हैं कि महिलाएं अपने लक्ष्य तय करें और उसे पाने का रास्ता उनके पास है तो रुके नहीं, परिवार विरोध करे तो तथ्यों केसाथ उनके समझाएं और विश्वास में लें। ऐसा करने से आपका सपना पूरा होगा और कामयाबी भी मिलेगी।