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पंजाब यूनिवर्सिटी का निगरानी तंत्र होगा हाईटेक, ड्रोन पॉलिसी को केंद्र सरकार से मिली मंजूरी

Wed, 05 Dec 2018 03:46 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Wed, 05 Dec 2018 03:46 PM IST
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Drone will be Use for Punjab University Chandigarh Security
पंजाब यूनिवर्सिटी - फोटो : amar ujala
पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ का निगरानी तंत्र और मजबूत होगा। केंद्र सरकार ने इसके लिए ड्रोन पॉलिसी को मंजूरी दे दी है। इस पॉलिसी के संचार के लिए 5जी सेवा की जरूरत है। यह आगामी तीन से चार साल में लागू हो जाएगी। इस पूरे सिस्टम के लिए पंजाब विश्वविद्यालय के यूआईईटी के छह प्रोफेसर निगरानी तंत्र विकसित करेंगे। इसके लिए केंद्र सरकार ने 2.24 करोड़ रुपये जारी किए हैं। यह प्रोजेक्ट तीन साल का है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय भविष्य की नेटवर्क सेवा 5जी की संभावनाएं तलाश रहा है। सरकार उस पर काम कर रही है।
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सरकार ने अधिक पहुंच के साथ बेहतर सेवा देने का लक्ष्य रखा है। इसमें प्रोफेसर सरबजीत सिंह, प्रो. हरीश कुमार, प्रो. साक्षी कौशल, डॉ. आकाशदीप, डॉ. अरुण कुमार और डॉ. नरेश कुमार शामिल हैं। यह नया प्रोजेक्ट स्मार्ट सिटी मिशन को पूरा करने में मदद करेगा। साथ ही भारत की विशिष्ट चुनौतियों को भी हल करेगा। यातायात विश्लेषण, विभिन्न बीमारियों के लिए प्रजनन क्षेत्रों की निगरानी व पहचान इस प्रोजेक्ट के जरिये हो सकेगी। मालूम हो कि यूआईईटी केशिक्षक इस क्षेत्र में पहले से ही काम कर रहे हैं। भारत सरकार ने जिन शिक्षकों का निगरानी तंत्र केलिए चयन किया है उनका लंबा अनुभव है।
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कई रिसर्च उनके प्रकाशित हुए हैं। देश-दुनिया में उनका नाम है। मालूम हो कि पिछले तीन माह में पीयू को भारत सरकार ने कई महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट सौंपे हैं। इनमें एंथ्रोपोलॉजी, फार्मास्युटिकल, परमाणु विभाग आदि को प्रोजेक्ट दिए गए हैं।
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क्यों पड़ी ड्रोन पॉलिसी की जरूरत
देश में मॉब लिंचिंग आदि की घटनाएं बढ़ी हैं। घुसपैठियों ने भी सेंध लगाने की कोशिश की है। अवैध खनन भी कई क्षेत्रों में हो रहा है। इन सब की निगरानी ड्रोन पॉलिसी से की जा सकती है। ड्रोन से इन घटनाओं का पहले ही पता लगाया जा सकता है। इसके लिए सरकार को एक निगरानी तंत्र की जरूरत है। पीयू ने इसके लिए छह प्रोफेसर्स का चुनाव किया है।


यूआईईटी के प्रोफेसर्स को बधाई। इस प्रोजेक्ट पर काम करके वह सफलता हासिल करेंगे। इससे पीयू का नाम देश-दुनिया में रोशन होगा। पीयू के रिसर्च की दुनियाभर में चर्चा होती है। रिसर्च में यहां गहराई व गुणवत्ता अधिक दिखाई देती है।
- प्रो. राजकुमार, वाइस चांसलर, पीयू
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