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बड़ा सचः खेप जारी करने को डाले गए दबाव ने कराया 2700 करोड़ की ड्रग्स का खुलासा, व्यापार ठप

Mon, 01 Jul 2019 10:11 AM IST
खुशबू गोयल अशोक नीर, अमर उजाला, अमृतसर (पंजाब)
अशोक नीर, अमर उजाला, अमृतसर (पंजाब) Published by: खुशबू गोयल Updated Mon, 01 Jul 2019 10:11 AM IST
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drugs smuggling worth rs 2700 crore from pakistan case exposed due to pressure on custom department
नशे की तस्करी - फोटो : अमर उजाला
पाकिस्तान से आई 2700 करोड़ की ड्रग्स के मामले का खुलासा तब हुआ, जब खेप जारी करने के लिए कस्टम विभाग पर दबाव डाला गया। गुरुनगरी के हुसैनपुरा क्षेत्र में कनिष्क इंटरप्राइजेज के नाम से पाकिस्तान से आयात-निर्यात का कारोबार करने वाले गुरपिंदर सिंह ने पाकिस्तान से मंगवाई गई नमक की खेप जारी करने के लिए कस्टम विभाग पर दबाव डाला थ। इसी दबाव की वजह से मामले का खुलासा हो गया।
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गुरपिंदर सिंह के हावभाव देख कर कस्टम विभाग को शक हुआ। इसके बाद कस्टम विभाग के अफसरों की टीम ने खुले में पड़ी इस खेप की एक-एक बोरी को खंगाला और अब तक की सबसे बड़ी नशीले पदार्थों की खेप बरामद कर ली। भारत सरकार द्वारा पाकिस्तान से आयात किए जाने वाले कुछ सामान पर 200 फीसदी कस्टम ड्यूटी तक लगाई गई है। नमक भी इसी सूची में शामिल है, वहीं पाकिस्तान के साथ इस समय आयात-निर्यात का कारोबार लगभग ठप है।
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कभी पाकिस्तान के साथ कारोबार के तहत 150 से 200 ट्रक भारत आते थे। इन दिनों यह कारोबार 10 से 15 ट्रक तक सिमट गया है। 26 जून को भी पाकिस्तान से मात्र 13 ट्रक आए थे। गुरपिंदर के श्रीनगर के हंदवाड़ा निवासी व्यापारी तारिक एहमद से व्यापारिक संबंध कब बने? क्या गुरपिंदर तारिक के कहने पर नमक की खेप मंगवा रहा था? क्या गुरपिंदर के साथ इस व्यापार में कुछ और लोग भी शामिल हैं? कस्टम विभाग के अफसरों को ऐसे कई सवालों के जवाबों की तलाश है।
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ट्रक ड्राइवरों की महत्वपूर्ण भूमिका

भारत-पाकिस्तान के बीच होने वाले व्यापार में दोनों देशों के ट्रक ड्राइवरों की महत्वपूर्ण भूमिका है। पाकिस्तान के अलग-अलग भागों से आने वाले ट्रक ड्राइवर अपना ट्रक पाकिस्तान वाघा में स्थित आईसीपी में खड़ा कर देते हैं। इन ड्राइवरों के पास भारत आने के लिए इंटरनेशनल ड्राइविंग लाइसेंस नहीं होता।

यही कारण है कि पाकिस्तान की तरफ वाघा बॉर्डर से उन ड्राइवरों को ट्रक भारत ले जाने की अनुमति दी जाती है, जिनके पास नियम अनुसार लाइसेंस होता है। इसके बदले में इन ड्राइवरों को एक हजार से दो हजार के बीच पैसे मिलते हैं। ट्रक ड्राइवर भी इस बात से अनभिज्ञ होते हैं कि जो ट्रक वह सीमा पर ले जा रहे हैं, उसमें क्या है या उसमें कहीं नशीले पदार्थ तो नहीं।

कस्टम विभाग के ज्वाइंट कमिश्नर डॉ. अरविंद ने बताया कि एक बेगुनाह को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता। जब तक पाकिस्तान से आई खेप की जांच के बाद उसमें नशीले पदार्थ बरामद होते हैं, तब तक ड्राइवर लौट जाता है।

 
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