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Chandigarh News: डंपिंग ग्राउंड पर जवाब देने में नाकाम, प्रशासन व निगम पर 25 हजार रुपये जुर्माना

Thu, 16 Oct 2025 02:16 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Thu, 16 Oct 2025 02:16 AM IST
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Failed to respond on dumping ground, administration and corporation fined Rs 25,000

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चंडीगढ़। बार-बार मौका देने के बावजूद डड्डूमाजरा डंपिंग ग्राउंड को खाली करने और वहां से कूडे का पहाड़ गायब करने पर बिंदुवार जवाब दाखिल नहीं करने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने चंडीगढ़ प्रशासन और नगर निगम चंडीगढ़ पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है।
याचिकाकर्ता वकील अमित शर्मा ने हाईकोर्ट में कागज और तस्वीरें दिखाकर बताया कि कचरा डंप की शुरुआत साल 1979 में हुई थी। उन्होंने कहा कि गरीब परिवारों के लिए घर और बच्चों के लिए थीम पार्क भी यहीं मौजूद थे लेकिन अब पूरा इलाका कचरे के ढेर में तब्दील हो गया है। उन्होंने बताया कि नगर निगम ने अदालत में आश्वासन दिया था कि डंप को 21 मई 2025 तक पूरी तरह साफ कर दिया जाएगा लेकिन उस दिन ही डंप में आग लग गई जिसे बुझाने के लिए 1.25 लाख लीटर पानी इस्तेमाल करना पड़ा। उन्होंने बताया कि 2005 से 2021 के बीच डंप साइट पर हर साल करीब 30 बार आग लग चुकी है।
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अदालत ने प्रशासन और नगर निगम की लापरवाही पर कड़ी नाराजगी जताई और पूछा कि डंप की सफाई की प्रक्रिया कहां तक पहुंची है और आसपास रह रहे लोगों के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। नगर निगम के वकील गौरव मोहुंटा ने बताया कि अभी भी करीब 48,000 मीट्रिक टन कचरा साफ नहीं हुआ है। उन्होंने देरी की वजह मानसून बताई और कहा कि यह इलाका वर्ष 1989 में डंपिंग के लिए चिह्नित किया गया था। अदालत ने पूछा कि क्या इस डंप के पास बनी रिहायशी कॉलोनियों को आधिकारिक मंजूरी मिली हुई है। इस पर प्रशासन के वकील तन्मय गुप्ता ने कहा कि ये बस्तियां प्रशासन के आने से पहले बनी थीं और यहां पक्के व कच्चे दोनों तरह के घर हैं।
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कोर्ट ने कड़ी चेतावनी देते हुए पूछा कि इंदौर मॉडल क्यों नहीं अपनाया गया? अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए कि अब आगे की सुनवाई से पहले दोनों विभाग बिंदुवार जवाब दाखिल करें। मुख्य न्यायाधीश नागू ने पूछा कि चंडीगढ़ में कचरा प्रबंधन के लिए इंदौर मॉडल जैसा प्रभावी तरीका क्यों नहीं अपनाया गया। नगर निगम की ओर से भरोसा दिलाया गया कि सफाई कार्य को तेज किया जाएगा। वहीं याचिकाकर्ता ने कहा कि झूठे हलफनामों पर कार्रवाई होने से ही सुधार संभव होगा।
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