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Chandigarh News: पैसे लेकर रेहड़ी-फड़ी छोड़ देते थे इंफोर्समेंट विंग के कर्मचारी
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चंडीगढ़। नगर निगम के इन्फोर्समेंट विंग में लंबे समय से चल रही अवैध वसूली के खेल का विजिलेंस जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया है कि कर्मचारी जब्त की गई रेहड़ी-फड़ी को बिना चालान किए ही पैसे लेकर उनके मालिकों को वापस कर देते थे।
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार इन्फोर्समेंट विंग के कर्मचारी जब रेहड़ी-फड़ी उठाते थे तो उसे इंडस्ट्रियल एरिया स्थित मालखाने तक ले जाने के बजाय रास्ते में ही मालिकों से संपर्क करते थे। तय जगह पर पैसे लेने के बाद बिना किसी चालान के सामान वापस कर दिया जाता था। अब विजिलेंस की टीम इस रैकेट का पर्दाफाश करने के लिए मालखाने के रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है।
बड़े अधिकारियों पर भी हो सकती है कार्रवाई
विजिलेंस यह भी जांच कर रही है कि अब तक कितने चालान काटे गए और कितनी बार बिना चालान के सामान वापस किया गया। इस मामले में विजिलेंस इन्फोर्समेंट विंग के बड़े अधिकारियों से भी पूछताछ की तैयारी में है। यह खुलासा विंग के पूर्व कर्मचारी विकास के वसूली रैकेट की शिकायत के बाद हुआ। इसके बाद नगर निगम ने आठ सब-इंस्पेक्टरों का तबादला कर दिया था।
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बैंक खातों और कॉल डिटेल्स की जांच
विजिलेंस टीम सब-इंस्पेक्टरों, बेलदारों और अन्य कर्मचारियों के बैंक खातों की भी जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि उनके खातों में कब और कितनी रकम जमा हुई। इसके अलावा कॉल डिटेल्स से वसूली नेटवर्क का खुलासा करने की कोशिश की जा रही है। जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि इन कर्मचारियों की ड्यूटी कौन तय करता था। विजिलेंस ने वीरवार और शुक्रवार को कई कर्मचारियों से पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक, सोमवार को भी सब-इंस्पेक्टरों को फिर से पूछताछ के लिए बुलाया गया है। इस पूरी जांच का नेतृत्व डीएसपी वेंकटेस कर रहे हैं। इस मामले में शिकायतकर्ता विकास को भी जल्द ही पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। यह जांच चीफ विजिलेंस ऑफिसर (सीवीओ) की मंजूरी के बाद शुरू की गई है।
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जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार इन्फोर्समेंट विंग के कर्मचारी जब रेहड़ी-फड़ी उठाते थे तो उसे इंडस्ट्रियल एरिया स्थित मालखाने तक ले जाने के बजाय रास्ते में ही मालिकों से संपर्क करते थे। तय जगह पर पैसे लेने के बाद बिना किसी चालान के सामान वापस कर दिया जाता था। अब विजिलेंस की टीम इस रैकेट का पर्दाफाश करने के लिए मालखाने के रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही है।
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बड़े अधिकारियों पर भी हो सकती है कार्रवाई
विजिलेंस यह भी जांच कर रही है कि अब तक कितने चालान काटे गए और कितनी बार बिना चालान के सामान वापस किया गया। इस मामले में विजिलेंस इन्फोर्समेंट विंग के बड़े अधिकारियों से भी पूछताछ की तैयारी में है। यह खुलासा विंग के पूर्व कर्मचारी विकास के वसूली रैकेट की शिकायत के बाद हुआ। इसके बाद नगर निगम ने आठ सब-इंस्पेक्टरों का तबादला कर दिया था।
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बैंक खातों और कॉल डिटेल्स की जांच
विजिलेंस टीम सब-इंस्पेक्टरों, बेलदारों और अन्य कर्मचारियों के बैंक खातों की भी जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि उनके खातों में कब और कितनी रकम जमा हुई। इसके अलावा कॉल डिटेल्स से वसूली नेटवर्क का खुलासा करने की कोशिश की जा रही है। जांच का एक अहम पहलू यह भी है कि इन कर्मचारियों की ड्यूटी कौन तय करता था। विजिलेंस ने वीरवार और शुक्रवार को कई कर्मचारियों से पूछताछ की। सूत्रों के मुताबिक, सोमवार को भी सब-इंस्पेक्टरों को फिर से पूछताछ के लिए बुलाया गया है। इस पूरी जांच का नेतृत्व डीएसपी वेंकटेस कर रहे हैं। इस मामले में शिकायतकर्ता विकास को भी जल्द ही पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। यह जांच चीफ विजिलेंस ऑफिसर (सीवीओ) की मंजूरी के बाद शुरू की गई है।