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Chandigarh News: सीलन, फफूंद और धूल को न समझें मामूली, फेफड़ों को बना सकते हैं बीमार

Fri, 25 Sep 2026 01:41 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Fri, 25 Sep 2026 01:41 AM IST
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Do not dismiss dampness, mold, and dust as trivial; they can cause lung ailments.
चंडीगढ़। घर की दीवारों पर जमी फफूंद, सीलन भरे कमरे, खेतों में उड़ती धूल और अनाज की धूल को सामान्य समझकर नजरअंदाज करना फेफड़ों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। लंबे समय तक ऐसे वातावरण में रहने पर फफूंद के बेहद छोटे कण सांस के साथ फेफड़ों में पहुंच सकते हैं। कुछ लोगों में इन कणों के खिलाफ शरीर की प्रतिरोधक क्षमता जरूरत से ज्यादा सक्रिय हो जाती है। इससे फेफड़ों में सूजन की स्थिति पैदा हो सकती है, जिसे अतिसंवेदनशीलता जनित फेफड़ों की बीमारी कहा जाता है।
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पीजीआई के विशेषज्ञों ने इस बीमारी की पहचान में खून की जांच की उपयोगिता को लेकर 219 लोगों पर अध्ययन किया। इसमें 105 अतिसंवेदनशीलता जनित फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित मरीज, 64 दूसरी बीच के ऊतक से जुड़ी फेफड़ों की बीमारियों वाले मरीज और 50 स्वस्थ लोगों को शामिल किया गया। अध्ययन में चार तरह की फफूंद के खिलाफ बनने वाली प्रतिरक्षी की जांच की गई।
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शोध में एस्परजिलस फ्यूमिगेटस, पेनिसिलियम क्राइसोजेनम, क्लैडोस्पोरियम हर्बेरम और माइक्रोपॉलीस्पोरा फैनी के खिलाफ बनने वाली प्रतिरक्षी की जांच हुई। चारों में से किसी एक की मात्रा तय सीमा से अधिक मिलने पर बीमारी की पहचान करने की क्षमता 57.1 प्रतिशत और बीमारी नहीं होने की पहचान करने की क्षमता 78.1 प्रतिशत रही। चारों प्रतिरक्षियों को एक साथ देखने वाली जांच में सकारात्मक परिणाम आने पर बीमारी की संभावना 84 प्रतिशत तक पहुंची। इस अध्ययन में पीजीआई के डॉ. सहजल धूरिया, डॉ. रितेश अग्रवाल, डॉ. इंदरपॉल सिंह सहगल और डॉ. वल्लियप्पन मुथु समेत 12 शोधकर्ता शामिल रहे। शोध जून 2026 में सारकॉइडोसिस, वैस्कुलाइटिस एंड डिफ्यूज लंग डिजीज जर्नल में प्रकाशित हुआ।
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फफूंद को केवल संक्रमण समझना ठीक नहीं

विशेषज्ञों के अनुसार फफूंद के कण सांस के साथ फेफड़ों में पहुंचते हैं लेकिन हर व्यक्ति में बीमारी नहीं होती। कुछ लोगों में शरीर की प्रतिरोधक क्षमता इन कणों के खिलाफ अत्यधिक प्रतिक्रिया करती है। इससे फेफड़ों में सूजन और ऊतकों में बदलाव शुरू हो सकते हैं। लगातार संपर्क बने रहने पर फेफड़ों की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।

घर और काम की जगह पर इन स्रोतों से बचें

सीलन वाली दीवारें, पानी का रिसाव, लंबे समय से नम कमरे, खेतों की मिट्टी व फसल की धूल, अनाज और अन्य जैविक सामग्री की धूल फफूंद के संपर्क के संभावित स्रोत हैं। घर में फफूंद दिखने पर केवल उसे पोंछना पर्याप्त नहीं है। सीलन और पानी के रिसाव का कारण दूर करना जरूरी है, ताकि फफूंद दोबारा न पनपे।


खांसी और सांस फूलने को न करें नजरअंदाज
लंबे समय की सूखी खांसी, सांस फूलना, थकान या बार-बार बुखार को नजरअंदाज न करें। फफूंद, सीलन या जैविक धूल से संपर्क हो तो डॉक्टर को बताएं। खून की जांच में प्रतिरक्षी बढ़ना अकेले बीमारी की पुष्टि नहीं करता।
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