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‘इमरजेंसी से ओपीडी घुमाते रहे, डाक्टरों ने नहीं देखा, चली गई जान’

Tue, 19 Apr 2016 10:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Tue, 19 Apr 2016 10:14 AM IST
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due to negligence of doctor in PGI, kidney patient died
पीजीआई में पेशेंट की मौत - फोटो : amar ujala

पीजीआई में इलाज के इंतजार में एक 76 वर्षीय महिला की जान चली गई। शशि ठाकुर किडनी की बीमारी से जूझ रही थीं। रविवार को परिजन उन्हें पीजीआई इमरजेंसी में लेकर आए। डॉक्टरों ने देखने के बाद कहा कि उन्हें इमरजेंसी में दाखिल करने की जरूरत नहीं है। मरीज को न्यू ओपीडी में दिखाना होगा। सोमवार को परिजन सुबह साढ़े सात बजे शशि ठाकुर को लेकर न्यू ओपीडी पहुंचे।

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कार्ड बनवाने के बाद वे नेफ्रोलाजी की ओपीडी के बाहर दोपहर तक खड़े रहे, लेकिन डॉक्टर देखने नहीं आए। बाद में उनकी तबीयत खराब हो गई। डॉक्टर व परिजन उन्हें लेकर इमरजेंसी पहुंचे, लेकिन तब तक शशि ठाकुर ने दम तोड़ दिया। पीजीआई के इस व्यवहार से शशि के परिजन काफी निराश व आहत थे। उनका कहना था कि यदि डॉक्टर समय पर देख लेते तो उनकी जान बच जाती।
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 शशि ठाकुर के बेटे राजेश ने बताया कि वे मूल रूप से शिमला के पास स्थित कंजौली के रहने वाले हैं। शुगर होने के कारण उनकी मां की किडनी डैमेज हो रही थी। एक साल से वह मनीमाजरा में अपनी बेटी के साथ रह रही थीं और उनका इलाज सेक्टर-44 स्थित एक प्राइवेट क्लीनिक में चल रहा था। पिछले हफ्ते उनकी तबीयत बिगड़ने पर डॉक्टर ने उन्हें पीजीआई रेफर कर दिया। रविवार को इमरजेंसी में लेकर आए, लेकिन उन्हें एडमिट करने के बजाय ओपीडी रेफर कर दिया गया।
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हालत खराब होने का हवाला दिया, फिर भी नहीं देखा
राजेश ने बताया कि वे सुबह साढ़े सात अपने पेशेंट के साथ पहुंच गए थे। पहले उन्होंने मेडिसिन का कार्ड बनवाया। फिर नेफ्रोलाजी की ओपीडी का कार्ड। 10.45 बजे वह ओपीडी के तीसरे फ्लोर पर पहुंच गईं और ओपीडी के बाहर खड़े हो गए। कई बार उन्होंने डॉक्टर और ओपीडी के कर्मचारियों से आग्रह किया, लेकिन उनकी नहीं सुनी गई। बीच में उनकी सांस भी उखड़ गई, लेकिन इसके बावजूद डॉक्टर उन्हें देखने नहीं आए। 

पीजीआई के रवैये से शशि ठाकुर के परिजन आहत

due to negligence of doctor in PGI, kidney patient died
पीजीआई चंडीगढ़

डाक्टरों पर अभद्र व्यवहार करने का आरोप
कई बार गुहार लगाने के बावजूद डॉक्टर जब उन्हें देखने नहीं आए तो परिजन भड़क गए। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर और कर्मचारी उन पर ही गुस्सा निकालने लगे। कर्मचारियों ने परिजनों को धक्के मारे और उन्हें बाहर जाने को कहा। दूसरी तरफ उनकी मां की तबीयत बिगड़ने लगी। बाद में नेफ्रोलाजी के एचओडी केएल गुप्ता ने ओटी में उनकी मां को देखा, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। उन्हें सांस नहीं आ रही थी। बाद में उन्हें इमरजेंसी रेफर कर दिया गया, लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

मरना मंजूर है, लेकिन पीजीआई नहीं आऊंगा
पीजीआई के रवैये से शशि ठाकुर के परिजन इतने आहत हुए कि उन्होंने अब पीजीआई न आने का फैसला लिया है। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि मरना मंजूर है, लेकिन पीजीआई नहीं आऊंगा। यदि किसी मरीज को दिखाना होगा तो वे शिमला में ही दिखा देंगे।

तीन बार पेशेंट को बुलाया था
न्यू ओपीडी में मौजूद सीनियर डॉक्टर ने बताया कि उन्होंने तीन बार पेशेंट को बुलाया, लेकिन वे नहीं आए। सोमवार को ओपीडी में बहुत भीड़ थी। उन्होंने डॉक्टर के साथ भी अभद्र व्यवहार किया। हाथापाई पर उतर आए थे। जिस डॉक्टर के साथ उन्होंने अभद्र व्यवहार किया है, वह अब भी सदमे में हैं।

डॉ. विपिन कौशल, डिप्टी मेडिकल सुपरिंटेंडेंट, पीजीआई ने बताया कि हमें इस बारे में कोई शिकायत नहीं मिली है। यदि शिकायत आती है तो जांच जरूर की जाएगी।

राजेश ठाकुर, शशि ठाकुर के बेटे ने बताया कि मां की मौत होने के बाद हम लोग सदमे में हैं। अभी शिकायत नहीं दी है। हमें शिमला भी निकलना था। इसलिए हमने रिश्तेदार से कहा कि वे डॉक्टरों के खिलाफ शिकायत दें।

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