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NSEL scam: 5600 करोड़ के घोटाले में कार्रवाई, ईडी ने लुधियाना के कारोबारी की दुबई में कोठी की जब्त

Thu, 17 Nov 2022 09:59 AM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Thu, 17 Nov 2022 09:59 AM IST
सार

5600 करोड़ के घोटाले में आरोपी के बेटे अभिनव और बेटी सुमेधा की भी तलाश की जा रही है। ईडी के सूत्रों ने बताया कि सुमेधा के दुबई, सिंगापुर, फिलीपींस और यूके में कारोबारी संपर्क हैं।

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ED attached Dubai-based bungalow of Ludhiana-based businessman Kailash Agarwal, in NSEL scam
ED - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 5600 करोड़ के नेशनल स्पॉट एक्सचेंज लिमिटेड (एनएसईएल) घोटाले के मुख्य आरोपियों में से एक लुधियाना के कारोबारी कैलाश अग्रवाल के दुबई स्थित विशाल बंगले को जब्त कर लिया है। ईडी का दावा है कि दुबई के पॉश पाम जुमेराह इलाके में स्थित बंगले को अग्रवाल ने घोटाले से अर्जित आय से खरीदा था। कुल 622.44 वर्ग मीटर के क्षेत्र में फैले बंगले की कीमत 30 करोड़ रुपये आंकी गई है। 

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5600 करोड़ के घोटाले में आरोपी के बेटे अभिनव और बेटी सुमेधा की भी तलाश की जा रही है। ईडी के सूत्रों ने बताया कि सुमेधा के दुबई, सिंगापुर, फिलीपींस और यूके में कारोबारी संपर्क हैं। ईडी को संदेह है कि कैलाश अग्रवाल ने हवाला के जरिये बड़ी रकम विदेशों में ट्रांसफर कर उसे सुमेधा के कारोबार में लगाया है। ईडी के समन किए जाने के बाद सुमेधा दुबई भाग गई, जबकि कैलाश मुंबई की एक अदालत में जारी मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत दर्ज मामले में सशर्त जमानत पर है। इससे पहले पंजाब पुलिस इस आरोपी को पकड़ नहीं पाई थी।
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क्या है एनएसईएल घोटाला
एनएसईएल के जरिये निवेशक वेयरहाउस में रखी गई कस्टर सीड, ऊन, चीनी जैसी कमोडिटी पर 25-36 दिन के लिए लोन देते थे। इसमें 15-16 फीसदी तक का रिटर्न मिलता था। 2014 में ब्रोकर्स ने निवेशकों से जिन कमोडिटी पर पैसा लगवाया, स्टॉक में वह कमोडिटी थी ही नहीं और गोदाम खाली थे। वेयरहाउस की रसीद फर्जी थी। घोटाला सामने आने के बाद एनएसईएल एक्सचेंज बंद हो गया। इसमें 13,000 से अधिक निवेशकों का 5600 करोड़ रुपया फंसा हुआ है। सीबीआई और ईडी समेत देश की अन्य जांच एजेंसियां इस मामले की जांच कर रही हैं। इस घोटाले में शामिल 22 आरोपियों मुकदमा चला, उनमें लुधियाना का कैलाश भी शामिल था।
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अग्रवाल के सिर 700 करोड़ की देनदारी
ईडी के दावे के मुताबिक, कैलाश अग्रवाल पर पीएमएलए मामले में 700 करोड़ रुपये की देनदारी है। उन्हें ईडी की शिकायत पर 15 मई 2020 को लुधियाना पुलिस की ओर से अलग से बुक किया गया था, क्योंकि उन्होंने लुधियाना स्थित 70 करोड़ रुपये की 19 संपत्तियों को धोखे से बेच दिया था, जो ईडी की ओर से संलग्न मामले में कानूनी रूप से भारत सरकार से संबंधित थी। यह संपत्तियां मैसर्स जेनेक्स इंफ्राटेक प्राइवेट लिमिटेड लुधियाना के नाम पर थीं। अग्रवाल ने यह संपत्तियां, कंपनी के निदेशकों, अपनी पत्नी रजनी अग्रवाल और अपने भतीजे अभिषेक कंसल की मिलीभगत से बेच दीं। फिर भी लुधियाना के पुलिस आयुक्त कौस्तुभ शर्मा ने देहलोन पुलिस स्टेशन में 10 अक्टूबर को दर्ज की गई एफआईआर में रजनी, अभिषेक और मनमोहन के नाम शामिल नहीं किए।


पंजाब पुलिस ने केस रफा-दफा करने की कोशिश की
इस मामले की जांच के लिए पंजाब पुलिस की दो विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया था, जिनमें से एक का नेतृत्व तत्कालीन संयुक्त पुलिस आयुक्त सचिन गुप्ता ने किया, जबकि दूसरी एसआईटी का नेतृत्व आरएस बराड़ ने किया था। इन दोनों एसआईटी ने ईडी की शिकायत पर दर्ज एफआईआर को यह कहते हुए रद्द करने की सिफारिश की थी कि संपत्ति 365 दिन की अवधि से अधिक कुर्क नहीं की जा सकती। लेकिन, ईडी ने पंजाब पुलिस अधिकारियों के इस तर्क को खारिज कर दिया कि पीएमएलए ट्रिब्यूनल ने 18 दिसंबर, 2014 को एक न्यायिक आदेश के जरिये अस्थायी कुर्की को 365 दिनों के भीतर स्थायी कर दिया था, जो मुकदमे के लंबित रहने तक जारी रहना था।

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