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Chandigarh News: 15 दिन का शुल्क जमा कर 56 दिन तक कमा लिए पैसे
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चंडीगढ़। चंडीगढ़ में शराब के ठेका लेने के बाद विभाग को नुकसान पहुंचाने का मामला सामने आया है। आरोप है कि 15 दिन का पैसा जमा कर कई लोगों ने 56 दिनों तक दुकान चलाया। अब लाइसेंस शुल्क जमा नहीं किया तो उनकी दुकानों को सील किया जाने लगा है। दरअसल, नियमों के हिसाब से दुकान आवंटित होने के बाद अप्रैल के महीने में 8 फीसदी पैसा देना होता है। उसके बाद मई के महीने में भी पैसे जमा करने होते हैं। इसमें 1.5 से 2.5 फीसदी तक ब्याज भी देना होता है, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। बिना पैसा जमा किए ही ठेकों का संचालन चलता रहा।
चंडीगढ़ वाइन कॉन्ट्रेक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दर्शन सिंह कलेर ने मंगलवार को आरोप लगाया कि विभाग की लापरवाही के कारण ऐसा हुआ है। इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस बार शुरू से कुछ खास लोगों को फायदा देने के लिए ठेकों का आवंटन मानक के खिलाफ किया गया था। उसकी वजह से कुछ लोगों ने यहां शराब महंगी कर दी थी। यहां तक की 120 रुपये में मिलने वाली बीयर की कीमत 200 रुपये कर दी गई।
टेंडर जितना देरी से होगा विभाग का नुकसान बढ़ेगा
इस साल 7 बार टेंडर होने के बाद भी करीब 20 ठेकों की नीलामी नहीं हो पाई है। अब ठेके जितने लेट से नीलाम होंगे विभाग का घाटा उतना बढ़ेगा। अगर अब ठेकों की नीलामी होती है तो 10 महीने के हिसाब से रेट लगेगा। ऐसे में 12 महीने की तुलना में अगर ठेका 10 महीने या 9 महीने के लिए उठता है तो विभाग का नुकसान होना तय है।
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9 जुलाई को अब कोर्ट में होगी सुनवाई
21 मार्च को साल के लिए 97 में से 96 ठेकों का ई-नीलामी की गई। उसमें विरोध हुआ और एक पक्ष कोर्ट में चला गया था। 27 मई को उसमें सुनवाई होनी थी लेकिन अब कोर्ट ने 9 जुलाई का समय दे दिया है। दर्शन सिंह कलेर ने बताया कि कोर्ट में मामले की सुनवाई अब 9 जुलाई को होगी।
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चंडीगढ़ वाइन कॉन्ट्रेक्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष दर्शन सिंह कलेर ने मंगलवार को आरोप लगाया कि विभाग की लापरवाही के कारण ऐसा हुआ है। इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि इस बार शुरू से कुछ खास लोगों को फायदा देने के लिए ठेकों का आवंटन मानक के खिलाफ किया गया था। उसकी वजह से कुछ लोगों ने यहां शराब महंगी कर दी थी। यहां तक की 120 रुपये में मिलने वाली बीयर की कीमत 200 रुपये कर दी गई।
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टेंडर जितना देरी से होगा विभाग का नुकसान बढ़ेगा
इस साल 7 बार टेंडर होने के बाद भी करीब 20 ठेकों की नीलामी नहीं हो पाई है। अब ठेके जितने लेट से नीलाम होंगे विभाग का घाटा उतना बढ़ेगा। अगर अब ठेकों की नीलामी होती है तो 10 महीने के हिसाब से रेट लगेगा। ऐसे में 12 महीने की तुलना में अगर ठेका 10 महीने या 9 महीने के लिए उठता है तो विभाग का नुकसान होना तय है।
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9 जुलाई को अब कोर्ट में होगी सुनवाई
21 मार्च को साल के लिए 97 में से 96 ठेकों का ई-नीलामी की गई। उसमें विरोध हुआ और एक पक्ष कोर्ट में चला गया था। 27 मई को उसमें सुनवाई होनी थी लेकिन अब कोर्ट ने 9 जुलाई का समय दे दिया है। दर्शन सिंह कलेर ने बताया कि कोर्ट में मामले की सुनवाई अब 9 जुलाई को होगी।