मौत का मंजरः चश्मदीदों ने बताई अमृतसर हादसे की खौफनाक कहानी, पढ़कर रो पड़ेंगे सब
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रावण दहन का आयोजन होने जा रहा था, जौड़ा फाटक की पटरियों पर खासी भीड़ जमा थी और अचानक बत्ती गुल हो गई। यहीं से शुरू हुआ मौत का तांडव। आंखों से मौत का लाइव तांडव देखने वाले खन्ना सक्सेना के रोंगट खड़े हो जाते हैं और याद आते ही पूरे बदन में सिहरन दौड़ जाती है। उन्होंने बताया कि अचानक एक तेज आंधी आई और पांच सेकेंड बाद चारों तरफ चीख पुकार थी।
मेरे हाथ पांव फूल गए, कुछ समझ ही नहीं आ रहा था कि हुआ क्या है, मैं किधर जाऊं। दिल की धड़कन बढ़ चुकी थी और चक्कर आ रहे थे। कुछ सेकेंड बाद खुद को संभाला तो पता चला कि डीएमयू ने कई लोगों को कुचल डाला है। मेरे साथ जगनंदन और अन्य साथी आए हुए थे। सब कहां चले गए कुछ पता ही नहीं चला। मोबाइल पर टार्च जलाया तो 35 मिनट बाद जाकर जगनंदन दिखाई दिया, जो पटरी के बाहर औधे मुंह पड़ा हुआ था।
कोई भी सहायता नहीं थी, बस शोर शराबा ही सुन रहा था। मैं चीखने लगा कि इनको उठाओ.. कोई सुन ही नहीं रहा था। सब इधर- उधर हांफते हुए दौड़ रहे थे। किसी तरह से जगनंदन को उठाकर अस्पताल लाए तो पता चला कि टांग में फ्रैक्चर हो गया है। पैर की हड्डी भी दब गई है।
वह 35 मिनट का मंजर खौफनाक है। आंखों में खौफ अभी भी था। खन्ना सक्सेना बोले कि पहले हावड़ा ट्रेन आई थी, वह हार्न बजाते हुए निकली तो लोगों ने पटरी खाली कर दी। किसी को क्या पता था कि जिस पटरी पर सब लोग जाकर खड़े हो गए हैं, वहां डीएमयू आ जाएगी। रावण के पटाखों की आवाज से कुछ सुनाई नहीं दे रहा था, डीएमयू की आवाज भी दबकर रह गई। हवा की तेज आंधी की तरह ट्रेन आई और तहस नहस कर चली गयी।
लोगों के शव कटे पटरी पर पड़े थे, कुछ लोग जो पटरी से बाहर जा गिरे, वह कराह रहे थे। महिलाएं चीख रही थी, सब अपने-अपने परिवार वालों की खोज कर रहे थे। आजमगढ़ के रहने वाले राकेश कुमार भी इस हादसे का शिकार हुए हैं। अमर उजाला के साथ बातचीत में यूपी के आजमगढ़ के रहने वाले राकेश ने बताया कि वह कृष्णा नगर में रहता है और पीओपी का काम करता है। अपने भाई जयप्रकाश, गांव के रहने वाले गुड्डू और मिलन के साथ दशहरा देखने आया था।
रावण दहन के बाद याद नहीं
हम लोग पटरी पर खड़े थे और रावण दहन तक तो सब कुछ याद है, उसके बाद अचानक तेज आंधी आई और सब कुछ चीरती चली गई। बस फिर मुझे कुछ याद नहीं, एक धक्का सा पड़ा था मुझे। 20 मिनट बाद पटरी के बाहर पत्थरों पर मैं पड़ा था, होश आया तो भाई जयप्रकाश को उठाया। गुड्डू की हालत ज्यादा खराब थी, खून बहुत बह रहा था। हमारी चीखों को कई सुन नहीं रहा था।
40 मिनट बाद आई एंबुलेंस
40 मिनट बाद एक एंबुलेंस आई तो उसमें बैठाकर अस्पताल लाया गया। नई जिंदगी देख रहा हूं, मेरा दोस्त मिलन ट्रेन से कट गया। बाकी तीनों जख्मी है। पूरा अंधेरा था, कुछ दिखाई नहीं दिया कि कब ट्रेन आ गई। आवाज तक सुनाई नहीं दी। हमारा पूरा ध्यान रावण दहन की तरफ था। मैं अब वह मंजर याद नहीं करना चाहता, मेरा दिमाग फट रहा है।