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Chandigarh News: पहली स्वदेशी क्लॉट बस्टर दवा की तकनीक विकसित करने वाले डॉ. गिरीश साहनी का निधन

Tue, 20 Aug 2024 05:55 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Tue, 20 Aug 2024 05:55 AM IST
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Dr. Girish Sahni, who developed the technology of the first indigenous clot buster drug, passes away.
चंडीगढ़। देश की पहली स्वदेशी क्लॉट बस्टर दवा की तकनीक विकसित करने वाले डॉ. गिरीश साहनी का सोमवार को निधन हो गया। परिजनों के मुताबिक, सोमवार सुबह तेज खांसी के बाद वह अपने वॉशरूम में घायल अवस्था में मिले। उन्हें पीजीआई ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
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अनुसंधान के क्षेत्र में नाम कमाने वाले डॉ. साहनी ने पीयू के माइक्रो बायोलॉजी विभाग से 1973-78 में स्नातक और स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की।
प्रोटीन इंजीनियरिंग, आणविक जीव विज्ञान और जैव प्रौद्योगिकी में विशेषज्ञता रखने वाले डॉ. साहनी पंजाब यूनिवर्सिटी (पीयू) के पूर्व छात्र व ऑनरेरी (सम्मानार्थ) प्रोफेसर रहे थे। पीयू ने डॉ. साहनी के निधन पर शोक जताया है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस बंगलौर से पीएचडी करने वाले डॉ. साहनी 2005-2015 तक सीएसआईआर-इमटेक के निदेशक और बाद में सीएसआईआर में डायरेक्टर जनरल और डिपार्टमेंट ऑफ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च के सचिव पद पर रहे।
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प्रोटीन आधारित कॉर्डियोवेसक्यूलर ड्रग खासकर कि क्लॉट बस्टर तकनीक विकसित करने में उनका विशेष योगदान रहा। उनके नेतृत्व में उनकी टीम ने भारत की पहली स्वदेशी क्लॉट बस्टर दवा प्राकृतिक स्ट्रेप्टोकिनेज बनाने के लिए तकनीक विकसित की। इसके अलावा चौथी पीढ़ी के एंटी-थ्रोम्बोटिक क्लॉट बस्टर के अभूतपूर्व विकास में भी उन्होंने महत्वपूर्ण कार्य किया, जो दुनिया में पहली बार हुआ। पीयू द्वारा वर्ष 2014 में उन्हें विज्ञान रत्न और 2022 में माइक्रो बायोलॉजी विभाग द्वारा एक्सीलेंसी पुरस्कार से सम्मानित किया। इसके अलावा उन्हें सीएसआईआर प्रौद्योगिकी शील्ड 2001-2002, वासविक औद्योगिक पुरस्कार 2000, फार्मास्युटिकल विज्ञान में रैनबैक्सी पुरस्कार 2003, विज्ञान रत्न पुरस्कार 2014, श्री ओम प्रकाश भसीन पुरस्कार 2013 और व्यवसाय विकास और प्रौद्योगिकी विपणन के लिए सीएसआईआर प्रौद्योगिकी पुरस्कार 2014 से नवाजा गया था।
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