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पुश्तैनी काम को बाय-बाय, जानवरों से हैलो-हाय

Sun, 11 May 2014 02:46 PM IST
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़
राजेश ढल्ल/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sun, 11 May 2014 02:46 PM IST
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Enterprenure and Animal Lover Interview

विनोद कुमार (सोनू) ने अपना पुश्तैनी काम छोड़कर जानवरों और पक्षियों को बेचने का कारोबार अपनाया। सोनू के पिता का सेक्टर-7 में ढाबा है, लेकिन सोनू ने यह कारोबार न अपना कर जानवरों और डॉग के कारोबार को अपनाया। इस समय सोनू का नाम बेस्ट डाग ट्रेनर के रूप में लिया जाता है।

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सोनू के इस कारोबार का टर्न ओवर 10 लाख रुपये है। वे शहर के कई पुलिस अधिकारियों और वीआईपी लोगों के कुत्तों को भी ट्रेनिंग दे चुके हैं। सोनू देश भर की डाग प्रतियोगिताओं में हर साल भाग लेते हैं और कई अवार्ड भी जीत चुके है।
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सोनू की इस समय सेक्टर-20 में दुकान है जहां पर वह विदेशी लर्व बर्ड के अलावा मुर्गे, खरगोश, चूहे, बतख के अलावा कई दूसरे जानवार भी बेचते हैं। सोनू ने ही शहर में सबसे पहली इस तरह की शाप खोली थी जहां पर अभी कुत्तों का ब्यूटी पार्लर भी बना है।
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इसके साथ ही डाग की डाइट से लेकर दूसरा सारा सामान यहां पर बिकता है। सोनू के पास इस समय कई विदेशी पक्षी है, जिनकी कीमत हजारों रुपये में है। हाल ही में सोनू अफ्रीका से एक अनोखी गिलहरी लेकर आए हैं जिसकी कीमत 15 हजार रुपये है।

ट्रेनर के तौर पर सोनू का नाम इतना मशहूर हो गया है कि दूसरे राज्यों से भी लोग अपने डाग सोनू के पास प्रशिक्षण के लिए लाते हैं। अभी तक सोनू करीब 10 हजार डाग को ट्रेनर कर चुका है।

पुलिस में नौकरी का आफर ठुकराया
साल 2002 में आईजी बीएस बस्सी एक डाग शो के कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लेने के लिए आए जिसमें सोनू की प्रतिभा देखकर उन्होंने पुलिस की नौकरी का आफर किया। सोनू का कहना है कि आईजी चाहते थे कि वह पुलिस विभाग के कुत्तों को ट्रेन करें, लेकिन वह अपना कारोबार करना चाहते थे।

ऑनलाइन भी शुरू करने की तैयारी
सोनू इस समय सेक्टर-20 की मार्केट में शीना पेट शाप के नाम से कारोबार कर रहे हैं। सोनू जल्द ही ऑनलाइन वेबसाइट शुरू करने जा रहे हैं, जिनमें ग्राहक घर बैठकर भी अनोखे पक्षी और जानवर खरीद पाएंगे। सोनू का कहना है कि वह अधिकतर विदेशी पक्षियों का ही कारोबार करते हैं।

बुड़ैल जेल में सुरक्षा में लगे कुत्ते सोनू ने दिए
बुड़ैल जेल में हवारा के फरार होने के बाद की घटना के बाद सोनू ने ही तीन लेबरा डाग सुरक्षा के लिए दिए थे। सोनू का कहना है कि उन्होंने यह डाग तीन माह की ट्रेनिंग करवाने के बाद दिए थे। यह डाग नशीला पदार्थ साथ लेकर जाने वालों पर कड़ी नजर रखते हैं।

क्यों अपनाया ये कारोबार
सोनू का कहना है कि 14 साल की आयु में ही उन्हें पक्षियों और डाग से लगाव हो गया था और दूसरा उनके घर वाले भी उसे यह कहते थे कि पढ़ ले नहीं ढाबे में जाना होगा, लेकिन वह इस पुश्तैनी काम को छोड़कर अलग काम करना चाहते थे। सोनू का कहना है कि शुरूआत में उनके दोस्तों और रिश्तेदारों को भी यह अलग काम लगा था लेकिन धीरे धीरे अब सभी रिश्तेदार और परिवार के सदस्य उनका इस कारोबार में हाथ भी बटाते हैं।

शादी में 65 डाग बने थे बाराती
सोनू की शादी को 5 साल से ज्यादा समय हो गया है। सोनू की शादी में बाराती के तौर पर 65 डाग गए थे इसके साथ साथ समय समय सोशल मैसेज देने के लिए भी अपने पक्षियों का प्रयोग करते हैं। अभी हाल ही मतदाताओं को जागरूक करने के लिए सोनू ने डाग के साथ सेक्टर-25 के चौक पर कार्यक्रम भी किया था।

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