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Punjab: जेल में मोबाइल सिग्नल स्ट्रांग बनाने का जुगाड़, आपातकालीन नंबर बन रहा कैदियों का मददगार

Wed, 29 Nov 2023 09:21 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Wed, 29 Nov 2023 09:21 AM IST
सार

पंजाब की जेलों में मोबाइल फोन के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए जेलों को अत्याधुनिक जैमर से लैस करने करने के लिए कदम उठाने के लिए पंजाब सरकार को 2011 में आदेश दिया था।
 

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Efforts of Punjab govt to block mobile signals through jammers in jail being foiled by tricks of prisoners
jail

विस्तार

जेल में जैमर के माध्यम से मोबाइल सिग्नल को रोकने की पंजाब सरकार की कोशिशों को कैदियों के जुगाड़ नाकाम कर रहे हैं।
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अत्याधुनिक सिग्नल जैमर प्रोजेक्ट को कैदी केवल आपातकालीन नंबर डायल कर बायपास कर रहे हैं। इस नंबर को मिलाने पर सिग्नल मजबूत हो जाता है और इसके बाद वे मनचाही कॉल जेल परिसर से ही कर पा रहे हैं। जेलों में जैमर को लेकर पंजाब सरकार की ओर से सौंपे गए हलफनामे से यह खुलासा हुआ है।

पंजाब की जेलों में मोबाइल फोन के बढ़ते इस्तेमाल को लेकर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने संज्ञान लेते हुए जेलों को अत्याधुनिक जैमर से लैस करने करने के लिए कदम उठाने के लिए पंजाब सरकार को 2011 में आदेश दिया था। एक दशक से अधिक समय से यह मामला विचाराधीन है और अभी तक पंजाब सरकार कार्य को पूरा नहीं कर सकी है। 
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पंजाब सरकार ने बताया कि केंद्र सरकार की मंजूरी व सुझाव के अनुसार पंजाब की दो जेलों अमृतसर व कपूरथला में टावर ऑफ हार्मोनियस कॉल ब्लॉकिंग सिस्टम पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर लगाया गया है। इसे पंजाब की अन्य जेलों में लगाने के लिए पंजाब सरकार ने सभी हितधारकों के साथ मिलकर अन्य जेलों का सर्वे करवाया है।
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रिपोर्ट में सरकार ने बताया कि जैमर के माध्यम से सिग्नल जाम करने के प्रयास सरकार के स्तर पर किए जा रहे हैं, लेकिन कैदी एसओएस नंबर को हिट एंड ट्राई के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। नंबर लग जाने पर सिग्नल मजबूत हो जाता है और फिर फोन काट कर मनचाहे नंबर पर डायल करते हैं। इसके साथ ही मोबाइल में सिग्नल को मैनुअल तौर पर चुन कर भी कैदी फोन का इस्तेमाल करते हैं।

पंजाब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती 5जी सिग्नल को रोकना है क्योंकि यह सिस्टम 5जी सिग्नल पर प्रभावी नहीं है। इसके साथ ही यह भी बताया कि इन दोनों जेलों में पायलेट प्रोजेक्ट के सर्वे का जिम्मा निजी कंपनी को सौंपा गया था। कंपनी ने अमृतसर में इसे 78 प्रतिशत तो कपूरथला जेल में केवल 70 प्रतिशत प्रभावी बताया है। 


कंपनी ने एक माह तक रोजाना विभिन्न स्थानों पर सिग्नल को लेकर अपनी रिपोर्ट तैयार की है। हलफनामे में हाईकोर्ट से अपील की गई कि केंद्र सरकार को निर्देश दिए जाएं कि टावर ऑफ हार्मोनियस कॉल ब्लाकिंग सिस्टम को 5जी सिग्नल के लिए प्रभावी करने को लेकर निर्देश जारी किए जाएं।
 
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