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Hindi News ›   Chandigarh ›   Education Department Chandigarh Project to Change School Teaching Methods with No Bag Day

सराहनीय पहलः स्कूलों में अब पढ़ाने के तरीके में होगा बदलाव, अब हफ्ते में एक दिन ‘नो बैग डे’

Tue, 27 Aug 2019 02:36 PM IST
खुशबू गोयल रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़
रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Tue, 27 Aug 2019 02:36 PM IST
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Education Department Chandigarh Project to Change School Teaching Methods with No Bag Day
फाइल फोटो
हमारी शिक्षा व्यवस्था में आज भी सबसे ज्यादा जोर अंकों पर है, न कि सीखने और अधिक से अधिक नॉलेज हासिल करने पर। दशकों से चली आ रही इस व्यवस्था में बदलाव की जरूरत समझे जाने के बावजूद अब तक कोई खास पहल नहीं की जा सकी है। लेकिन अब चंडीगढ़ शिक्षा विभाग पढ़ाने के तौर तरीके में व्यापक बदलाव करने जा रहा है।
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स्कूलों में नो बैग डे, फील्ड ट्रिप, इंटीग्रेटिड पीरियड आदि के माध्यम से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करने की ओर एक बड़ी पहल की गई है। विभाग का मानना है कि शिक्षा व्यावहारिक और रुचिकर होनी चाहिए, जिससे वह बच्चों को सीखने की दिशा में प्रेरित कर सके। सीखने के अवसर बाहर ऑफिस, शोध संस्थानों और कारखानों में अधिक हैं, न कि सिर्फ कक्षाओं में। इस मकसद से स्कूलों में ‘नो बैग डे’ और ‘फील्ड ट्रिप’ शुरू करने की योजना है।
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हफ्ते में एक दिन स्टूडेंट्स को किताबों से नहीं बल्कि एक्टिविटी के माध्यम से पढ़ाया जाएगा। उन्हें वीडियोज दिखाकर टॉपिक्स को समझाने की कोशिश होगी। वर्तमान शिक्षा पद्धति किताबों को रटने पर आधारित है। अधिकतर शिक्षा कक्षा तक ही सीमित है और कक्षा के बाहर बहुत कम, जबकि होना ठीक इसका उलटा चाहिए। इस पद्धति को बदलने के मकसद से फील्ड ट्रिप के तहत स्टूडेंट्स को रेलवे स्टेशन, गैस स्टेशन, पार्क, खेत, पोस्ट ऑफिस आदि जगहों पर ले जाकर स्टूडेंट्स को लाइव उदाहरण के साथ पढ़ाया जाएगा।
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हर टीचर को सौंपी जाएगी 6 बच्चों की जिम्मेदारी

हफ्ते में एक दिन 6वीं से 10वीं कक्षा के स्टूडेंट्स की एक ज्वाइंट क्लास लगेगी। इसमें चारों कक्षाओं को एक साथ बिठाकर रियल लाइफ एक्सपीरियंस से पढ़ाया जाएगा। हर टीचर को 5-6 स्टूडेंट्स की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी, जो उन बच्चों की परफॉर्मेंस पर नजर रखेंगे।

चंडीगढ़ शिक्षा विभाग का मानना है कि इन बदलावों से बच्चों में सीखने की क्षमता और प्रवृत्ति का विकास होगा, जिसका फायदा वर्ष 2021 में होने वाले पीसा टेस्ट में मिलेगा क्योंकि इस टेस्ट के लिए भारत सरकार ने पूरे देश में से सिर्फ चंडीगढ़ के स्टूडेंट्स को चुना गया है।

शिक्षा वही सार्थक है, जो जीवन को बौद्धिक, शारीरिक और व्यावहारिक स्तर पर सक्षम और बेहतर बना सके। शिक्षा का उद्देश्य कुछ किताबों या कुछ अध्यायों को रटना नहीं है, बल्कि उनसे सीखना है। पीसा टेस्ट को लेकर बैठक हुई है, जिसमें सभी प्रिंसिपलों को कुछ दिशा- निर्देश जारी किए गए हैं।

- बीएल शर्मा, एजुकेशन सेक्रेटरी, चंडीगढ़
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