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ट्रैफिक इंस्पेक्टर कपिल देव को कुत्ते ने काटा

Wed, 02 Oct 2019 02:23 AM IST
Panchkula bureau पंचकुला ब्‍यूरो
Updated Wed, 02 Oct 2019 02:23 AM IST
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Dog bitten traffice inspector
चंडीगढ़। ट्राइसिटी में कुत्तों का आतंक कम नहीं हो रहा है। मंगलवार को इनका शिकार बने ट्रैफिक इंस्पेक्टर कपिल देव। ट्रैफिक इंस्पेक्टर ने अस्पताल पहुंचकर मरहम पट्टी कराई।
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ईस्ट डिवीजन में तैनात ट्रैफिक इंस्पेक्टर कपिल देव ने बताया कि मंगलवार सुबह वह सेक्टर-18 में ड्यूटी में दे रहे थे। तभी कुछ कुत्तों का झुंड उत्पात मचाते हुए पहुंच गया। इनमें से एक कुत्ता अचानक उनकी ओर झपटा। उन्होंने बचने की कोशिश की लेकिन कुत्ते ने उनकी बायीं बाजू में काट लिया। गहरे दांत लगने के कारण खून बहने लगा। उन्होंने पहले तो रुमाल से खून रोकने की कोशिश की लेकिन जब नहीं रुका तो वह अपने सिपाहियों के साथ नजदीकी अस्पताल पहुंचे और डॉक्टर से मरहम पट्टी कराई। कपिल देव ने बताया कि कुत्तों की समस्या वाकई शहर में काफी बढ़ गई है। पार्कों, ग्रीन बेल्ट व सड़कों पर इनके झुंड नजर आते हैं। कितने ही लोगों को ये अपना शिकार बना चुके हैं।
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हाईकोर्ट भी कुत्तों के आतंक पर जता चुका है चिंता
ट्राइसिटी में कुत्तों के आतंक की घटनाओं पर पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट भी चिंता जता चुका है। नगर निगम को निर्देश दिए गए कि रेजिडेंट्स की सुरक्षा के लिए इन कुत्तों पर लगाम लगाई जाए। लेकिन इसके बावजूद नगर निगम कोई ठोस कदम नहीं उठा पाया। यही वजह है कि आज भी शहर कुत्तों के आतंक से जूझ रहा है।
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बच्चों की जान तक ले चुके हैं कुत्ते
पिछले साल जून में सेक्टर-18 में ही डिवाइडिंग रोड के साथ लगते पार्क में खेलते समय डेढ़ साल के मलोया निवासी आयुष को कुत्तों ने नोच-नोचकर मार डाला था। आयुष की मां कोठियों में काम करती थी। वह अपने भाई बहनों के साथ पार्क में खेल रहा था। पार्क में टहल रहे कुत्तों के झुंड ने बच्चों पर हमला कर दिया। अन्य बच्चे तो डरकर भाग गए मगर आयुष कुत्तों का शिकार बन गया। इसी तरह साल 2017 में छह साल की बच्ची सादिया को मनीमाजरा में कुत्तों ने काट लिया था। पीजीआई में भर्ती करने के बाद चंडीगढ़ में कहीं भी हम्यून सीरम नहीं मिला। उसके बाद अंबाला से सीरम मंगाया गया था लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और बच्ची की मौत हो गई।

रोजाना 35 से 40 डॉग बाइट के केस आते हैं डिस्पेंसरी में
चंडीगढ़ में सेक्टर-19 और 38 की डिस्पेंसरी में डॉग बाइट के मरीजों का फ्री इलाज किया जाता है। शहर में प्रतिदिन 35 से 40 डॉग बाइट के केस डिस्पेंसरी में पहुंचते हैं।
बता दें कि शहर में डॉग बाइट के केस लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन प्रशासन इसके लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रहा है।
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