फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Embankments need to be strengthened further in punjab

Chandigarh News: और मजबूत करने होंगे तटबंध

Sun, 07 Sep 2025 06:54 PM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 07 Sep 2025 06:54 PM IST
विज्ञापन
Embankments need to be strengthened further in punjab
-पंजाब में धुस्सी बांधों ने कम की बर्बादी, वरना पांच हजार गांव आते चपेट में
विज्ञापन

-204 करोड़ रुपये का खर्च आया धुस्सी बांधों की नींव मजबूत करने में
-1044 चेक डैम भी बनाए गए, आठ जिलों में धुस्सी बांध टूटने से हुआ नुकसान
---
इंट्रो
पंजाब इस समय इतिहास की सबसे बड़ी बाढ़ की मार झेल रहा है। भाखड़ा, पौंग और रणजीत सागर बांधों से रिकॉर्ड पानी छोड़े जाने के कारण पंजाब में हालात बहुत खराब हो गए हैं। 1900 गांव बाढ़ की जद में हैं। हालांकि, नदियों के किनारे बने धुस्सी बांधों (तटबंधों) ने काफी बचाव किया वरना 5000 से भी ज्यादा गांव प्रभावित होते। स्पष्ट है कि पंजाब को भविष्य में बाढ़ से बचाव करना है तो इन धुस्सी बांधों को और मजबूत करना होगा।
---
राजिंद्र शर्मा
चंडीगढ़। पंजाब के सभी 23 जिले भीषण बाढ़ चपेट में हैं। 1.74 लाख हेक्टेयर फसल डूब चुकी है। करीब चार लाख लोग बाढ़ से सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। पंजाब में आई बाढ़ ने धुस्सी बांधों की अहमियत को बढ़ा दिया है। यदि यह बांध न होते तो नुकसान का आंकड़ा कई गुना हो सकता था। पंजाब सरकार ने इस वर्ष 204 करोड़ रुपये खर्च धुस्सी बांधों को मजबूत किया था। 1044 चेक डैम भी स्थापित किए गए थे ताकि पानी की प्रवाह की गति को कम किया जा सके लेकिन इस बार पहाड़ों से नदियों व बांधों में इतना अधिक पानी आया कि उसे नदी, नाले व बांध झेल नहीं पाए और ओवरफ्लो हो गए। इससे बाढ़ विकराल हो गई।
विज्ञापन

इस साल पौंग बांध में 11.70 बिलियन क्यूबिक मीटर (बीसीएम) पानी आया है जो आज तक के बांध के इतिहास में सबसे अधिक है। भाखड़ा में भी रिकार्ड 9.11 बीसीएम पानी आया जो 1988 और 2023 में बाढ़ के लगभग बराबर ही है। इस कारण दोनों बांध के गेट बार-बार खोलने पड़े ताकि पानी का दवाब कम किया जा सके। साथ ही इस बार जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश बौर पंजाब में भी रिकॉर्ड बारिश हुई है जिस कारण बाढ़ ने यह तबाही मचाई।
विज्ञापन
विज्ञापन

विशेषज्ञों के अनुसार धुस्सी बांधों को पहले से मजबूत न बनाया जाता तो यह नुकसान दोगुना होता लेकिन अब सरकार को इस बाढ़ से सबक लेकर अपनी तैयारी और मजबूत करनी होगी ताकि नदी-नालों व बांधों को आगामी सालों के मानसून सीजन के लिए तैयार किया जा सके। प्रदेश के आठ जिलों में धुस्सी बांधों के टूटने और दरार पड़ने के मामले सामने आए हैं जिनमें गुरदासपुर, तरनतारन, लुधियाना, अमृतसर, मानसा, पठानकोट, होशियारपुर और फिरोजपुर शामिल हैं। गुरदासपुर में सबसे अधिक 15 जगह धुस्सी बांध टूटने के मामले सामने आए। इसी तरह अमृतसर में 12, होशियारपुर में 8 और पठानकोट में 3 मामले सामने आए हैं। सरकार का दावा है कि धुस्सी बांधों के ओवरफ्लो होने की शिकायत अधिक है क्योंकि सरकार ने बांधों को टूटने से बचाने के लिए पहले ही उचित इंतजाम किए हुए थे। इस समय लुधियाना में धुस्सी बांध टूटने से कई गांवों में खतरा मंडरा रहा है।

599 परियोजनाओं पर हुआ काम
राज्य सरकार ने बाढ़ से बचाने के लिए कुल 599 परियोजनाओं को पूरा किया था। स्टेट डिजास्टर मिटिगेशन फंड (एसडीएमएफ) मनरेगा और विभागीय फंडों के उपयोग से 4766 किलोमीटर से अधिक नालों और नदियों की गाद साफ की गई। जिलों में 8.76 लाख ईसी बैग (बोरियां) खरीदी गई हैं और 2.42 लाख बोरियां भरकर रखी गई जिन्हें बाढ़ प्रभावित एरिया में पहुंचाया गया। इसके अलावा मिट्टी की स्थिरता को बढ़ाने के लिए 53,400 बांस के पौधे लगाने के साथ-साथ 1044 चेक डैम, 3957 सोक पिट और 294 किलोमीटर लंबे वेटिवर घास पौधे लगाने का काम पूरा किया गया। नदी व नालों में इतना पानी आया कि यह बंदोबस्त ने नुकसान जरूर कम कर दिया लेकिन यह बाढ़ से तबाही को रोक नहीं पाए।

नदी-नालों से अतिक्रमण हटाने की जरूरत: सतीश सिंगला
भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड के पूर्व सचिव सतीश सिंगला ने कहा कि इस बार पहाड़ी राज्यों में इतनी अधिक बारिश हुई कि भारी मात्रा में पानी नदियों व बांधों में आया जो बाढ़ का कारण बना। सरकार को अब आगे के लिए अपनी तैयारी और मजबूत करनी होगी। नदी व नालों से अतिक्रमण हटाना होगा। सरकार की तरफ से नदियों के आसपास खेती की अनुमति दी जा सकती है लेकिन किसी भी तरह के निर्माण पर पूरी तरह से रोक लगानी होगी क्योंकि यह अधिक जान-माल के नुकसान का कारण बनता है। धुस्सी बांधी को और मजबूत करना होगा ताकि यह बाढ़ के पानी को रोक सके। साथ ही नदियों के पुराने स्वरूप को भी बहाल करना होगा क्योंकि अगर हम नदियों पर अतिक्रमण करते जाएंगे तो पानी ने अपना रास्ता खुद बना लेना है।

नदियों के किनारे फ्लड प्लेन जोन घोषित किए जाएं : सुरिंदर बाहगा
पूर्व मनोनीत पार्षद व पर्यावरण विशेषज्ञ सुरिंदर बाहगा ने कहा कि नदियों के निकारे फ्लड प्लेन जाने घोषित किए जाने चाहिए ताकि यहां किसी भी तरह के विकास और निर्माण पर रोक लगाई जा सके। पंजाब में अभी तक इस पर काम नहीं हो पाया है। इससे बाढ़ को रोकने के लिए सरकार को बेहतर रणनीति बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही प्रदेश में पॉन्ड डेवलपमेंट अथॉरिटी भी बनाई जानी चाहिए जिससे तालाबों को बहाल करने में मदद मिलेगी। बाढ़ की रोकथाम के लिए तालाबों के संरक्षण की भी जरूरत है। तालाब खत्म होते जा रहे हैं। अगर गांवों में पहले की तरह तालाब होंगे तो बाढ़ का पानी तालाबों की तरफ मोड़ा जा सकेगा। इन सब उपायों से काफी हद तक बाढ़ से राहत मिलेगी। साथ ही धुस्सी बांधों की भी समय-समय पर रिपेयर की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन भी बाढ़ का प्रमुख कारण है। इस बार पहाड़ी राज्यों में रिकाॅर्ड 45 बादल फटने के मामले सामने आए हैं। इससे पहले कभी भी इतने अधिक बादल फटने के मामले नहीं सुने इसलिए विकास भी पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना होना चाहिए। अवैध खनन पर पूरी तरह से रोक लगाई जानी चाहिए। साथ ही बीबीएमबी, मौसम विभाग और राज्य सरकार के बीच उचित तालमेल होना चाहिए ताकि समय-समय पर किसी भी तरह की चेतावनी साझी की जा सकती है। फिलहाल को-आर्डिनेशन की काफी कमी है। इसके लिए एक संयुक्त कमेटी भी गठित की जानी चाहिए।


धुस्सी बांधों को टूटने से बचाने के लिए यह उपाय भी जरूरी
-बाढ़ से बचाने के लिए धुस्सी बांधों का नियमित रखरखाव और मरम्मत होनी चाहिए।
-कटाव से बचाने के लिए उचित सामग्री जैसे सैंडबैग से बांधों को मजबूत करने के आपातकालीन उपाय किए जा सकते हैं।
-बांध के किनारे मजबूत वनस्पति आवरण बनाए रखने से कटाव को रोका जा सकता है।

नदियों व बांधों से इतना अधिक पानी आने से हुआ नुकसान
पंजाब में जितने भी धुस्सी बांध हैं सरकार ने पहले ही उनको मजबूत करने का काम कर लिया था। इस बार जितनी बारिश हुई और नदियों व बांधों से इतना अधिक पानी आया कि उससे और अधिक नुकसान हो सकता था लेकिन सरकार ने अपनी तैयारी से इस नुकसान को कम करने का काम किया है। घग्गर ने वर्ष 2023 के दौरान भारी तबाही मचाई थी लेकिन इस बार घग्गर में पिछली बार से भी अधिक पानी आया था। सरकार ने पहले ही घग्गर को चौड़ा करने का काम कर लिया था। यही कारण है कि क्षमता से अधिक पानी आने के बावजूद किसी भी तरह के जान माल के नुकसान को रोका गया। समय पर रिपेयर के चलते ही धुस्सी बांधों के टूटने के अधिक मामले सामने नहीं आए। अधिक पानी आने के कारण धुस्सी बांध ओवरफ्लो हो गए जो बाढ़ के कारण बने।
-बरिंदर कुमार गोयल, जल संसाधन मंत्री, पंजाब।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article