इंटरव्यूः विधानसभा चुनाव से पहले मनोहर लाल से बेबाक बात, जानें राष्ट्रवाद, अनुच्छेद 370 पर क्या बोले
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हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल एक बार फिर सत्ता में आने की पूरी तैयारी के साथ हरियाणा में जन आशीर्वाद यात्रा को लेकर निकले हैं। लोकसभा चुनाव में दस सीटों को जीतने का दम रखने वाले मुख्यमंत्री इस बार 75 प्लस का फार्मूला लेकर निकले हैं। उन्हें भरोसा है कि सीटें 75 से ज्यादा आ सकती हैं, लेकिन कम नहीं।
लोकसभा के बाद हरियाणा में विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा का यह आकलन कितना सटीक बैठेगा। यह हरियाणा में तय होना अभी बाकी है, लेकिन केंद्रीय संगठन से लेकर हरियाणा इकाई तक ने एक बार फिर से मनोहर को दोबारा मुख्यमंत्री बनाने के लिए दिन रात मेहनत तेज कर दी है। पन्ना प्रमुख के माध्यम से भाजपा विपक्ष के मतों में सेंध लगाने की तैयारी कर रही है। अमर उजाला के संजय पांडे और प्रवीण पांडे से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री ने हर सवाल के खुलकर जवाब दिए...
प्रश्न: जनसमर्थन जुटाने के लिए यात्रा की आवश्यकता क्यों महसूस हुई?
उत्तर: देखिए ऐसा नहीं है कि हमें सिर्फ यात्रा के माध्यम से ही जनसमर्थन मिलेगा। प्रदेश की जनता को पता है कि सही क्या है, गलत क्या है। यात्रा तो जनता से सीधे जुड़ने का एक तरीका है। हमें इस यात्रा के माध्यम से भरपूर जनसमर्थन मिल रहा है। सरकार के काम काज को लेकर प्रदेश की जनता सरकार का धन्यवाद भी व्यक्त कर रही है और अभिवादन भी।
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प्रश्न:यात्रा के समापन के लिए रोहतक को ही क्यों चुना?
उत्तर: रोहतक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी यात्रा के समापन अवसर पर प्रदेश की जनता को संबोधित करेंगे। आज यात्रा का दूसरे चरण का पहला दिन है। सभी जगह से अभूतपूर्व समर्थन प्राप्त हो रहा है। युवा प्रौढ़ और बुजुर्ग सभी में दोगुना उत्साह है। यात्रा पानीपत होते हुए अंत में रोहतक पहुंचेगी। इस यात्रा को लेकर रोहतक के लोगों में भी बहुत उत्साह है।
प्रश्न: कांग्रेस और इनेलो के प्रभाव वाली सीटों को लेकर कुछ खास रणनीति रहेगी?
उत्तर: हमारा कार्यकर्ता हर जगह है। हम अलग से कोई नीति नहीं बनाते हैं। जनता के साथ सरकार का हर जगह जुड़ाव। लोग स्वयं परिवर्तन की हवा को भांप रहे हैं। उन्हें महसूस हो रहा है कि अभी नहीं तो कभी नहीं। इसलिए वे अखंड भारत और हरियाणा एक हरियाणवी एक के सपने को साकार कर रहे हैं। ऐसे में पार्टी का प्रभाव सभी क्षेत्रों में बराबर है। ऐसा नहीं है कि कहीं कम और कहीं ज्यादा।
प्रश्न:टिकट के दावेदारों को लेकर कोई सर्वेक्षण करवाया है?
उत्तर: सामान्यत: हमारे यहां यह काम केंद्र के साथी करते हैं, कुछ मीडिया एजेंसियां भी यह काम करवाती हैं। उससे भी हमें सहयोग मिलता है। इसके अलावा कई जगह से फीडबैक आता है। सभी पहलुओं पर विचार करने के बाद ही निर्णय लिया जाता है।
प्रश्न: इनेलो के विधायक टूट कर भाजपा में शामिल हो रहे हैं। विपक्ष का कहना है कि भाजपा विपक्ष को कमजोर कर रही है?
उत्तर: जब इंडियन नेशनल लोकदल के परिवार में विघटन की बात चल रही थी तो मैने दोनों धड़ों को यह कहा था कि यह अच्छी बात नहीं है। इकट्ठे होकर रहना चाहिए। एक दूसरे से दूर नहीं जाना चाहिए। लेकिन उनके घर की अंदरूनी बात है। हमारा ज्यादा रोल नहीं है। हमने सलाह दी थी, उन्होंने नहीं मानी। ठीक है, लेकिन किसी के पारिवारिक विघटन का लाभ उठाना हमारे संस्कारों में शामिल नहीं है। हुड्डा भी अपने घर में क्या कर रहे हैं। इससे भी हमें कोई मतलब नहीं है। विपक्ष अपने कर्मों से बिखर रहा है, उसमें हमारा कोई रोल नहीं है।
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प्रश्न: लोकसभा चुनाव में मोदी जी का चेहरा था राष्ट्रवाद का मुद्दा था क्या , अब अनुच्छेद 370 है?
उत्तर: राष्ट्रवाद तो हमेशा मुद्दा होना चाहिए। पार्टी की जीत में बहुत से कारण होते हैं। जहां तक अनुच्छेद 370 का सवाल है। यह प्रदेश का विषय नहीं है, लेकिन केंद्र सरकार ने ऐसा शानदार काम किया है कि जनता इसका स्वागत कर रही है। स्वाभाविक है कि पार्टी को भी लाभ मिलेगा।
प्रश्न: कुछ स्थानों पर जनता विधायकों का मूल्यांकन कर जवाब मांग रही है?
उत्तर: विधायकों के मूल्यांकन का ऐसा कोई प्रश्न नहीं है। जनता इस समय सरकार के कार्यों से प्रसन्न है। जनहित के जो निर्णय होते हैं, वे सरकार के होते हैं। उसमें किसी व्यक्ति विशेष या कैबिनेट का बहुत फर्क नहीं पड़ता है। हमने प्रत्येक विधानसभा में दिल खोल कर विकास के लिए पैसे दिए हैं। करीब एक हजार करोड़ से ऊपर के काम विधानसभा में मंजूर किए गए हैं। इसलिए मूल्यांकन का सवाल नहीं उठता है।
प्रश्न: पढ़ी लिखी पंचायतों का क्या फीडबैक आ रहा है?
उत्तर: जब हमने हरियाणा में पढ़ी लिखी पंचायतों की शुरूआत की तो 2200 स्थानों से लोगों ने परचा ही नहीं भरा। बाई इलेक्शन हुए तो ऐसे क्षेत्रों की संख्या 400 से 500 रह गई। लेकिन आने वाले कुछ सालों में सब पढ़ी लिखी पंचायते होंगी। 40 प्रतिशत से ज्यादा लोग निर्विरोध चुने गए हैं। आगे जब ज्यादा पढ़े लिखे लोग आएंगे तो प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
प्रश्न: आपने इतने दिन जनता का मिजाज भांपा क्या लग रहा है?
उत्तर: हमने जनता के भीतर यह भाव पैदा किया है कि अच्छे नागरिक बनोगे तो सभी का लाभ होगा। मतदाता इस समय बहुत ज्यादा उत्सुक हैं। मतदाताओं की रीजनिंग पावर बहुत अच्छी है। वे भला बुरा सब समझते हैं। हमें कुछ कहने की जरूरत नहीं पड़ रही है। जतना भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर है। हम कहते हैं कि लोग हमारे सिस्टम को देखें और तब वोट दें।
प्रश्न: हरियाणा को लेकर आपका क्या सपना है?
उत्तर: देश और दुनिया में लोग यह कहें कि हरियाणा बढ़िया है। इस दिशा में लगातार योजनाएं चल रही हैं। हमने काम करना बंद नहीं किया है। कुछ योजनाएं ऐसी हैं जो अब हमने शुरू की हैं। जिनका लाभ लोगों को अगले साल मिलेगा। जैसे फसल बीमा योजना हमने शुरू की है। आने वाले समय में जनता को यह महसूस होगा कि इस योजना का कितना लाभ मिल रहा है। हम चाहते हैं, सुलभता, सुगमता और सरलता लोगों के जीवन में आए।
प्रश्न: आम जनता तक सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं पहुंच पाता है?
उत्तर: हमने परिवार की पहचान शुरू करवाई है। इसमें एक एक व्यक्ति ट्रैक होगा। किस व्यक्ति की क्या आवश्यकता है, क्या योग्यता है और उसकी उपयोगिता क्या है। इसके लिए हम मानव संपदा मंत्रालय बना रहे हैं। यह विभाग यह जानेगा कि लोगों की समस्याएं, आवश्यकता, योग्यता, कमियां, मांग क्या हैं और उनका विकास कैसे करना है।
प्रश्न: पांच साल में कौन सा काम आप अपनी बड़ी उपलब्धि के तौर पर देखते हैं?
उत्तर:अगर मैं विषय गिनवाऊंगा तो बाकी के साथ अन्याय हो जाएगा, लेकिन मोटे तौर पर बताऊं तो लोगों को हमारी सरकार न्यायसंगत लगती है। पहले लोगों को लगता था कि हमारे साथ अन्याय हो रहा है। अब वातावरण ऐसा बन गया है कि लोगों को लगता है कि जो होगा सब ठीक होगा।
प्रश्न: फिर भी आप गेम चेंजर की संज्ञा किसे देंगे?
उत्तर: सिस्टम में बदलाव ही गेम चेंजर की भूमिका निभाता है। भ्रष्टाचार के खात्मे और पारदर्शिता में हमारी सरकार अग्रणी है। सिस्टम में ऐसा बदलाव आया है कि अब लोगों को पैसा नहीं देना पड़ता। यह बहुत बड़ी बात है कि लोगों की जीवन शैली में सुगमता आई है। अब लोग पिछली सरकारों की अपेक्षा खुश हैं।
प्रश्न: आप कैसे आश्वस्त हैं कि भ्रष्टाचार कम हो चुका है?
उत्तर: पहले सीएलयू की फाइल टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग से मुख्यमंत्री के कार्यालय तक जाती थी। अब हमने डायरेक्टर को सीएलयू की पावर दे दी है। जिससे पारदर्शिता आ गई है। पहले डायरेक्टर सीएम के फोन का इंतजार करता था, अब उसका काम है वह अपने स्तर पर निपटाता है।
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प्रश्न: पारदर्शिता का पैमाना आप कैसे तय करते हैं?
उत्तर: पहले एचसीएस पिक एंड चूज की पॉलिसी से बनाए जाते थे। मुख्यमंत्री अपने चहेतों को एचसीएस बनाते थे। जो अपना क्लेरिकल काम ठीक से नहीं कर पाते थे वे एचसीएस बन जाते थे। अब ऐसा नहीं है। 14 पदों के लिए 5800 लोगों ने फार्म भरे हैं, जिनका चयन योग्यता के आधार पर किया जाएगा। जब योग्यता चयन का आधार बनेगी तो योग्य लोग ही आएंगे।
प्रश्न: आपने पंचायत और नगर निकाय में शैक्षणिक योग्यता तय की है, क्या विधानसभा चुनाव में भी होनी चाहिए?
उत्तर: मैंने इस बारे में प्रधानमंत्री जी को पत्र लिखा है, क्योंकि यह काम संसद के माध्यम से ही संभव है। इसके लिए सभी दलों का एकमत होना जरूरी है। हमने जो पत्र लिखा है उसमें न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता की बात कही है, लेकिन प्रधानमंत्री जी का कहना है कि अभी देश में कई क्षेत्र ऐसे हैं, जहां शिक्षा का स्तर बहुत बेहतर नहीं है। ऐसे में पूरे देश में यह व्यवस्था एक दम से लागू नहीं हो सकती। हालांकि हरियाणा ऐसे राज्यों में नहीं आता है।