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निजीकरण के खिलाफ हड़ताल, कई सेक्टरों में की बिजली रही गुल

Thu, 04 Feb 2021 01:56 AM IST
Panchkula Bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Thu, 04 Feb 2021 01:56 AM IST
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Employees on strike against privatization, power shutdown in many sectors of Chandigarh
सेक्टर-17 में प्रदर्शन करते बिजली विभाग के कर्मचारी। अमर उजाला - फोटो : CHANDIGARH
चंडीगढ़। शहर में बिजली विभाग के निजीकरण को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी है। बुधवार को प्रशासन के कई विभागों ने यूटी पावरमैन यूनियन के आह्वान पर हड़ताल की और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। कर्मचारियों के हड़ताल की वजह से शहर के कुछ हिस्सों में बिजली भी गुल रही। वहीं, प्रशासन ने भी हड़ताल पर रहने वाले कर्मचारियों की एक दिन की तनख्वाह काटने का फैसला लिया है।
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विभिन्न विभागों के कर्मचारी सुबह अपने कार्यालयों में इकट्ठे हुए और वहां से समूहों में मार्च कर सेक्टर-17 में हड़ताली कर्मियों की रैली में शामिल हुए। कर्मचारियों की हड़ताल के चलते लोगों को भी कुछ परेशानी का सामना करना पड़ा, जिसके चलते उन्होंने कंट्रोल रूम में शिकायतें की। विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि उनके पास बहलाना, धनास, सेक्टर-42, मनीमाजरा, मौलीजागरां समेत अन्य इलाकों से बिजली कटने की शिकायत आई। उन्होंने कहा कि विभाग ने पहले ही साफ कर दिया था कि ड्यूटी नही करने वाले कर्मचारियों पर 'नो वर्क-नो पे' लागू होगा। साथ ही अगर नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है।
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‘मुनाफे में चल रहे विभाग के निजीकरण को रोका जाए’
रैली को संबोधित करते हुए यूनियन के महासचिव गोपाल दत्त जोशी ने कहा कि हड़ताल बिजली क्षेत्र के निजीकरण के खिलाफ बिजली संशोधन बिल को रद्द करने, निजीकरण के दस्तावेज स्टैंडर्ड बिडिंग डाक्यूमेंट को निरस्त करने और मुनाफे में चल रहे शहर के बिजली विभाग का निजीकरण रोकने के लिए है। रैली के मुख्य वक्ता व अखिल भारतीय पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के अध्यक्ष इंजीनियर शैलेंद्र दुबे ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार अपने वायदे से मुकर गई है। बिजली संशोधन बिल 2021 का 12 राज्यों तथा 2 केन्द्र शासित प्रदेशों द्वारा सीधा विरोध करने के बाद सरकार ने बिल को नए सिरे से तैयार कर कर्मचारियों, अभियंताओं, उपभोक्ताओं व अन्य स्टेक होल्डरों के ऐतराज व सुझाव लेने की बात की थी, लेकिन ऐसा करने की बजाय सरकार इस बिल को बजट सत्र में ही पेश कर पारित कराना चाहती है, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। वहीं, यूनियन के प्रधान ध्यान सिंह ने कहा कि निजीकरण की आंधी से विद्युत वितरण का कार्य मनमाने ढंग से अपने पसंदीदा कारपोरेट घरानों और यहां तक की छोटे ठेकेदारों तक को दिया जाएगा। इसे रोकना जरूरी है। यूनियन के ज्वाइंट सेक्रेटरी अमरीक सिंह ने कहा कि विद्युत वितरण जैसे अति संवेदनशील और तकनीकी दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण कार्य को निजी घरानों और ठेकेदारों को इस तरह सौंपा जाना ठीक नहीं है। हमारा प्रदर्शन तबतक जारी रहेगा जब तक प्रशासन निजीकरण की इस प्रक्रिया पर रोक नहीं लगाता है। फेडरेशन ऑफ यूटी इंप्लाइज एंड वर्कर के प्रधान रघबीर चंद ने कहा कि निजीकरण के नाम पर सार्वजनिक संपत्ति मात्र एक रुपये की लीज पर निजी घरानों और ठेकेदारों को सौंपने की साजिश को सफल नहीं होने देना है। इसके लिए कर्मचारियों का सहयोग मांगा जा रहा है। प्रशासन फायदे में चल रहे विभाग को बेचने पर न जाने क्यों आतुर है।
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