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खून की कमी से सर्जरी टालने की आ रही नौबत, रक्तदाता की तलाश में भटक रहे परिजन
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चंडीगढ़। एक तरफ कोरोना वायरस और दूसरी तरफ बढ़ती गर्मी के कारण रक्तदाताओं की संख्या तेजी से कम हो रही है। ऐसे में अस्पतालों में ट्रॉमा व इमरजेंसी के मरीजों की सर्जरी प्रभावित होने लगी है। आलम यह है कि रेयर ब्लड ग्रुप वाले मरीजों के लिए अस्पतालों के ब्लड बैंक में खून उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। इस कारण मरीजों के परिजन रक्तदान शिविर आयोजित करने वाली संस्थाओं से आग्रह कर रहे हैं।
पीजीआई ब्लड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. रतिराम शर्मा का कहना है कि खून की कमी से जूझ रहे मरीजों के साथ ही ट्रामा व इमरजेंसी में आने वाले मरीजों की जान बचाने के लिए रक्तदान बेहद जरूरी है। खून की कमी को देखते हुए उन्होंने ज्यादा से ज्यादा संख्या में युवाओं से रक्तदान करने की अपील की।
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हजारों मरीजों की सर्जरी पेंडिंग
कोरोना के कारण अस्पतालों की ओपीडी व सर्जरी बंद होने से लाखों मरीज इलाज के इंतजार में है। संक्रमण दर कम होने पर ओपीडी के साथ ऑपरेशन थिएटर भी खुलने की उम्मीद जताई जा रही है, जिसके बाद उन हजारों मरीजों की सर्जरी शुरू करने की तैयारी होगी। ऐसे में अस्पतालों के ब्लड बैंक में खून की कमी होने पर उन सर्जरी पर खतरा मंडराने लगेगा। ऐसी स्थिति से बचाव के लिए संस्थाएं युवाओं को ज्यादा से ज्यादा संख्या में रक्तदान करने के लिए जागरूक कर रही हैं।
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गर्मी के साथ टीकाकरण भी बना कारण
रक्तदान आयोजित करने वाली संस्थाओं का कहना है कि गर्मी के कारण हर साल इस समय रक्तदाताओं की संख्या आधे से भी कम हो जाती है। ऐसे में इस बार कोरोना वायरस से बचाव के लिए चल रहे टीकाकरण अभियान का भी असर पड़ रहा है। टीका लगवाने के बाद मानक के अनुसार लोग एक से डेढ़ महीने तक रक्तदान करने नहीं आ रहे। इससे रक्तदाताओं की संख्या में और भी कम हो गई है। ऐसे में संस्थाएं युवाओं से रक्तदान करने के बाद ही टीका लगवाने की अपील कर रही हैं।
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पीजीआई ब्लड ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. रतिराम शर्मा का कहना है कि खून की कमी से जूझ रहे मरीजों के साथ ही ट्रामा व इमरजेंसी में आने वाले मरीजों की जान बचाने के लिए रक्तदान बेहद जरूरी है। खून की कमी को देखते हुए उन्होंने ज्यादा से ज्यादा संख्या में युवाओं से रक्तदान करने की अपील की।
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हजारों मरीजों की सर्जरी पेंडिंग
कोरोना के कारण अस्पतालों की ओपीडी व सर्जरी बंद होने से लाखों मरीज इलाज के इंतजार में है। संक्रमण दर कम होने पर ओपीडी के साथ ऑपरेशन थिएटर भी खुलने की उम्मीद जताई जा रही है, जिसके बाद उन हजारों मरीजों की सर्जरी शुरू करने की तैयारी होगी। ऐसे में अस्पतालों के ब्लड बैंक में खून की कमी होने पर उन सर्जरी पर खतरा मंडराने लगेगा। ऐसी स्थिति से बचाव के लिए संस्थाएं युवाओं को ज्यादा से ज्यादा संख्या में रक्तदान करने के लिए जागरूक कर रही हैं।
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गर्मी के साथ टीकाकरण भी बना कारण
रक्तदान आयोजित करने वाली संस्थाओं का कहना है कि गर्मी के कारण हर साल इस समय रक्तदाताओं की संख्या आधे से भी कम हो जाती है। ऐसे में इस बार कोरोना वायरस से बचाव के लिए चल रहे टीकाकरण अभियान का भी असर पड़ रहा है। टीका लगवाने के बाद मानक के अनुसार लोग एक से डेढ़ महीने तक रक्तदान करने नहीं आ रहे। इससे रक्तदाताओं की संख्या में और भी कम हो गई है। ऐसे में संस्थाएं युवाओं से रक्तदान करने के बाद ही टीका लगवाने की अपील कर रही हैं।