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विश्व साइकिल दिवस: जिंदगी को खु्शहाल बना रही साइकिल, किसी का नजरिया बदला तो किसी की सेहत

Thu, 03 Jun 2021 12:08 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 03 Jun 2021 12:08 PM IST
सार

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर नियमित रूप से 20 से 30 मिनट साइकिल चलाई जाए तो तनाव पर नियंत्रण के साथ ही मांसपेशियों में मजबूती आती है। इससे दिल से लेकर दिमाग तक स्वस्थ रहता है।  
 

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Experience of Chandigarh Cyclists on World Cycle Day 2021 
साइक्लिस्ट सनथ गोयल और राकेश महेंद्रा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

साइकिल फिटनेस के लिए एक अच्छा माध्यम है। कोरोनाकाल आने के बाद इसका महत्व और बढ़ गया है। तमाम शोध बताते हैं कि साइकिल चलाने से शरीर में स्फूर्ति बढ़ने के साथ मानसिक तनाव घटता है और लोगों को तनाव की ओर जाने से रोकता है। चंडीगढ़ में कई ऐसे लोग हैं, जो सालों से साइकिल चला रहे हैं। कई सारे ग्रुप से जुड़े हैं। कई ने तो रिकॉर्ड भी बनाए हैं। विश्व साइकिल दिवस के अवसर पर साइक्लिस्टों से जानते हैं कि साइकिल चलाने से उनकी जिंदगी में क्या बदलाव आए हैं।

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जिंदगी में ज्यादा खुशियां मिलने लगी हैं
सेक्टर 20 पंचकूला के रहने वाले सनथ गोयल के नाम पर गिनीज बुक ऑफ रिकॉर्ड है। भारत सरकार के गृह मंत्रालय के सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स की ओर से आयोजित लांगेस्ट सिंगल लाइन बाइसिकल परेड में उन्होंने हिस्सा लिया था। सनथ कहते हैं कि साइकिल ने उनकी जिंदगी में काफी बदलाव किए हैं। जब से साइकिल चलाना शुरू किया है, तब से ज्यादा एक्टिव हो गए हैं। पहले दिन की शुरुआत देरी से होती थी, लेकिन अब सूरज निकलने से पहले साइकिल पर निकल जाते हैं।
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साइकिल चलाने से शरीर के साथ दिमाग फिट रहता है। पहले के मुकाबले अब ज्यादा खुश रहने लगे हैं। लोगों से मिलना-जुलना भी होता है। अलग-अलग फील्ड के लोगों के मिलने से ज्ञान और नजरिया बदलता है। इसके साथ ही एक यह भी सुकून मिलता है कि पर्यावरण को सुरक्षित बनाने में आप महत्वपूर्ण योगदान दे रहे होते हैं। सनथ ट्राइसिटी ऑन पैडल के संस्थापक सदस्य हैं। विश्व साइकिल दिवस के उपलक्ष्य पर उन्होंने एक संदेश भी दिया है कि साइक्लिंग करें रोज, जिंदगी में रहेगी हमेशा मौज।
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धैर्यवान बनाया, नजरिया भी बदला
चंडीगढ़ में साइक्लिंग को बढ़ावा देने में अक्षित पासी का अहम रोल है। वे साल 2014 से चंडीगढ़ में साइक्लिंग कर रहे हैं। साल 2017 में उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर साइकिलगिरी नाम का एक ग्रुप बनाया है। उन्होंने बताया कि साइक्लिंग ने उन्हें धैर्यवान बना दिया है। पहले उनके अंदर धैर्य नहीं था। हर काम जल्दबाजी व हड़बड़ी में करते थे। साइकिल चलाते वक्त जब वे पेड़, पहाड़ व प्रकृति को देखते हैं तो उन्हें उनसे एक संदेश मिला है कि कोई भी काम जल्दबाजी के बजाय मजबूती से करो। दृढ़ता से करो।

साइक्लिंग ने उनके अंदर एक और भी बदलाव किया है। पहले उनका वजन 125 किलो से ज्यादा था, अब उनका वजन 87 किलो है। वे रोजाना 35-40 किलोमीटर साइकिल चलाते हैं, जबकि वीकेंड में 70-100 किलोमीटर। उनका यह भी कहना है कि साइकिल चलाने से आपका नजरिया भी बदलता है। पैदल चलने वाले व साइकिल चलाने वालों के प्रति सम्मान भी बढ़ता है।

साइक्लिंग से देश विदेश में नाम कमाया

मेरे पिता चंडीगढ़ से जालंधर साइकिल से जाते थे। उन्हें साइकिल चलाते देख मेरे अंदर भी साइकिल चलाने का जुनून सवार हुआ। उन्हीं की बदौलत देश नहीं बल्कि विदेशों की धरती में भी साइकिल चलाता हूं। यह कहना है 57 वर्ष के राकेश महेंद्रा का, जो पीयू के यूनिवर्सिटी बिजनेस स्कूल में लाइब्रेरियन हैं। राकेश ने बताया कि वे रोजाना 50 किलोमीटर तक साइकिल चलाते हैं। देश का कोई ऐसा कोना नहीं, जिस जगह पर साइकिल न चलाई हो। साइकिल से ही फिटनेस बनी हुई है।

जगह-जगह साइकिल चलाने से देश-विदेश में कई मेरे दोस्त भी बन गए, जिनके अनुभव मेरी जिंदगी में काफी काम आ रहे हैं। राकेश बताते हैं कि साइकिल को प्रमोट करने के लिए कई राज्यों के पर्यावरण विभाग बुलाते हैं। राकेश इंटरनेशनल बाइक्स सोसाइटी के साथ जुड़े हैं, जो यूनाइटेड नेशन के साथ काम करती है। इस सोसाइटी ने उन्हें साल 2019 में चंडीगढ़ का बाइसाइक्लिंग मेयर चुना। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि उन्हें स्विजरलैंड स्थित वर्ल्ड साइक्लिंग सेंटर ने खास मेहमान के तौर पर बुलाया था। इंटरनेशनल साइक्लिंग कंपीटीशन के दौरान वे जज के तौर पर भी काम करते हैं।



कोरोना को हराकर अपनाई साइकिल, बढ़ गई काम में स्फूर्ति
नगर निगम के चीफ इंजीनियर शैलेंद्र सिंह ने कोरोना संक्रमित होने के बाद घर में योग शुरू किया। जब ठीक हुए तो लोगों की सलाह पर साइकिल चलाना शुरू किया। एक घंटे में 30 किमी का सफर साइकिल से तय करने वाले चीफ इंजीनियर कहते हैं कि अब पहले की तरह आलस नहीं रहता है और काम में स्फूर्ति बढ़ गई है। चीफ इंजीनियर ने 4 फरवरी को टीके की पहली डोज लगवाई थी। 28 दिन बाद दूसरी डोज भी लगवा ली। उसके 12 दिन बाद वह संक्रमित हो गए।

17 दिन तक योग अभ्यास के बाद शरीर में कमजोरी महसूस हुई। लोगों ने स्टेमिना बढ़ाने के लिए साइकिल चलाने का सुझाव दिया। शुरुआत में वे आधे घंटे में 5 से 6 किमी का सफर तय कर पाते थे। धीरे-धीरे उन्होंने अपनी क्षमता बढ़ाई और अब इतने समय में तीन गुना ज्यादा सफर तय करते हैं। वे कहते हैं कि साइक्लिंग अब उनके जीवन का अहम हिस्सा बन चुकी है।

डॉक्टरों की सलाह, 30 मिनट की साइक्लिंग से मजबूत होती है शारीरिक और मानसिक क्षमता

साइकिल की सवारी शारीरिक क्षमता के साथ बौद्धिक क्षमता बढ़ाने में भी मददगार होती है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर नियमित रूप से 20 से 30 मिनट साइकिल चलाई जाए तो तनाव पर नियंत्रण के साथ ही मांसपेशियों में मजबूती आती है। इससे दिल से लेकर दिमाग तक स्वस्थ रहता है। इतना ही नहीं सभी बीमारियों की जड़ माने जाने वाले बढ़ते वजन को भी नियंत्रित करने में साइकिल की मुख्य भूमिका है, इसलिए डॉक्टर दवाओं के साथ साइकिल चलाने की भी सलाह देते हैं। 

जीएमएसएच-16 के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. वीके नागपाल का कहना है कि नियमित रूप से साइकिल चलाने से रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है। शोध से यह बात साबित हो चुकी है कि नियमित रूप से साइकिल चलाने वाले लोग अन्य लोगों की तुलना में कम बीमार पड़ते हैं। साथ ही हड्डियों और मांसपेशियों में मजबूती आती है। समय से पहले घुटने में दर्द जैसी बढ़ती समस्या के समाधान के लिए भी साइकिल चलाना बेहद कारगर सिद्ध हो सकता है। वहीं साइकिल चलाते समय दिल की धड़कनें बढ़ जाती हैं, जिससे शरीर में रक्त संचार ठीक हो जाता है। इससे हार्ट अटैक और हृदय संबंधी अन्य बीमारियों का खतरा भी काफी हद तक कम हो जाता है। डॉ. नागपाल ने बताया कि साइकिल चलाने से तनाव और अवसाद की स्थिति भी उत्पन्न नहीं होती, इसलिए इसे हमें अपने शौक के रूप में शामिल करना चाहिए। 

आंतरिक के साथ ही मिलती है बाहरी खूबसूरती भी
जीएमएसएच-16 की फिजियोथैरेपिस्ट नम्रता तांगड़ी का कहना है कि साइकिल चलाने से आंतरिक के साथ बाहरी खूबसूरती भी प्राप्त होती है। नम्रता का कहना है कि साइकिल चलाने से ब्लड सेल्स और त्वचा में ऑक्सीजन की आपूर्ति पर्याप्त मात्रा में होती है। इससे त्वचा में कसाव के साथ चमक आती है। इतना ही नहीं इससे शरीर को ऊर्जा भी मिलती है।

नम्रता का कहना है कि साइकिल चलाने से खासतौर पर पैरों की सबसे अच्छी एक्सरसाइज होती है। वहीं मौजूदा समय में बढ़ते वजन से परेशान व्यक्ति के लिए साइकिल किसी वरदान से कम नहीं है। नियमित रूप से साइकिल चलाने से बढ़ते वजन की समस्या से छुटकारा प्राप्त किया जा सकता है। साइकिल चलाने से शरीर में मौजूद अतिरिक्त चर्बी कम होती है जिससे अन्य बीमारियों से रक्षा करने में मदद मिलती है।

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