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हाईकोर्ट की चुनाव आयोग को दो टूक, चुनाव में नशे का न हो इस्तेमाल

Tue, 10 Jan 2017 01:13 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 10 Jan 2017 01:13 AM IST
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EC Court of bluntly, is not used in the choice of drugs
हाईकोर्ट - फोटो : file photo

पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने ट्राईसिटी में जारी नशे की बिक्री और तस्करी के खिलाफ दाखिल अर्जी पर सुनवाई करते हुए चुनाव आयोग को दो टूक  कहा है कि पंजाब के आगामी विधानसभा चुनाव में ड्रग्स का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। 

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हाईकोर्ट ने अर्जी के जरिये ट्राईसिटी में ड्रग्स की बिक्री रोकने और ड्रग रैकेट पर शिकंजा कसने के लिए चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला पुलिस की संयुक्त टीम बनाने की मांग पर हरियाणा, पंजाब और यूटी को नोटिस जारी कर जवाब भी मांगा है। 
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एडवोकट नवकिरण सिंह ने अपनी अर्जी में कहा था कि ट्राईसिटी के कई इलाकों में ड्रग्स और नशीले पदार्थों की खुलेआम बिक्री हो रही है। ड्रग्स की खरीद-फरोख्त के लिए नकद के स्थान पर डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल हो रहा है। इस जानकारी का माध्यम बताते हुए याची ने कहा कि खुद डी-एडिक्शन केंद्र में अपना इलाज करवा रहे लोग लीगल सर्विस अथॉरिटी को यह जानकारी दे चुके हैं। 
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मामले में समाचार पत्रों में प्रकाशित समाचार को आधार बनाकर याची ने अपील की है कि ड्रग रैकेट पर शिकंजा कसने और नशे के तस्करों को गिरफ्तार करने के लिए चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला पुलिस की एक संयुक्त टीम गठित हो, जो एक दूसरे से सभी सूचनाएं साझा करे। 

पेटीएम और मोबाइल नेटवकिंग के जरिये होती है पेमेंट  

EC Court of bluntly, is not used in the choice of drugs
चुनाव - फोटो : file

खंडपीठ ने अर्जी पर सुनवाई करते हुए पंजाब सरकार सहित हरियाणा और चंडीगढ़ को नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है। साथ ही अर्जी पर हाईकोर्ट में पहले से ही चल रहे पंजाब के हजारों करोड़ रुपये के ड्रग रैकेट पर हाईकोर्ट की तरफ से लिए गए संज्ञान के साथ ही 15 फरवरी को सुनवाई किये जाने के निर्देश दिए हैं।

पेटीएम और मोबाइल नेटवकिंग के जरिये होती है पेमेंट  
नवकिरण सिंह ने हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर बताया है कि यह जानकरी पंचकूला के डी-एडिक्शन सेंटर में इलाज करवा रहे नशे के आदी लड़के और लड़कियों ने ही दी है। 

उन्होंने बताया है कि मनीमाजरा, जोलोवाल और पिंजौर बॉर्डर के पास खुलेआम ड्रग्स बेचीं और खरीदी जा रही हैं। इसकी पेमेंट पेटीएम और मोबाइल नेटवकिंग के जरिये की जा रही है। 

याची ने हाईकोर्ट से मांग की है कि जब नशे के तस्करों और ड्रग रैकेट के मामले में डी-एडिक्शन केंद्रों में इलाज करवा रहे लोग काफी अहम जानकारियां दे सकते हैं तो ठीक इसी तरह एनडीपीएस केस में गिरफ्तार किये गए तस्करों से भी महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाई जा सकती हैं। 

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