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Chandigarh News: 20 साल की सेवा के बाद भी बिना गलती लाभों से वंचित शिक्षक ने लगाई हाईकोर्ट से गुहार
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-हरियाणा सरकार को 4 सप्ताह के भीतर याची की मांग पर निर्णय लेने का हाईकोर्ट ने दिया आदेश
-अनिवार्य 2 वर्ष 6 माह की ग्रामीण क्षेत्र में सेवा नहीं दे पाने के चलते सेवा लाभ से वंचित होने की दी थी दलील
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। शिक्षक के तौर पर 20 साल से सेवा देने के बावजूद बिना गलती के सेवा के विभिन्न लाभ से वंचित शिक्षक ने इंसाफ के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से गुहार लगाई है। याचिका का निपटारा करते हुए हाईकोर्ट ने याची के मांगपत्र पर हरियाणा सरकार को चार सप्ताह में निर्णय लेने का आदेश दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए लोकेश शर्मा ने एडवोकेट खालिद तावरू के माध्यम से बताया कि उसकी नियुक्ति अंबाला के नारायणगढ़ के एक ग्रामीण कॉलेज में 2004 में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर हुई थी। इसके बाद 2006 में इस कॉलेज को ग्रामीण क्षेत्र से हटा कर शहरी क्षेत्र के कॉलेज में बदल दिया था। याचिकाकर्ता का तबादला भी गुरुग्राम कर दिया गया। याची ने बताया कि हरियाणा सरकार की शर्त है कि शिक्षकों को सेवा से जुड़े विभिन्न लाभ के लिए ग्रामीण क्षेत्र के कॉलेजों में ढ़ाई साल सेवा देना अनिवार्य है। याची ने कहा कि वह अपनी ग्रामीण क्षेत्र की सेवा पूरी कर रहा था और कॉलेज का स्टेटस बदलने में उसकी कोई गलती नहीं है। वर्तमान में गुरुग्राम में रहते हुए भी उसने सरकार से निवेदन किया कि उसकी बची हुई ग्रामीण सेवा पूरी करने के लिए उसका तबादला किया जाए लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। याची ने बताया कि वह 2027 में रिटायर होने जा रहा है यदि उसकी सेवा पूरी नहीं हुई तो वह रिटायरमेंट लाभ से भी वंचित रह जाएगा। याची के समान प्रदेश में ऐसे कई शिक्षक हैं जो सरकार के रवैये के चलते विभिन्न सेवा लाभ से वंचित हैं। हाईकोर्ट में सरकार ने विश्वास दिलाया कि याची के मांगपत्र पर जल्द निर्णय ले लिया जाएगा। इस पर हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए सरकार को चार सप्ताह में निर्णय लेने का आदेश दिया है।
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-अनिवार्य 2 वर्ष 6 माह की ग्रामीण क्षेत्र में सेवा नहीं दे पाने के चलते सेवा लाभ से वंचित होने की दी थी दलील
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। शिक्षक के तौर पर 20 साल से सेवा देने के बावजूद बिना गलती के सेवा के विभिन्न लाभ से वंचित शिक्षक ने इंसाफ के लिए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट से गुहार लगाई है। याचिका का निपटारा करते हुए हाईकोर्ट ने याची के मांगपत्र पर हरियाणा सरकार को चार सप्ताह में निर्णय लेने का आदेश दिया है।
याचिका दाखिल करते हुए लोकेश शर्मा ने एडवोकेट खालिद तावरू के माध्यम से बताया कि उसकी नियुक्ति अंबाला के नारायणगढ़ के एक ग्रामीण कॉलेज में 2004 में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर हुई थी। इसके बाद 2006 में इस कॉलेज को ग्रामीण क्षेत्र से हटा कर शहरी क्षेत्र के कॉलेज में बदल दिया था। याचिकाकर्ता का तबादला भी गुरुग्राम कर दिया गया। याची ने बताया कि हरियाणा सरकार की शर्त है कि शिक्षकों को सेवा से जुड़े विभिन्न लाभ के लिए ग्रामीण क्षेत्र के कॉलेजों में ढ़ाई साल सेवा देना अनिवार्य है। याची ने कहा कि वह अपनी ग्रामीण क्षेत्र की सेवा पूरी कर रहा था और कॉलेज का स्टेटस बदलने में उसकी कोई गलती नहीं है। वर्तमान में गुरुग्राम में रहते हुए भी उसने सरकार से निवेदन किया कि उसकी बची हुई ग्रामीण सेवा पूरी करने के लिए उसका तबादला किया जाए लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। याची ने बताया कि वह 2027 में रिटायर होने जा रहा है यदि उसकी सेवा पूरी नहीं हुई तो वह रिटायरमेंट लाभ से भी वंचित रह जाएगा। याची के समान प्रदेश में ऐसे कई शिक्षक हैं जो सरकार के रवैये के चलते विभिन्न सेवा लाभ से वंचित हैं। हाईकोर्ट में सरकार ने विश्वास दिलाया कि याची के मांगपत्र पर जल्द निर्णय ले लिया जाएगा। इस पर हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए सरकार को चार सप्ताह में निर्णय लेने का आदेश दिया है।

पंडित धर्मपाल शास्त्री

पंडित धर्मपाल शास्त्री

पंडित धर्मपाल शास्त्री

पंडित धर्मपाल शास्त्री
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