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डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला पर टिप्पणी मामले में चालक को बड़ी राहत, बर्खास्तगी आदेश वापस
Sat, 09 Jan 2021 12:22 AM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Sat, 09 Jan 2021 12:22 AM IST
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पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट
- फोटो : amar ujala
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सोशल मीडिया पर हरियाणा के उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला पर टिप्पणी करने के आरोप में बर्खास्त चालक को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हांसी तहसीलदार के चालक पन्ना लाल के बर्खास्तगी आदेश सरकार ने वापस ले लिए हैं। पन्ना लाल की याचिका पर सुनवाई के दौरान शुक्रवार को वित्तायुक्त संजीव कौशल हाईकोर्ट में बेंच के सामने पेश हुए।
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कौशल ने कोर्ट को बताया कि चालक के बर्खास्तगी आदेश वापस ले लिए हैं। इस पर याची के वकील अनिल मेहता ने आशंका जताई कि सेवा में वापस लेने के बाद उनके खिलाफ राजनीतिक भावना से जांच कर कार्रवाई की जा सकती है। इसलिए अगर कोई जांच होती है तो हिसार जिले से बाहर हो। इस पर हाईकोर्ट के जस्टिस अनिल खेत्रपाल ने कहा कि अभी यह केवल आशंका है, अगर ऐसा कुछ होता है तो याची दोबारा हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दे सकता है।
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इससे पहले एसडीएम हांसी की तरफ से जवाब दायर कर कहा गया था कि पन्ना लाल की नियुक्ति एक वर्ष के लिए 23 मई 2018 को आउटसोर्सिंग के जरिए अनुबंध पर की गई थी। जिसकी अवधि बाद में बढ़ाते हुए 25 जुलाई 2020 तक कर दिया गया। ऐसे में वह अपनी बर्खास्तगी के आदेशों को कैसे चुनौती दे सकता है, क्योंकि जब उसके अनुबंध की अवधि ही समाप्त हो चुकी है। इस कार्यकाल में उसका काम संतोषजनक भी नहीं था। उसके बाद फेसबुक पर उपमुख्यमंत्री पर टिप्पणी करना सेवा में रहते बिलकुल सही नहीं है, यह प्रोफेशनल मिसकंडक्ट है। जिसकी जांच के बाद उसे बर्खास्त किए जाने के आदेश जारी कर दिए थे ।
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पन्ना लाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर 15 दिसंबर को जारी उस आदेश को रद्द करने की मांग की थी जिसके तहत उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया था। याचिका में पन्ना लाल ने बताया कि वह आउटसोर्सिंग पॉलिसी के तहत चालक के पद पर कार्यरत था। जिस पोस्ट को आधार बनाकर उसे नौकरी से निकाला गया, वह दुष्यंत चौटाला के उपमुख्यमंत्री बनने से पहले की पोस्ट है।
उसे कोई नोटिस दिए बगैर व बिना जांच के सीधे आदेश जारी कर बर्खास्त कर दिया गया। पन्ना लाल ने हाईकोर्ट से आग्रह किया था कि उसके बर्खास्तगी के आदेश पर रोक लगा कर उसे बहाल किया जाए। हाईकोर्ट ने याचिका पर सरकार को नोटिस जारी कर पूछा था कि क्यों न सरकार के इस आदेश पर रोक लगा दी जाए।