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चिंताजनकः अनलॉक के बावजूद अर्थव्यवस्था बेपटरी है, जीएसटी संग्रह में भी 10 फीसदी की कमी
Sat, 03 Oct 2020 04:07 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Sat, 03 Oct 2020 04:07 PM IST
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वस्तु एवं सेवा कर
- फोटो : pixabay
लॉकडाउन की वजह से बड़े पैमाने पर लोगों के काम धंधे चौपट हो गए हैं। कोरोना वायरस ने चंडीगढ़ प्रशासन को भी आर्थिक तौर पर बड़ा झटका दिया है। अनलॉक-5 के शुरू होने के बाद भी शहर की अर्थव्यवस्था पटरी पर नहीं लौटी है। पिछले साल के मुकाबले सितंबर महीने में भी सकल (ग्रॉस) जीएसटी संग्रह में 10 फीसदी की कमी आई है।
माल और सेवा कर (जीएसटी), आबकारी और मूल्य वर्धित कर (वैट) चंडीगढ़ प्रशासन के खजाने को भरने में अहम भूमिका अदा करते हैं, लेकिन लॉकडाउन की वजह से बड़ा असर भी इन्हीं पर पड़ा है। सिर्फ जीएसटी के संग्रह में पिछले साल सितंबर के मुकाबले 10 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। सितंबर 2019 में जीएसटी संग्रह करीब 157 करोड़ रुपये था जबकि इस बार 141 करोड़ रुपये ही आया है। पिछले महीने अगस्त में भी जीएसटी संग्रह में 13 फीसदी की कमी देखी गई थी।
अप्रैल और मई महीने में सभी तरह की आर्थिक गतिविधियां बंद रहीं, जिसकी वजह से कर संग्रह भारी कमी आई। अप्रैल और मई महीने में लगे संपूर्ण लॉकडाउन की वजह से चंडीगढ़ प्रशासन को कर संग्रह में कुल 342 करोड़ का घाटा हुआ। जीएसटी पेट्रोल और शराब को छोड़कर अन्य पर वसूला जाता है। वहीं, हैरानी की बात है कि पंजाब और हरियाणा में इस वर्ष पिछले साल के मुकाबले ज्यादा जीएसटी संग्रह हुआ है। पिछले साल के मुकाबले सितंबर महीने में पंजाब ने 5 प्रतिशत तो हरियाणा ने 15 प्रतिशत ज्यादा जीएसटी संग्रह किया है।
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माल और सेवा कर (जीएसटी), आबकारी और मूल्य वर्धित कर (वैट) चंडीगढ़ प्रशासन के खजाने को भरने में अहम भूमिका अदा करते हैं, लेकिन लॉकडाउन की वजह से बड़ा असर भी इन्हीं पर पड़ा है। सिर्फ जीएसटी के संग्रह में पिछले साल सितंबर के मुकाबले 10 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। सितंबर 2019 में जीएसटी संग्रह करीब 157 करोड़ रुपये था जबकि इस बार 141 करोड़ रुपये ही आया है। पिछले महीने अगस्त में भी जीएसटी संग्रह में 13 फीसदी की कमी देखी गई थी।
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अप्रैल और मई महीने में सभी तरह की आर्थिक गतिविधियां बंद रहीं, जिसकी वजह से कर संग्रह भारी कमी आई। अप्रैल और मई महीने में लगे संपूर्ण लॉकडाउन की वजह से चंडीगढ़ प्रशासन को कर संग्रह में कुल 342 करोड़ का घाटा हुआ। जीएसटी पेट्रोल और शराब को छोड़कर अन्य पर वसूला जाता है। वहीं, हैरानी की बात है कि पंजाब और हरियाणा में इस वर्ष पिछले साल के मुकाबले ज्यादा जीएसटी संग्रह हुआ है। पिछले साल के मुकाबले सितंबर महीने में पंजाब ने 5 प्रतिशत तो हरियाणा ने 15 प्रतिशत ज्यादा जीएसटी संग्रह किया है।
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पिछले महीने के मुकाबले सिर्फ दो करोड़ रुपये बढ़ा संग्रह
अनलॉक की प्रक्रिया के शुरू होने के बाद उम्मीद जताई जा रही थी कि दो से तीन महीनों में शहर का उद्योग जगत पटरी पर लौट आएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। अभी भी शहर के उद्योग पूरी तरह से पटरी पर नहीं आ पाए हैं। जुलाई और अगस्त महीने में व्यापार और उद्योगों पर से लगभग सभी तरह की बंदिशें हट गई थीं, बावजूद इसके जीएसटी संग्रह में पिछले साल के मुकाबले काफी कमी देखी गई। अगस्त महीने के मुकाबले सितंबर में महज दो करोड़ रुपये की ही जीएसटी संग्रह में वृद्धि हुई है।
जीएसटी संग्रह में आई कमी को लेकर न छापने की शर्त पर प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि चंडीगढ़ में लॉकडाउन के बाद से लगातार स्थिति बेहतर हो रही है। अप्रैल, मई, जून और जुलाई के महीने की अपेक्षा जीएसटी संग्रह में इजाफा हो रहा है। अप्रैल और मई महीने में सबसे ज्यादा करीब 342 करोड़ का घाटा लगा था, क्योंकि इस दौरान सभी काम ठप्प थे। अब धीरे-धीरे अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले महीनों में स्थिति के सामान्य होने की उम्मीद है।
महीना - जीएसटी संग्रह
अप्रैल - 14 करोड़
मई - 42 करोड़
जून - 73 करोड़
जुलाई - 109 करोड़
अगस्त - 139 करोड़
सितंबर - 141 करोड़
जीएसटी संग्रह में आई कमी को लेकर न छापने की शर्त पर प्रशासन के एक अधिकारी ने बताया कि चंडीगढ़ में लॉकडाउन के बाद से लगातार स्थिति बेहतर हो रही है। अप्रैल, मई, जून और जुलाई के महीने की अपेक्षा जीएसटी संग्रह में इजाफा हो रहा है। अप्रैल और मई महीने में सबसे ज्यादा करीब 342 करोड़ का घाटा लगा था, क्योंकि इस दौरान सभी काम ठप्प थे। अब धीरे-धीरे अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट रही है। उन्होंने कहा कि आने वाले महीनों में स्थिति के सामान्य होने की उम्मीद है।
महीना - जीएसटी संग्रह
अप्रैल - 14 करोड़
मई - 42 करोड़
जून - 73 करोड़
जुलाई - 109 करोड़
अगस्त - 139 करोड़
सितंबर - 141 करोड़