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सावधान: विशेषज्ञ बोले- कोरोना संक्रमित व्यक्ति के मुंह से निकलने वाली महीन बूंदें फैला रहीं बीमारी

Sun, 12 Jul 2020 03:54 PM IST
ajay kumar आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
आशीष वर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Sun, 12 Jul 2020 03:54 PM IST
सार

  • अब अच्छी क्वालिटी वाले मास्क को ही ठीक से पहनना कारगर
  • लोगों से जितनी दूरी रखेंगे, उतना ही कम रहेगा कोरोना का जोखिम

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Expert aware to people about covid-19 Guidelines in Chandigarh
अमोद गुप्ता, प्रो. राजेश कुमार, एसके जिंदल

विस्तार

कोरोना का संक्रमण अब पूरे देश में तेजी से फैल रहा है। जिन इलाकों में केस थमने लगे थे, अब वहां के लोग दोबारा इसकी चपेट में आ रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अनलॉक में लोग गंभीर होने की बजाय लापरवाह हो गए हैं। बाहर निकलते ही लोग मास्क लगाने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन छोड़ देते हैं, जिसका खामियाजा उन्हें व दूसरे लोगों को भुगतना पड़ रहा है। यदि लोग गंभीर नहीं हुए तो मुश्किलें और बढ़ सकती हैं, क्योंकि अब वायरस की हवा में भी पुष्टि हो गई है। ऐसे में लोगों को और ज्यादा सतर्कता बरतनी होगी। आइए जानते हैं इस बारे में विशेषज्ञों का क्या कहना है। 

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मास्क को गले में लटकाने व ढीले पहनने का फायदा नहीं
हवा में वायरस होने की बात गंभीर है। इसका मतलब है कि संक्रमित व्यक्ति के जोर से बात करने या छींकने से जो महीन बूंदें निकलती हैं, वह बीमारी फैला रही हैं। ऐसे में खतरा और ज्यादा बढ़ गया है। गले में लटकाने या ढीले मास्क पहनने का अब कोई फायदा नहीं। महीन बूंदों को थोड़ा भी स्पेस मिला तो वह शरीर के अंदर चली जाएंगी। इसलिए अच्छी क्वालिटी का मास्क पहनना होगा। साथ ही उन जगहों पर जाने से बचें, जहां पर हवा के आने-जाने का रास्ता न हो। खासकर एसी रेस्टोरेंट, जिम और जहां ज्यादा लोगों इकट्ठा हों, वहां जाने से बचें। - अमोद गुप्ता, पूर्व डीन, पीजीआई

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हवा क्रास न हो रही हो तो एग्जॉस्ट फैन लगाएं

मुंह या सांस के जरिए निकलने वाली बड़ी बूंदें गुरुत्वाकर्षण की वजह से जल्दी से सतह पर आती हैं जबकि महीन बूंदें कुछ देर तक हवा में रहती हैं। इनका का व्यास पांच माइक्रॉन से कम होता है। इन्हें ‘ड्रॉपलेट न्यूक्लिआई’ कहा जाता है। माइक्रॉन का मतलब एक मीटर का दस लाखवां हिस्सा। इसका सीधा मतलब है कि संक्रमित व्यक्ति के सांस छोड़ने, बात करने और खांसने के दौरान निकलने वाली उन बूंदों में भी वायरस मौजूद होते हैं, जो बहुत सूक्ष्म होने के कारण कुछ समय तक हवा में रहती हैं। ऐसे में लोगों को घर, दुकान व दफ्तर की खिड़कियां खोल कर रखनी चाहिए। जहां पर हवा क्रास की जगह न हो तो वहां पर एग्जॉस्ट फैन लगाएं। दुकान, दफ्तर व कैंटीन में बैठने के दौरान जितनी दूरी हो सके, बनानी होगी।  -प्रो. राजेश कुमार, पूर्व विभागाध्यक्ष स्कूल आफ पब्लिक हेल्थ पीजीआई

नंबर तो अभी और बढ़ेंगे, मगर चिंता की बात नहीं
नंबर तो अभी और बढ़ेंगे। जो संक्रमित हैं, वे अपने से ज्यादा लोगों को और संक्रमित करेंगे लेकिन मैं कहूंगा कि घबराने की बात नहीं हैं। कई लोग ठीक भी हो रहे हैं। मैं कुछ लोगों को जानता हूं, जो पीड़ित थे और अब पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं। महामारी जब भी आती है तो इतने तो केस आते ही हैं, लेकिन हमें कोशिश करनी होगी कि मौतें न हों। मरने वालों में उनकी संख्या ज्यादा है जो बीमार हैं और बुजुर्ग हैं। ऐसे में हमें उन लोगों को कोरोना से बचाना है। हवा में वायरस तो रहता है। भले ही डब्ल्यूएचओ ने बाद में पुष्टि की हो। ऐसे में जो जितनी दूरी रखेगा, वह उतना सुरक्षित रहेगा। मास्क जरूर पहनें। - एसके जिंदल, पूर्व एचओडी, पल्मोनेरी डिपार्टमेंट पीजीआई

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