लापरवाही की हद...पॉजिटिव की बजाय निगेटिव मरीज को लेने पहुंच गई एंबुलेंस
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कोरोना महामारी का खौफ लोगों के साथ ही स्वास्थ्य विभाग पर भी इस कदर हावी हो चुका है कि वे जल्दबाजी और डर के कारण अजीब-अजीब सी गलतियां कर रहे हैं। ऐसा ही वाकया शनिवार को हल्लोमाजरा निवासी 60 साल के अशोक कुमार के साथ घटा। अशोक की रिपोर्ट निगेटिव आने के बावजूद जीएमएसएच- 16 की एंबुलेंस उन्हें लेने घर पहुंच गई।
काफी समझाने के बाद भी एंबुलेंस वाले नहीं माने तो अशोक के घरवालों ने उन्हें डांट कर वहां से भगाया। उनके घरवालों का कहना है कि एक तो कोरोना के नाम पर लोग वैसे ही डरे हुए हैं। उस पर झूठी रिपोर्ट को आधार बनाकर घर के सदस्य को लेने के लिए एंबुलेंस के आने से मोहल्ले में लोग शक की निगाह से देखने लगते हैं। वही इस बाबत ट्रांसपोर्ट के नोडल अधिकारी इसे सूचना समझने में गलती बता रहे हैं।
आंख का इलाज कराने गए थे अस्पताल
अशोक कुमार को पिछले कुछ दिनों से आंखों में परेशानी है। इसका इलाज कराने वह एक निजी अस्पताल में गए। जहां से उन्हें कोरोना की जांच के लिए जीएमसीएच- 32 में भेजा गया। अशोक ने बताया कि 2 सितंबर को उनका कोरोना जांच के लिए नमूना लिया गया था। 4 सितंबर को उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई।
अस्पताल प्रशासन ने उनके पंजीकरण कार्ड पर निगेटिव रिपोर्ट की सूचना लिखकर उन्हें दे दी। इसके बाद वह घर चले आए। उनके घर लौटने के कुछ घंटे बाद ही एक एंबुलेंस दरवाजे पर आई और चालक उन्हें अस्पताल चलने को कहने लगा। अशोक और उनके घरवालों ने ड्राइवर को कई बार बताया कि उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई है।
लेकिन ड्राइवर उनकी बात सुनने को तैयार नहीं था। उसका कहना था कि उसके पास मैसेज आया है कि इस घर में एक कोरोना का मरीज है, जिसे तत्काल हॉस्पिटल लेकर पहुंचना है। लगभग 25 मिनट तक बहस करने के बाद भी जब ड्राइवर नहीं माना तो अशोक के घरवालों ने उसे डांट कर भगा दिया। बता दें कोरोना की कहीं भी जांच कराने के बाद उसकी रिपोर्ट जीएमएसएच- 16 में आती है और वही से दी जाती है।
31 एंबुलेंस 4 जोन
कोरोना के मरीजों के लिए जीएमएसएच- 16 के अंतर्गत 31 एंबुलेंस का संचालन 24 घंटे किया जा रहा है। इसमें शहर को 4 जोन में बांटकर क्रमश: सेक्टर 16 सेक्टर, 22 सेक्टर, 45 और मनी माजरा में मरीजों को सुविधा दी जा रही है। एंबुलेंस में कोरोना से संक्रमण से बचाव के मानकों का प्रयोग करते हुए सारी व्यवस्था की गई है। इससे पॉजिटिव मरीज से एंबुलेंस के चालक और अन्य स्टाफ में संक्रमण का खतरा न रहे।
शहर को अलग-अलग जोन में बांटकर काम किया जा रहा है। ऐसे में इस तरह की चूक हो सकती है, क्योंकि सभी एंबुलेंस चालकों को निर्देशित किया गया है कि मैसेज मिलने के बाद वो एक मिनट का भी विलंब न करें। ऐसे में मिली सूचना को कंफर्म करने का भी समय नहीं होता। - डॉ. संजीव, ट्रांसपोर्ट इंचार्ज, कोविड