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एक नशा मुक्ति केंद्र, जहां नशेड़ी युवतियों पर चौंकाने वाला खुलासा
ब्यूरो/अमर उजाला, बरनाला(लुधियाना)
Updated Tue, 28 Jun 2016 09:38 AM IST
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लड़कियों में नशे की लत
- फोटो : डेमो फोटो
पंजाब में नशा करने वालों में युवा ही नहीं, युवतियां भी आगे हैं। नशा मुक्ति केंद्र के आंकड़े इसकी पुष्टि करते हैं। नशा मुक्ति केंद्र बरनाला से मिली जानकारी के अनुसार हर माह 50 के करीब युवा नशा छोड़ने के लिए नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती होने आते हैं। केंद्र में सिर्फ 10 बेड होने के कारण उन्हें दवा देकर वापस भेज दिया जाता है। इससे मरीजों को परेशानी हो रही है।
नशा मुक्ति केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक पिछले एक माह में 16 से 24 साल के 30 युवक स्मैक और 20 हेरोइन की लत के चलते वहां पहुंचे। वहीं केंद्र में हर माह 20 के करीब लड़कियां भी नशा छोड़ने पहुंचती हैं। अस्पताल में लड़कियों को दाखिल करने के लिए जगह न होने के कारण उन्हें नशा छोड़ने की दवा देकर घर वापस भेज दिया जाता है।
डीजीपी सुरेश अरोड़ा ने राज्य के जिलों के तमाम जिला पुलिस मुखियों को आदेश दिए हुए हैं कि नशे के आदी लोगों की पहचान कर उनका मुफ्त इलाज करवाया जाए लेकिन बरनाला पुलिस की कार्यप्रणाली निराशाजनक है। अब तक एक भी व्यक्ति को इलाज के लिए दाखिल नहीं करवाया गया। अब तक जितने भी मरीज नशा छोड़ने आए वह खुद ही केंद्र में पहुंचे हैं। इसके अलावा न ही अब तक पुलिस ने किसी नशा तस्कर को ही पकड़ा है।
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नशा मुक्ति केंद्र के आंकड़ों के मुताबिक पिछले एक माह में 16 से 24 साल के 30 युवक स्मैक और 20 हेरोइन की लत के चलते वहां पहुंचे। वहीं केंद्र में हर माह 20 के करीब लड़कियां भी नशा छोड़ने पहुंचती हैं। अस्पताल में लड़कियों को दाखिल करने के लिए जगह न होने के कारण उन्हें नशा छोड़ने की दवा देकर घर वापस भेज दिया जाता है।
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डीजीपी सुरेश अरोड़ा ने राज्य के जिलों के तमाम जिला पुलिस मुखियों को आदेश दिए हुए हैं कि नशे के आदी लोगों की पहचान कर उनका मुफ्त इलाज करवाया जाए लेकिन बरनाला पुलिस की कार्यप्रणाली निराशाजनक है। अब तक एक भी व्यक्ति को इलाज के लिए दाखिल नहीं करवाया गया। अब तक जितने भी मरीज नशा छोड़ने आए वह खुद ही केंद्र में पहुंचे हैं। इसके अलावा न ही अब तक पुलिस ने किसी नशा तस्कर को ही पकड़ा है।
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एक जैसा नशा करते हैं लड़के और लड़कियां
लड़कियों में नशे की लत
- फोटो : डेमो फोटो
नशा मुक्ति केंद्र के मनोरोग विशेषज्ञ डॉक्टर प्रवेश कुमार ने बताया कि हर माह 300 मरीज उनके पास दवा लेने पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि लड़के और लड़कियां एक जैसा ही नशा करते हैं। वह ज्यादातर स्मैक व हेरोइन लेते हैं। इनकी उम्र 16 से 25 साल के बीच होती है। वहीं शराब के आदी बन चुके मरीजों की उम्र 30 से 40 साल के बीच होती है।
उन्होंने बताया कि हर माह 15 से 20 लड़कियां भी नशा छोड़ने के लिए पहुंचती हैं। उनकी उम्र 20 से 30 साल के बीच में होती है। जिला पुलिस मुखी गुरप्रीत सिंह तूर का कहना है कि लोगों को नशे के कुप्रभावों के प्रति जागरूक करने के लिए पुलिस की ओर से गांवों में समय-समय पर सेमिनार लगाए जा रहे हैं। साथ ही नशा विरोधी नाटक दिखाए जा रहे हैं। इसके अलावा पुलिस नशा तस्करों की पहचान भी कर रही है।
उन्होंने बताया कि हर माह 15 से 20 लड़कियां भी नशा छोड़ने के लिए पहुंचती हैं। उनकी उम्र 20 से 30 साल के बीच में होती है। जिला पुलिस मुखी गुरप्रीत सिंह तूर का कहना है कि लोगों को नशे के कुप्रभावों के प्रति जागरूक करने के लिए पुलिस की ओर से गांवों में समय-समय पर सेमिनार लगाए जा रहे हैं। साथ ही नशा विरोधी नाटक दिखाए जा रहे हैं। इसके अलावा पुलिस नशा तस्करों की पहचान भी कर रही है।