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Literati Festival: दिव्या दत्ता बोलीं- मां की वजह से बन सकी अभिनेत्री, वीरजारा से मिली पहचान
Mon, 19 Dec 2022 12:03 AM IST
ajay kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Mon, 19 Dec 2022 12:03 AM IST
सार
दिव्या दत्ता ने कहा कि फिल्म वीरजारा से उन्हें पहचान मिली। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जब फिल्मों में किरदार निभाती हूं तो दिव्या को पीछे छोड़ देती हूं। फिल्मों में काम कर बहुत आनंद आता है।
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अभिनेत्री दिव्या दत्ता।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
मैं स्कूल-कॉलेज से निकलने वाली पत्रिकाओं में भी लिखती थी। टीचर कहते थे इस लड़की से जरूर लिखवा लेना। मेरी मां ने मेरा बहुत साथ दिया। उन्हीं की वजह से बचपन के सपने को साकार कर अभिनेत्री बन पाई। ये बातें लिट फेस्ट चंडीगढ़ लिटराटी के अंतिम दिन बॉलीवुड अभिनेत्री और लेखिका दिव्या दत्ता ने कहीं। वह सगुना जैन के साथ एक सत्र में साहित्य और फिल्म पर बात कर रही थीं। इस दौरान उन्होंने लोगों के प्रश्नों के उत्तर भी दिए।
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सत्र के दौरान दिव्या दत्ता ने कहा कि फिल्म वीरजारा से उन्हें पहचान मिली। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि जब फिल्मों में किरदार निभाती हूं तो दिव्या को पीछे छोड़ देती हूं। फिल्मों में काम कर बहुत आनंद आता है। एक फिल्म के सीन के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि जो उन्हें सीन दिया गया था, मैंने उससे अलग कर दिया। इस पर डायरेक्टर भी हंसने लगे। शुरुआत के दिनों में जो भी डायरेक्टर मुझे घर पर स्टोरी सुनाने या बताने आते तो मैं नर्वस हो जाती थी, तब मेरी मां ने बहुत साथ दिया।
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मां डायरेक्टर से नाम पूछतीं और कहतीं कि दिव्या तैयार हो रही है। मेरी मां उनसे कहानी सुन लेतीं और मुझे बतातीं। इसके बाद डायरेक्टर यह कहकर चले जाते कि बाद में स्टोरी भेज देंगे। दिव्या दत्ता ने कहा कि अभी यात्रा जारी है। अभी बहुत काम करना है। इस दौरान उन्होंने कविता भी पढ़ी। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि एक किरदार में बेहद ढल गई थी। वापस नहीं आई। अगले दिन बाथरूम में जाकर बहुत रोई। जब गंभीर रोल होता है तो मन भी गंभीर हो जाता है।
चंडीगढ़ लिटरेरी सोसायटी ने जताया आभार
लिट फेस्टिवल के समापन पर आयोजक चंडीगढ़ लिटरेरी सोसायटी की चेयरपर्सन डॉ. सुमिता मिश्रा ने सभी का आभार जताया। दो दिन तक चले इस कार्यक्रम में पंजाब समेत देशभर से आए लेखकों, कवियों और बुद्धिजीवियों ने अपनी बात रखी। इसमें व्यक्तिगत जीवन से लेकर समाज और देश-विदेश की चर्चा हुई। डॉ. सुमिता मिश्रा ने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए अपने सहयोगियों और साहित्यकारों और कवियों का आभार प्रकट किया।