नोटबंदी के बाद बजट से कई उम्मीदें, क्या पूरा होंगे जनता के ये सपने
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बुधवार को पेश होने जा रहे केंद्रीय आम बजट से एक ओर जहां गृहणियां और आम आदमी रोजाना की जरूरत वाले सामान सस्ता होने की उम्मीद लगाए बैठी हैं, वहीं एक्सपर्ट के अनुसार सरकार को इस साल जीएसटी लागू करना है तो सर्विस टैक्स बढ़ा सकती है।
वहीं सरकार का फोकस इस बार के बजट में डिजिटलाइजेशन पर रहेगा। सरकार कैशलेस पेमेंट बढ़ाने के लिए लोगों को इसमें राहत दे सकती है। नोटबंदी के बाद आम जनता को केंद्रीय सरकार से आम बजट को लेकर कई उम्मीदें हैं।
नोटबंदी के बाद से आम आदमी घबराया हुआ है कि सरकार इस बार जाने क्या महंगा कर दे। नौकरी पेशा लोग खासकर निजी सेक्टर के कर्मचारी जहां सरकार से टैक्स न बढ़ाने की अपेक्षा कर रहे हैं, वहीं सरकारी और निजी कर्मचारी टैक्स में छूट की सीमा 2.5 लाख से बढ़ाने के कयास लगाए बैठे हैं। वहीं इंडस्ट्री को भी नोटबंदी के बाद से धीमे पड़े व्यापार को रफ्तार देने के लिए सरकार से राहत की उम्मीद है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
इस बार के बजट में सरकार का फोकस डिजिटल इंडिया पर होगा। सरकार का मकसद कैशलेस पेमेंट को बढ़ावा देना होगा। इसके अलावा सरकार गरीब आदमी के लिए उसके अपने घर के सपने को पूरा करने के लिए सस्ती हाउसिंग स्कीम भी ला सकती है, नहीं तो हाउस लोन के रेट कम कर सकती है। - एके सूद, चाटर्ड अकांउटेंट
इनकम टैक्स स्लैब बढ़ा सकती है। सस्ती हाउसिंग स्कीम के लिए सरकार नई योजना ला सकती है। उम्मीद है 50 लाख रुपये तक का हाउस लोन सस्ता कर सकती है। इस साल जीएसटी लागू होना है तो सर्विस टैक्स में 2 फीसदी की बढ़ोतरी कर सकती है। वहीं कैश डिपॉजिट और विड्राल पर बैंकिंग ट्रांजेक्शन टैक्स (चार्ज) लगा सकती है ताकि लोग कैशलेस पेमेंट और डिजिटलाइजेशन पर जोर दें। वहीं प्लास्टिक मनी का इस्तेमाल अधिक हो इसके लिए चार्ज या तो समाप्त कर सकती है या फिर इसे कम कर सकती है। - रोहित बैक्टर, चाटर्ड अकांउटेंट
क्या कहतीं हैं गृहणियां
नोटबंदी के बाद से आम आदमी की रसोई पर काफी असर पड़ा है। इस साल के बजट में सरकार से उम्मीद है कि वह आम आदमी से जुड़ी रोजमर्रा के जरूरत की वस्तुओं को सस्ता करे। गरीब आदमी पर टैक्स का बोझ न डाले। - हेमलता, निवासी सेक्टर-27
रोजाना की जरूरत के सामान के अलावा बच्चों की शिक्षा पर सरकार को ध्यान देना चाहिए। हायर एजुकेशन बहुत महंगी होती जा रही है। सरकार को शिक्षण संस्थान पर कंट्रोल के लिए कुछ नीति निर्धारित करनी चाहिए। - शशि तोमर, निवासी सेक्टर-41
इंडस्ट्री को भी उम्मीदें
इंडस्ट्री को भी उम्मीदें
नोटबंदी के बाद से उद्योग जगत पर काफी नकारात्मक असर पड़ा है। सरकार से बजट में इसमें राहत मिलने की उम्मीद है। पहले ही जीडीपी नीचे जा रही है, ऐसे में इंडस्ट्री को कुछ बेनिफिट मिलेगा तभी इसकी भरपाई हो सकेगी। नियमों में भी रिलैक्शेसन मिलेगा तो फायदा हो सकता है। लोन सस्ते होंगे तो भी इसका अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिल सकता है। - चंदर वर्मा, इंडस्ट्रियलिस्ट
आम बजट में स्टार्टअप को लाभ या यू कहें कि राहत मिलने की उम्मीद है। इंडस्ट्री धीमी गति से ग्रो कर रही है, यह तेजी से बढ़ सके तो सरकार का भी रिवेन्यू बढ़ेगा। एसएमई बड़ी इंडस्ट्री से बराबरी कर सके इसके लिए सरकार से उन्हें राहत की उम्मीद की जा सकती है। - रूपिंदर सिंह, इंडस्ट्रियलिस्ट
वर्तमान इनकम टैक्स स्लैब
- 2.5 लाख तक कोई टैक्स नहीं
- 2.5 लाख से 5 लाख तक 10 प्रतिशत
- 5 लाख से 10 लाख तक 20 प्रतिशत
- 10 लाख से ऊपर 30 प्रतिशत
(नोट- अगर आपकी इनकम 2.70 लाख रुपये सालाना है तो 2000 रुपये बनने वाला टैक्स सरकार की ओर से माफ है।)
सीनियर सिटीजन के लिए
- 3 लाख तक कोई टैक्स नहीं
- 3 लाख से 5 लाख तक 10 प्रतिशत
- 5 लाख से 10 लाख तक 20 प्रतिशत
- 10 लाख से ऊपर 30 प्रतिशत
सुपर सीनियर सिटीजन के लिए (80 वर्ष और उससे अधिक)
- 5 लाख तक कोई टैक्स नहीं
- 5 लाख से 10 लाख तक 20 प्रतिशत
- 10 लाख से ऊपर 30 प्रतिशत