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चंडीगढ़ में तेजी से घट रहा पीने के पानी का लेवल
योगेंद्र त्रिपाठी/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Mon, 18 Jan 2016 04:24 PM IST
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चंडीगढ़ में शैलो वाटर लेवल तेजी से बढ़ रहा है, वहीं पीने के पानी के लिए इस्तेमाल होने वाले डीप वाटर का लेवल लगातार गिर रहा है। चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से 200 मीटर से भी ज्यादा नीचे से पानी निकाला जा रहा है।
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देश में केवल चंडीगढ़ ऐसा प्रदेश है जहां ऊपरी सतह के पानी का इस्तेमाल का प्रतिशत 70 मीटर तक मिलने वाले शैलो वाटर का है। पिछले साल जून में चंडीगढ़ प्रशासन की ओर से बैठक आयोजित की गई, लेकिन इसके बाद भी ऊपरी सतह के पानी का इस्तेमाल के लिए कोई पुख्ता प्लान नहीं तैयार किया जा सका है।
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शैलो वाटर का लेबल शहर में पहले की तुलना मे बढ़ा है, जो ठीक नहीं है। बुडै़ल इलाके में 1990 में शैलो वाटर का लेवल 3 मीटर नीचे था जो 2015 में 2.5 मीटर रह गया है। सेक्टर 31 डी में 1982 में शैलो वाटर का लेबल 12 मीटर थो जो 2015 में बढ़कर 11 मीटर तक पहुंच गया है। इसके अलावा राम दरबार, मनी माजरा,हल्लो माजरा, सुखना लेक के आस पास का इलाके में शैलो वाटर का स्तर बढ़ता जा रहा है जो वहां के लोगों के लिए मुश्किल पैदा कर रहा है।
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डीप वाटर का लेवल घटा
शहर में डीप वाटर का लेबल लगातार घटता जा रहा है। इसके बाद भी इस ओर चंडीगढ़ प्रशासन और नगर निगम की ओर से कोई भी पुख्ता कदम नहीं उठाए गए हैं। सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड नार्थ वेस्टर्न रीजन की रिपोर्ट में बताया गया है कि डीप वाटर लेबल में लगातार गिरावट आती जा रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक चंडीगढ़ के सेक्टर -10 सी में साल 2000 में डीप वाटर पहले 18 मीटर पर उपलब्ध था, 2015 में यह घटकर 27 मीटर नीचे चला गया हैं। सेक्टर 46 ए में 2002 में वाटर लेवल 45 मीटर था जो 2015 में 57 मीटर नीचे चला गया है। सेक्टर 21 डी में साल 2000 में वाटर लेबल 10 मीटर नीचे था जो साल 2010 में 15 मीटर, सेक्टर 12 डी में 2000 में 18 मीटर नीचे था जो 2015 में 36 मीटर नीचे पहुंच गया है।
क्या है शैलो वाटर
ऊपरी लेवल के पानी को उथला या शैलो पानी कहा जाता है। इसमें रसायन की मात्रा अधिक होने के कारण पीने लायक नहीं होता, लेकिन अन्य कामों के लिए इसका इस्तेमाल किया जा सकता है।
डा. पीके नाइक, सुपरिंटेंडिंग हाइड्रोलॉजिस्ट, सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड ने बताया कि चंडीगढ़ में अगर डीप वाटर का इस्तेमाल इसी तरह होता रहा तो आने वाले समय में लोगों को बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ेगा। शहर का डीप वाटर लेबल लगातार नीचे जा रहा है जो चिंताजनक है।