ईडीसी से अरबों रुपया जोड़ा तो गुरुग्राम को बदहाली पर क्यों छोड़ा: हाईकोर्ट
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हरियाणा सरकार द्वारा गुरुग्राम के विकास के लिए सेक्टर वासियों से एक्सट्रा डेवलपमेंट चार्ज के रूप में वसूली गई 13948.64 करोड़ की राशि के बावजूद गुड़गांव पानी और जाम से बदहाल क्यों है।
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने इस मामले में वितायुक्त व हुडा के मुख्य प्रशासक से जवाब तलब किया है। हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को यह भी बताने का आदेश दिया है कि 28 जुलाई व 30 जुलाई की पानी के कारण लगने वाले जाम के बाद सरकार ने गुडगांव को इस तरह की समस्या से बचाने के लिए क्या कदम उठाए हैं।
अगर सरकार ने कोई कदम उठाया है तो वह क्या है और वह कब तक पूरा हो जाएगा। हाईकोर्ट ने यह आदेश गुडगांव में ई.डी.सी. के नाम पर हजारों करोड़ों रूपये एकत्र कर भी लोगो को मूलभूत सुविधा उपलब्ध न करवाने की एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान जारी किया। इस दौरान हरियाणा महालेखाकार की ईडीसी पर ऑडिट रिपोर्ट पेश की गई।
मामले की सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार ने कोर्ट में ई.डी.सी. के पैसे का उपयोग बारे एक रिपोर्ट कोर्ट में पेश की। सरकार ने कहा कि सड़क, सीवरेज, पानी , सोलिड वेस्ट प्लांट आदि पर राशी खर्च की जाती है।
सुनवाई के दौरान सरकार ने कोर्ट को बताया कि गुडगांव राज्य का एक महत्वपूर्ण आर्थिक शहर है इस लिए सरकार की कोशिश है कि इस शहर में हर तरह की आधार भूत सुविधा उपलब्ध हो।
ईडीसी पर हरियाणा महालेखाकार ने सौंपी ऑडिट रिपोर्ट
सरकार के इस जवाब पर याचिकाकर्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि सरकार के पास किसी तरह का कोई नियम नही है कि किस आधार पर कहा से कितना ई.डी.सी. वसूल करना है।
सरकार के पास इस बात की पूर्ण जानकारी है कि कितनी राशी किस विभाग के पास ई.डी.सी. के तौर पर गई है और कहां कितनी खर्च की गई है। अगर सरकार के पास कोई सही योजना होती तो गुडगांव में जाम व बाढ़ जैसे हालात नही होते।
हाईकोर्ट ने जब सरकार से ई.डी.सी. की आडिट रिपोर्ट के बारे में जानकारी मांगी तो याचिकाकर्ता ने कहा कि इससे पहले भी सरकार से कोर्ट कई बार ई.डी.सी.की आडिट रिपोर्ट तलब कर चुकी है लेकिन सरकार केवल सीए की आडिट रिपोर्ट कोर्ट में पेश कर रही है जबकि ई.डी.सी. की जो आडिट रिपोर्ट महालेखाकार हरियाणा ने तैयार की थी वो कोर्ट में पेश नही की गई।
हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को यह भी बताने का आदेश दिया है कि जुलाई की पानी के कारण लगने वाले जाम के बाद सरकार ने गुडगांव को इस तरह की समस्या से बचाने के लिए क्या कदम उठाए हैं। अगर सरकार ने कोई कदम उठाया है तो वह क्या है और वह कब तक पूरा हो जाएगा।
कोर्ट ने अफसरशाही पर सवाल उठाते हुए कहा कि ईडीसी यानि बाहय विकास शुल्क के तौर पर हुडा के सेक्टरों से 14 साल में 13964.64 करोड़ रुपए वसूलने के बावजूद भी देश का सबसे मशहूर, विकसित और योजनाबद्ध तरीके से बसाए गए शहर का दावा क्यों एक बरसात में धुल गया।
इसपर हरियाणा सरकार और हुडा की आरे से बताया गया कि सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट, ड्रेनेज, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट आदि सुविधाएं मुहैया करवाई गई हैं और ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता है कि पैसा व्यर्थ गंवाया गया है।