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सवा दो लाख की दवा का विवाद ः दूसरे दिन भी मरीज बिना दवा के वापस लौटा
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चंडीगढ़। महिला कैंसर मरीज की सवा दो लाख रुपये की दवा नर्स से खराब होने के मामले में शुक्रवार को भी मरीज व उसके अटेंडेंट को मायूस होकर वापस घर लौटना पड़ा। विवाद के एक दिन बीत जाने के बाद भी पीजीआई का मेडिकल सुपरिंटेंडेंट का दफ्तर इस विवाद का निपटारा नहीं कर सका। परेशान होकर मरीज के अटेंडेंट को पीजीआई डायरेक्टर के पास शिकायत देनी पड़ी है। पीड़ित मरीज के अटेंडेंट का कहना है कि पहले तो पीजीआई के अधिकारी कह रहे थे, उन्हें दवा मुहैया करवा दी जाएगी, लेकिन अब वह मुकरने लगे हैं।
उनका कहना है कि उन्हें कार्रवाई से कोई मतलब नहीं। उन्हें तो सिर्फ दवा से मतलब है। मरीज को दवा समय पर लग जाए। क्योंकि मरीज को पिछली कीमो 17 जुलाई को लगी थी, अगली कीमो 24 जुलाई को लग जानी चाहिए थी। 24 को मरीज आया था, लेकिन डे केयर सेंटर वालों ने मरीज को 25 जुलाई को आने को बोल दिया। 25 को मरीज आया तो उसके साथ यह घटना घट गई। दवा यहां नहीं मिलती। उसे दिल्ली से मंगवानी पड़ती है। दवा दस दिन के भीतर लग जानी चाहिए थी। यदि समय पर नहीं लगी तो मरीज को दिक्कत आनी शुरू हो जाएगी।
दवा नहीं दी तो नर्स के खिलाफ होगी कार्रवाई
पीजीआई के सूत्रों का कहना है कि मरीज की दवा नर्स की वजह से खराब हुई है तो इसका सीधे जिम्मेदार नर्स ही है। यदि नर्स ने मरीज की दवा का इंतजाम नहीं किया तो मरीज की शिकायत के आधार पर पीजीआई नर्स के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। हालांकि ,जिस दिन यह विवाद हुआ था, उसी दिन पीजीआई के कुछ अधिकारियों ने मरीज को आश्वासन दिया था कि उन्हें दवा पीजीआई की ओर से मुहैया करवा दी जाएगी, लेकिन पीजीआई के आला अधिकारियों ने इस पर सख्त एतराज जताया। उनकी दलील थी कि पीजीआई के पास जो भी रुपया है, वह जनता का है। नर्स की गलती के खामियाजा का जनता के रुपयों से क्यों भरपाई की जाए। जिसने गलती की है, भरपाई भी उसी को करनी होगी। उसके बाद पीजीआई के डिप्टी एमएस व एक्टिंग एमएस ने अपना हाथ पीछे खींच लिया और मरीज से कहा कि वह नर्स के खिलाफ डायरेक्टर को शिकायत दें।
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यह हुआ था मामला
चंडीगढ़ निवासी मरीज रंजनी कौशल के बेटे नितिन ने बताया कि उसकी मां को पेट का कैंसर है। कैंसर की रोकथाम के लिए क्रिमजा दवा का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसकी कीमत बाजार में सवा दो लाख रुपये है। वीरवार को उनकी मां को कीमो लगनी थी। वह कीमो के साथ न्यू ओपीडी के डे केयर सेंटर पहुंचे। करीब 11 बजे डे केयर सेंटर में मौजूद नर्स बबीता ने कीमो चढ़ाने के लिए दवाई ली और उसे डेक्सट्रास में डाल दी, जबकि यह दवा नार्मल एनएस सॉल्यूशन में डालकर चढ़ानी थी। बबीता ने गलती से डेक्सट्रास (ग्लूकोज के मॉलिक्यूलर फार्मूला) में डाल दी। इससे दवा खराब हो गई। वह किसी काम की नहीं रही। पहले तो कहा गया कि नर्स की ओर से दवा का इंतजाम कराया जाएगा, लेकिन बाद में वह मुकर गई। पीजीआई के अधिकारियों ने भी हस्तक्षेप किया, लेकिन कोई साल्यूशन नहीं मिल पाया।
कोट
मरीज के अटेंडेंट की ओर से शिकायत मिली है। पेशेंट हित को ध्यान में रखकर ही अगले दो दिन के भीतर इस मसले को सुलझा लिया जाएगा।
-प्रो. जगतराम, डायरेक्टर पीजीआई चंडीगढ़
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उनका कहना है कि उन्हें कार्रवाई से कोई मतलब नहीं। उन्हें तो सिर्फ दवा से मतलब है। मरीज को दवा समय पर लग जाए। क्योंकि मरीज को पिछली कीमो 17 जुलाई को लगी थी, अगली कीमो 24 जुलाई को लग जानी चाहिए थी। 24 को मरीज आया था, लेकिन डे केयर सेंटर वालों ने मरीज को 25 जुलाई को आने को बोल दिया। 25 को मरीज आया तो उसके साथ यह घटना घट गई। दवा यहां नहीं मिलती। उसे दिल्ली से मंगवानी पड़ती है। दवा दस दिन के भीतर लग जानी चाहिए थी। यदि समय पर नहीं लगी तो मरीज को दिक्कत आनी शुरू हो जाएगी।
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दवा नहीं दी तो नर्स के खिलाफ होगी कार्रवाई
पीजीआई के सूत्रों का कहना है कि मरीज की दवा नर्स की वजह से खराब हुई है तो इसका सीधे जिम्मेदार नर्स ही है। यदि नर्स ने मरीज की दवा का इंतजाम नहीं किया तो मरीज की शिकायत के आधार पर पीजीआई नर्स के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। हालांकि ,जिस दिन यह विवाद हुआ था, उसी दिन पीजीआई के कुछ अधिकारियों ने मरीज को आश्वासन दिया था कि उन्हें दवा पीजीआई की ओर से मुहैया करवा दी जाएगी, लेकिन पीजीआई के आला अधिकारियों ने इस पर सख्त एतराज जताया। उनकी दलील थी कि पीजीआई के पास जो भी रुपया है, वह जनता का है। नर्स की गलती के खामियाजा का जनता के रुपयों से क्यों भरपाई की जाए। जिसने गलती की है, भरपाई भी उसी को करनी होगी। उसके बाद पीजीआई के डिप्टी एमएस व एक्टिंग एमएस ने अपना हाथ पीछे खींच लिया और मरीज से कहा कि वह नर्स के खिलाफ डायरेक्टर को शिकायत दें।
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यह हुआ था मामला
चंडीगढ़ निवासी मरीज रंजनी कौशल के बेटे नितिन ने बताया कि उसकी मां को पेट का कैंसर है। कैंसर की रोकथाम के लिए क्रिमजा दवा का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसकी कीमत बाजार में सवा दो लाख रुपये है। वीरवार को उनकी मां को कीमो लगनी थी। वह कीमो के साथ न्यू ओपीडी के डे केयर सेंटर पहुंचे। करीब 11 बजे डे केयर सेंटर में मौजूद नर्स बबीता ने कीमो चढ़ाने के लिए दवाई ली और उसे डेक्सट्रास में डाल दी, जबकि यह दवा नार्मल एनएस सॉल्यूशन में डालकर चढ़ानी थी। बबीता ने गलती से डेक्सट्रास (ग्लूकोज के मॉलिक्यूलर फार्मूला) में डाल दी। इससे दवा खराब हो गई। वह किसी काम की नहीं रही। पहले तो कहा गया कि नर्स की ओर से दवा का इंतजाम कराया जाएगा, लेकिन बाद में वह मुकर गई। पीजीआई के अधिकारियों ने भी हस्तक्षेप किया, लेकिन कोई साल्यूशन नहीं मिल पाया।
कोट
मरीज के अटेंडेंट की ओर से शिकायत मिली है। पेशेंट हित को ध्यान में रखकर ही अगले दो दिन के भीतर इस मसले को सुलझा लिया जाएगा।
-प्रो. जगतराम, डायरेक्टर पीजीआई चंडीगढ़