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इस्टेट ऑफिस के दो कर्मचारी बर्खास्त
अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 26 Nov 2013 01:16 PM IST
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पुनर्वास योजना के तहत विकास नगर (मौली जागरा) के लोगों को मकानों अलॉटमेंट घोटाले के आरोपी इस्टेट ऑफिस के दो कर्मचारियों की सोमवार को बर्खास्त कर दिया गया।
इनमें इस्टेट आफिस के का क्लर्क रमाकांत और इनफोर्समेंट विंग का सब इंस्पेक्टर राम किशन शामिल है। दोनों को इस मामले में अदालत पहले ही सजा सुना चुकी है।
पुनर्वास योजना के तहत सर्वे और मकानों के अलाटमेंट में धांधली का यह मामला वर्ष 2004 से चल रहा था। एस्टेट अफसर और डीसी मोहम्मद शाईन ने सोमवार को दोनों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने के आदेश जारी किए।
इस मामले में वर्ष 2009 में होम सेक्रेटरी को शिकायत कर विजिलेंस जांच की मांग की गई थी। जांच में दोनों आरोपियों को धांधली में लिप्त पाया गया था। एस्टेट अफसर की जांच में भी सभी आरोप सही पाये गए।
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यह था मामला
विकास नगर (मौली जागरा) में झुग्गी नंबर 394 लैबर कालोनी के सर्वे में गुरु प्रसाद के नाम थी। बाद में इस बेच दिया गया।
इसके बावजूद एसआई राम किशन ने सर्वे लिस्ट में इस झुग्गी को गुरु प्रसाद के नाम पर ही दर्ज किया। इसी तरह सर्वे में साइट नं 2708 किसी के नाम नहीं थी मगर क्लर्क रमाकांत ने इसे घनश्याम पुत्र राम सुमेर के फर्जी नाम पर दर्ज कर दिया। जांच में इस तरह के कई और हेरफेर भी मिले थे।
दोनों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। 9 जुलाई 20013 को सेशल जज एसके अग्रवाल की अदालत में दोनों कर्मचारियों के खिलाफ धोखाड़ी का मामला सही पाया औरा तीन से चार साल कैद और जुर्माना भी किया गया।
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इनमें इस्टेट आफिस के का क्लर्क रमाकांत और इनफोर्समेंट विंग का सब इंस्पेक्टर राम किशन शामिल है। दोनों को इस मामले में अदालत पहले ही सजा सुना चुकी है।
पुनर्वास योजना के तहत सर्वे और मकानों के अलाटमेंट में धांधली का यह मामला वर्ष 2004 से चल रहा था। एस्टेट अफसर और डीसी मोहम्मद शाईन ने सोमवार को दोनों को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त करने के आदेश जारी किए।
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इस मामले में वर्ष 2009 में होम सेक्रेटरी को शिकायत कर विजिलेंस जांच की मांग की गई थी। जांच में दोनों आरोपियों को धांधली में लिप्त पाया गया था। एस्टेट अफसर की जांच में भी सभी आरोप सही पाये गए।
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यह था मामला
विकास नगर (मौली जागरा) में झुग्गी नंबर 394 लैबर कालोनी के सर्वे में गुरु प्रसाद के नाम थी। बाद में इस बेच दिया गया।
इसके बावजूद एसआई राम किशन ने सर्वे लिस्ट में इस झुग्गी को गुरु प्रसाद के नाम पर ही दर्ज किया। इसी तरह सर्वे में साइट नं 2708 किसी के नाम नहीं थी मगर क्लर्क रमाकांत ने इसे घनश्याम पुत्र राम सुमेर के फर्जी नाम पर दर्ज कर दिया। जांच में इस तरह के कई और हेरफेर भी मिले थे।
दोनों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। 9 जुलाई 20013 को सेशल जज एसके अग्रवाल की अदालत में दोनों कर्मचारियों के खिलाफ धोखाड़ी का मामला सही पाया औरा तीन से चार साल कैद और जुर्माना भी किया गया।