किचन का खर्च हुआ महंगा, एक महीने में बढ़ा 1000 रुपये का बोझ, गड़बड़ा रहा बजट
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थोक कीमतों पर महंगाई का असर सीधेे किचन पर पड़ा है। एक महीने के भीतर किचन में प्रयोग होने वाली खाद्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ने से लगभग 1000 रुपये का अतिरिक्ति बोझ पड़ा है। करियाना (ग्रॉसरी) के दामों में भी 25 से 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। इससे मध्यम वर्ग का बजट गड़बड़ा गया है।
थोक कीमतों पर आधारित महंगाई दर जनवरी 2020 में बढ़कर 3.1 प्रतिशत दर्ज हुई है। यह बढ़ोतरी गुजरे 9 महीने में महंगाई दर का सबसे ऊंचा स्तर है। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि महंगाई दर में यह इजाफा आलू-प्याज जैसी जरूरी खाने पीने की चीजों के दाम बढ़ने के कारण हुई है। जनवरी 2020 में जिस खाद्य वस्तु के दाम 65 रुपये थे, वही एक माह बाद फरवरी में बढ़कर 85 रुपये पहुंच गए हैं।
80 रुपये बढ़े मिर्च के दाम
खाद्य वस्तुओं में शामिल लाल मिर्च के दामों में भी एक माह में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। जनवरी 2020 में साबुत लाल मिर्च की कीमत 150 रुपये किलो थी, जो फरवरी में 80 रुपये बढ़कर 230 रुपये तक पहुंच गई है। मिर्च में इस तेजी को लेकर व्यापारी भी असमंजस में हैं।
1200 रुपये बढ़े छोटी इलाइची के दाम
महंगाई का आलम यह है कि आमतौर पर माउथ फ्रेशनर और मसाले में खुशबू के लिए प्रयोग की जानेे वाली छोटी इलाइची के दामों में एक माह के भीतर 1200 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। जनवरी में 3500 रुपये इसकी कीमत थी, जो अब बढ़कर 4700 रुपये किलो पहुंच गई है।
चावल का मूल्य स्थिर
सभी खाद्य वस्तुओं के मूल्यों में वृद्धि का असर चावल पर नहीं पड़ा है। व्यापारी इसके पीछे का कारण चावल के निर्यात पर लगाई गई रोक को बता रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि चावल बाहर नहीं जा पाने के कारण महंगाई से दूर है। यह अभी भी 40 रुपये से लेकर 100 रुपये किलो तक बिक रहा है।
एक माह में कितने बढ़े दाम
- वस्तु जनवरी(थोक मूल्य) फरवरी(थोक मूल्य) फुटकर मूल्य
- रिफाइंड 65 रुपये 85 रुपये 95-100 रुपये
- सरसों का तेल 90 रुपये 100 रुपये 110-115 रुपये
- दाल 60 रुपये 85 रुपये 100-115 रुपये
- चीनी 34 रुपये 36 रुपये 38-40 रुपये
नोट: खाद्य वस्तुओं के मूल्य सेक्टर 26 की ग्रेन मार्केट के मुताबिक
महंगाई कोई नई बात नहीं
महंगाई कोई नहीं बात नहीं है। सालों से मध्यम वर्ग के लोगों को इसका दंश को झेलना पड़ रहा है। जब तक यहां की सरकारों के द्वारा महंगाई को लेकर सुनियोजित तरीके से रणनीति नहीं बनाई जाएगी तब तक लोगों को इससे राहत नहीं मिल पाएगी। -कुसुम, गृहणी
लोगों को सड़कों पर उतरना होगा
महंगाई को लेकर नेता और अफसर तब तक कुछ नहीं करेंगे जब तक लोग इसके विरोध में सड़कों पर नहीं उतरेंगे। सरकार चाहे किसी भी दल की हो आमजन को महंगाई से राहत देने के लिए कोई भी ठोस कार्रवाई नहीं की जाती। अब पब्लिक को इसके खिलाफ सड़कों पर उतरना होगा। सुमन गुप्ता, धनास
नेता नहीं सिर्फ पब्लिक होती है परेशान
महंगाई की इस मार से नेता नहीं पब्लिक परेशान होती है। प्याज से लेकर किराना तक सब महंगा हो गया है। मध्यम वर्ग किचन की बढ़ती इस महंगाई को लेकर सबसे ज्यादा प्रभावित है। यह गंभीर समस्या है, जल्द ही कोई ठोस रणनीति बनाने की आवश्यकता है। पूजा बख्शी, समाज सेविका व गृहणी