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गुड़िया दुष्कर्म केस: पूर्व आईजी ने जेल में मांगीं सुविधाएं, सीबीआई कोर्ट ने एजेंसी से मांगा जवाब

Thu, 30 Jul 2020 04:16 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: पंचकुला ब्‍यूरो Updated Thu, 30 Jul 2020 04:16 PM IST
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gudiya rape case: Former IG sought facilities in jail
प्रतीकात्मक तस्वीर
चंडीगढ़। शिमला के कोटखाई में एक छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के मामले से जुड़े आरोपी सूरज की हिरासत में हुई मौत के आरोपी पूर्व आईजी जहूर हैदर जैदी ने सीबीआई अदालत में दो याचिकाएं दायर कर कुछ सुविधाओं की मांग की है। जैदी ने याचिका के जरिए बुड़ैल जेल के अंदर कंप्यूटर इस्तेमाल करने और बी क्लास की सुविधाएं देने की मांग की है। दोनों याचिकाओं पर अदालत ने सीबीआई को नोटिस जारी जवाब मांगा है।
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पूर्व आईजी ने पहली याचिका में कहा कि वह वर्तमान में 12 अन्य कैदियों के साथ रह रहे हैं। ऐसी स्थिति में उन्हें अपने दस्तावेजों के खोने का खतरा बना रहता है। साथ ही दस्तावेज को सुरक्षित रख पाना मुश्किल हो रहा है। कोरोना महामारी से पहले उनके वकील जेल में अक्सर आया करते थे, इसलिए वह अपने हाथ से लिखे निर्देश और मामले से संबंधित दस्तावेज एडवोकेट के माध्यम से बाहर भेजा करते थे, मगर कोरोना आने के बाद उनके वकील का आना-जाना बंद हो गया है।
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ऐसी स्थिति में वे अपने दस्तावेज बाहर नहीं भेज पा रहे हैं और वह जेल के अंदर ही हैं। उनकी मांग है कि दिन में तीन घंटे जेल अधिकारी की निगरानी में कंप्यूटर इस्तेमाल करने की अनुमति दी जाए ताकि वह ऑनलाइन माध्यम से अपने लिखित दस्तावेज वकील के पास पहुंचा सकें। हालांकि कोर्ट से पहले उन्होंने जेल सुपरिंटेंडेंट के पास अपील की थी, लेकिन उनकी बात नहीं बनी। जेल अधिकारी की ओर से कहा गया कि पंजाब जेल मैनुअल में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।
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हालांकि वह हाथ से लिखकर नोट तैयार कर सकते हैं, जिन्हें जेल अधिकारियों द्वारा बाहर भेजा जा सकता है। यदि वह अपने वकील से ऑनलाइन बात करना चाहते हैं तो इसकी इजाजत दी जा सकती है। फोन पर बात करने की अनुमति भी मिल सकती है। दूसरी याचिका में उन्होंने कहा है कि वह पोस्ट ग्रेजुएट और आयकरदाता हैं। जेल मैनुअल के अनुसार, उन्हें जेल के अंदर बी क्लास की सुविधाएं मिलनी चाहिए। दोनों याचिकाओं पर सुनवाई अब 31 जुलाई को होगी।


यह था मामला
मामला जुलाई 2017 का है। शिमला से 58 किलोमीटर दूर कोटखाई के एक स्कूल की छात्रा लापता हो गई थी। दो दिन बाद जंगल से उसकी लाश बरामद हुई थी। एसआईटी ने स्थानीय युवक समेत पांच मजदूरों को गिरफ्तार किया, जिनमें सूरज नाम का एक नेपाली युवक भी था। कोटखाई थाने में 18 जुलाई 2017 को सूरज की मौत हो गई। सीबीआई जांच में सामने आया कि पुलिस के टॉर्चर से ही सूरज की मौत हुई थी। इस केस में सीबीआई ने आईजीपी जैदी, एसपी डीडब्ल्यू नेगी, ठयोग डीएसपी मनोज जोशी, कोटखाई के पूर्व एसएचओ राजिंदर सिंह, एएसआई दीप चंद, हेड कांस्टेबल सूरत सिंह, मोहन लाल, रफिक अली और कांस्टेबल रंजीत को आरोपी बनाया था।
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