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कभी PGI ने एडमिशन नहीं दिया था, अब स्पीकर बनकर पहुंची
आशीष वर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Sat, 20 Feb 2016 09:39 PM IST
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जिस लड़की को कभी चंडीगढ़ पीजीआई ने देरी से पहुंचने के कारण दाखिला नहीं
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दिया था, आज वही लड़की संस्थान में स्पीकर बनकर पहुंची। इस लड़की का नाम है डा. सौम्या स्वामीनाथन, जिसकी पहचान आज सिर्फ देश में नहीं बल्कि अंतराराष्ट्रीय स्तर पर एक सफल साइंटिस्ट के तौर पर है।
मौजूदा समय में वे स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के आधीन डिपार्टमेंट आफ हेल्थ रिसर्च की सचिव व इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की डायरेक्टर जनरल के तौर पर तैनात है। शनिवार को पीजीआई में पीडियाट्रिक सीएमई व प्रोफेसर बीएनएस वालिया ओरेशन का कार्यक्रम था।
कार्यक्रम के दौरान पीजीआई के पूर्व डायरेक्टर व प्रोफेसर बीएनएस वालिया ने संस्थान के अधिकारियों, डाक्टरों और विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए बताया कि एक संस्थान की जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने कालेज के टैलेंट को दूसरे संस्थानों में जाने से रोके।
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साल 1979-1980 की एक घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि उस दौरान पीजीआई में एमडी पीडियाट्रिक काउंसलिंग थी। मैरिट में नाम आने के बाद छात्रा को डीन और डायरेक्टर के समक्ष पेश होकर अपनी दूसरी वरीयता के बारे में बताना होता है। यह एडमिशन प्रोसेस का ही एक हिस्सा है। जिस छात्रा की पहली रैंक आई थी, वह समय पर पहुंच नहीं पाई। कुछ देरी के बाद वह पहुंच गई।
छात्रा ने तत्कालीन डीन और डायरेक्टर से गुहार लगाई कि लेकिन उसकी नहीं सुनी गई। खुद प्रोफेसर बीएनएस वालिया ने भी डीन से इस बारे में बात की, लेकिन तत्कालीन डीन ने साफ तौर कहा कि छात्रा ने एडमिशन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया है, ऐसे में उसे एडमिशन नहीं मिल सकता।
प्रोफेसर वालिया ने इस बात पर जोर दिया कि छात्रा प्रतिभावान है। हमें उसे वरियता देनी चाहिए, लेकिन तत्कालीन डीन टस से मस नहीं हुए। छात्रा इतनी प्रतिभावान थी कि उसका पीजीआई की मैरिट के अलावा एम्स की भी मैरिट लिस्ट में नाम आ गया था, लेकिन छात्रा चाहती थी कि वह पीजीआई में ही एडमिशन ले, लेकिन उसका यह सपना पूरा नहीं हो पाया। खचाखच भरे हाल में उन्होंने बताया कि वह टैलेंटेड स्टूडेंट आज हमारे बीच में है।
उनका नाम डा. सौम्या स्वामीनाथन है। बाद में प्रोफेसर बीएनएस वालिया ने बताया कि उसका सिर्फ यही मैसेज देना था कि किसी अच्छे काम के लिए यदि नियमों को तोड़ना पड़े तो उसमें कोई बुराई नहीं होती। यदि ये नियम कोर्ट ने बनाए होते हैं तो अलग बात है, लेकिन ये नियम हम सबने बनाए हैं, इन्हें तोड़ने में कोई बुराई नहीं होती। डा. सौम्या ने कहा कि पीजीआई उनका ड्रीम इंस्टीट्यूट था।
कौन है डा. सौम्या स्वामीनाथन
डा. सौम्या स्वामीनाथन की पहचान क्लीनिकल साइंटटिस्ट के तौर पर है। उन्होंने ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) पर काफी रिसर्च की हुई है। आर्म्ड फोर्स मेडिकल कालेज से एमबीबीएस करने के बाद उन्होंने एम्स से पीडियाट्रिक्स में एमडी की डिग्री हासिल की। उसके बाद उन्हें कैलिफोर्निया के चिल्ड्रेन हास्पिटल से फेलोशिप मिली। वे हरित क्रांति के जनक एमएस स्वामीनाथन की बेटी हैं। वे नेशनल इंस्टीट्यूट फार रिसर्च इन ट्यूबरकोलोसिस की डायरेक्टर भी रही हैं। उन्हें आधा दर्जन से ज्यादा इंटरनेशनल अवार्ड भी मिल चुके हैं।
मौजूदा समय में वे स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के आधीन डिपार्टमेंट आफ हेल्थ रिसर्च की सचिव व इंडियन काउंसिल आफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की डायरेक्टर जनरल के तौर पर तैनात है। शनिवार को पीजीआई में पीडियाट्रिक सीएमई व प्रोफेसर बीएनएस वालिया ओरेशन का कार्यक्रम था।
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कार्यक्रम के दौरान पीजीआई के पूर्व डायरेक्टर व प्रोफेसर बीएनएस वालिया ने संस्थान के अधिकारियों, डाक्टरों और विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए बताया कि एक संस्थान की जिम्मेदारी बनती है कि वे अपने कालेज के टैलेंट को दूसरे संस्थानों में जाने से रोके।
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साल 1979-1980 की एक घटना का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि उस दौरान पीजीआई में एमडी पीडियाट्रिक काउंसलिंग थी। मैरिट में नाम आने के बाद छात्रा को डीन और डायरेक्टर के समक्ष पेश होकर अपनी दूसरी वरीयता के बारे में बताना होता है। यह एडमिशन प्रोसेस का ही एक हिस्सा है। जिस छात्रा की पहली रैंक आई थी, वह समय पर पहुंच नहीं पाई। कुछ देरी के बाद वह पहुंच गई।
छात्रा ने तत्कालीन डीन और डायरेक्टर से गुहार लगाई कि लेकिन उसकी नहीं सुनी गई। खुद प्रोफेसर बीएनएस वालिया ने भी डीन से इस बारे में बात की, लेकिन तत्कालीन डीन ने साफ तौर कहा कि छात्रा ने एडमिशन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया है, ऐसे में उसे एडमिशन नहीं मिल सकता।
प्रोफेसर वालिया ने इस बात पर जोर दिया कि छात्रा प्रतिभावान है। हमें उसे वरियता देनी चाहिए, लेकिन तत्कालीन डीन टस से मस नहीं हुए। छात्रा इतनी प्रतिभावान थी कि उसका पीजीआई की मैरिट के अलावा एम्स की भी मैरिट लिस्ट में नाम आ गया था, लेकिन छात्रा चाहती थी कि वह पीजीआई में ही एडमिशन ले, लेकिन उसका यह सपना पूरा नहीं हो पाया। खचाखच भरे हाल में उन्होंने बताया कि वह टैलेंटेड स्टूडेंट आज हमारे बीच में है।
उनका नाम डा. सौम्या स्वामीनाथन है। बाद में प्रोफेसर बीएनएस वालिया ने बताया कि उसका सिर्फ यही मैसेज देना था कि किसी अच्छे काम के लिए यदि नियमों को तोड़ना पड़े तो उसमें कोई बुराई नहीं होती। यदि ये नियम कोर्ट ने बनाए होते हैं तो अलग बात है, लेकिन ये नियम हम सबने बनाए हैं, इन्हें तोड़ने में कोई बुराई नहीं होती। डा. सौम्या ने कहा कि पीजीआई उनका ड्रीम इंस्टीट्यूट था।
कौन है डा. सौम्या स्वामीनाथन
डा. सौम्या स्वामीनाथन की पहचान क्लीनिकल साइंटटिस्ट के तौर पर है। उन्होंने ट्यूबरक्लोसिस (टीबी) पर काफी रिसर्च की हुई है। आर्म्ड फोर्स मेडिकल कालेज से एमबीबीएस करने के बाद उन्होंने एम्स से पीडियाट्रिक्स में एमडी की डिग्री हासिल की। उसके बाद उन्हें कैलिफोर्निया के चिल्ड्रेन हास्पिटल से फेलोशिप मिली। वे हरित क्रांति के जनक एमएस स्वामीनाथन की बेटी हैं। वे नेशनल इंस्टीट्यूट फार रिसर्च इन ट्यूबरकोलोसिस की डायरेक्टर भी रही हैं। उन्हें आधा दर्जन से ज्यादा इंटरनेशनल अवार्ड भी मिल चुके हैं।