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अपराजिताः सात महीने से कोविड अस्पताल में संक्रमण नियंत्रण के लिए जी जान से जुटी हैं डॉ. मनीषा

अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Wed, 30 Sep 2020 03:45 PM IST
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डॉ. मनीषा
डॉ. मनीषा - फोटो : अमर उजाला

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चंडीगढ़ पीजीआई के मेडिकल माइक्रोबायोलॉजी की डॉ. मनीषा बिसवाल कोरोना महामारी के इस दौर में बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा रही हैं। पीजीआई प्रशासन ने उन्हें इंफेक्शन कंट्रोल कमेटी का नोडल अफसर बनाया है। इसके तहत कोरोना से बचाव के लिए दिशा-निर्देश बनाने से लेकर उसके क्रियान्वयन की शत प्रतिशत जिम्मेदारी उन पर है।
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फरवरी से ही उन्होंने संक्रमण से बचाव संबंधी दिशा-निर्देश बनाने से लेकर उससे जुड़ी सभी सामग्री की सूची तैयार करने, उसकी खरीद, उन सामग्रियों के प्रयोग से जुड़ी ट्रेनिंग की तैयारी कर ली थी। मौजूदा समय में डॉ. मनीषा और उनकी टीम ने पीजीआई के पांच हजार स्टाफ को इंफेक्शन कंट्रोल संबंधी ट्रेनिंग दे दी है। इसके बल पर ही डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ संक्रमण से सुरक्षित रहते हुए मरीजों का सफलतापूर्वक इलाज कर रहे हैं।


पर्दे के पीछे से निभा रही अहम भूमिका
कोरोना संक्रमित मरीजों का इलाज करने की बजाय डॉ. मनीषा पर्दे के पीछे से अहम भूमिका निभा रही हैं। कोविड अस्पताल से लेकर पीजीआई के कोने-कोने को संक्रमण से बचाने में इनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। डॉ. मनीषा द्वारा संक्रमण नियंत्रण के लिए तैयार किए दिशा-निर्देशों का उपयोग करके पीजीआई सफलतापूर्वक कोरोना संक्रमित मरीजों के साथ ही अन्य मरीजों का इलाज करके उन्हें जीवनदान दे रही है।

कैंसर पीड़ित पिता से भी नहीं मिल पाई
डॉ. मनीषा 7 महीने से बिना छुट्टी लिए लगातार काम कर रही हैं। इस दौरान वह अपने माता-पिता से मिलने भी नहीं जा पाई। मनीषा ने बताया कि उनके पिता कैंसर के मरीज हैं। स्थिति गंभीर होने के बावजूद कोरोना के कारण वे उनसे ओडिशा जाकर नहीं मिल सकी। उनके ससुर भी काफी बुजुर्ग हैं। हाई रिस्क कैटेगरी में होने के कारण वे और उनके पति चाह कर भी उनसे मिल नहीं पाते। जब कभी वे उनसे मिलने डेराबस्सी जाते हैं तो घर के बाहर से ही उन्हें देखकर लौट आते हैं।

हर रोल में खुद को किया फिट
डॉ. मनीषा एक जिम्मेदार ऑफिसर होने के साथ ही बहू, बेटी, पत्नी और मां के फर्ज को सफलतापूर्वक पूरा कर रही हैं। पीजीआई में मिली अहम जिम्मेदारी को बाखूबी पूरा करने के साथ ही वे अपने परिवार माता-पिता और ससुराल से जुड़ी जिम्मेदारियां भी निभा रही हैं। उनका कहना है कि महामारी के इस दौर में वे समय की चिंता किए बिना 24-24 घंटे लगातार काम कर रही हैं। अगर 24 घंटे की बजाय 1 दिन 48 घंटे का होता तो भी वह अपना पूरा समय अपने फर्ज को निभाने में लगा देती।

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