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चंडीगढ़ जिला अदालत ने पहली बार व्हाट्सऐप वीडियो कॉल से सुनाई सजा, जानिए क्या कहा...
Fri, 07 Aug 2020 03:04 PM IST
पंचकुला ब्यूरो
अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: पंचकुला ब्यूरो
Updated Fri, 07 Aug 2020 03:04 PM IST
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हत्या के एक मामले में जिला अदालत ने पहली बार व्हाट्सऐप वीडियो कॉल के जरिए सजा सुनाई है। कोरोना की वजह से अदालतें बंद हैं। अन्य मामलों की सुनवाई वीडियो कॉल से हो रही हैं।
चार साल पुराने मामले में अदालत ने आरोपी को आजीवन कारावास के साथ 50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। आरोपी जुर्म के वक्त नाबालिग था, इसलिए 21 साल की उम्र होने तक उसे बालगृह में भेज दिया गया है। साथ ही अदालत ने डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को हर साल एक जून को दोषी की एक रिपोर्ट अदालत में पेश करने के निर्देश दिए हैं।
साल 2015 में सेक्टर-42 निवासी और ढाबा मालिक महिपाल की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने ढाबे में काम करने वाले नाबालिग कर्मचारी को दबोच लिया था। हत्या के 20 दिन पहले ही उसे काम पर रखा गया था। 29 जून को महिपाल के छोटे बेटे और नाबालिग कर्मचारी के बीच मारपीट हो गई थी, जिसके बाद वह नौकरी छोड़कर चला गया।
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झगड़े के दौरान महिपाल और आरोपी कर्मचारी के बीच भी बहस हुई थी। 30 जून को महिपाल ढाबा बंद करके सोने चला गया। अगली सुबह जब महिपाल का बड़ा बेटा ईश्वर उससे मिलने आया तो देखा कि वह खून से लथपथ था। मुंह और गले पर चाकू के निशान थे। इसके बाद ईश्वर ने मामले की सूचना सेक्टर 36 थाना पुलिस को दी थी। लगभग 2 महीने बाद पुलिस ने आरोपी को डिब्रूगढ़ से गिरफ्तार कर लिया था।
अदालत ने क्या कहा
सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए अतिरिक्त जिला न्यायाधीश राजीव गोयल की अदालत ने कहा कि समाज को सुरक्षित रखने के लिए आरोपियों को सजा देना जरूरी होता है। हत्या जैसा अपराध समाज के लिए बहुत ही गंभीर है। ऐसे अपराध में दोषी रियायत के लायक नहीं होता। दोषी को छूट देने का मतलब समाज के अन्य अपराधियों का हौसला बढ़ाना है इसलिए उसे छूट नहीं दी जा सकती।
बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि आरोपी का पीछे भी कोई आपराधिक रिकार्ड नहीं है। उसके पिता की पहले ही मृत्यु हो चुकी है। उसकी मां और बहनों की देखभाल करने वाला कोई नहीं है इसलिए कम से कम सजा दी जाए। इस पर सरकारी वकील ने कहा जेपी सिंह ने कहा दोषी ने महिपाल की हत्या करके बहुत गंभीर अपराध किया है। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही अदालत ने 45 हजार रुपये पीड़ित परिवार को देने के निर्देश दिए हैं।
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चार साल पुराने मामले में अदालत ने आरोपी को आजीवन कारावास के साथ 50 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। आरोपी जुर्म के वक्त नाबालिग था, इसलिए 21 साल की उम्र होने तक उसे बालगृह में भेज दिया गया है। साथ ही अदालत ने डिस्ट्रिक्ट चाइल्ड वेलफेयर कमेटी को हर साल एक जून को दोषी की एक रिपोर्ट अदालत में पेश करने के निर्देश दिए हैं।
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साल 2015 में सेक्टर-42 निवासी और ढाबा मालिक महिपाल की हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने ढाबे में काम करने वाले नाबालिग कर्मचारी को दबोच लिया था। हत्या के 20 दिन पहले ही उसे काम पर रखा गया था। 29 जून को महिपाल के छोटे बेटे और नाबालिग कर्मचारी के बीच मारपीट हो गई थी, जिसके बाद वह नौकरी छोड़कर चला गया।
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झगड़े के दौरान महिपाल और आरोपी कर्मचारी के बीच भी बहस हुई थी। 30 जून को महिपाल ढाबा बंद करके सोने चला गया। अगली सुबह जब महिपाल का बड़ा बेटा ईश्वर उससे मिलने आया तो देखा कि वह खून से लथपथ था। मुंह और गले पर चाकू के निशान थे। इसके बाद ईश्वर ने मामले की सूचना सेक्टर 36 थाना पुलिस को दी थी। लगभग 2 महीने बाद पुलिस ने आरोपी को डिब्रूगढ़ से गिरफ्तार कर लिया था।
अदालत ने क्या कहा
सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए अतिरिक्त जिला न्यायाधीश राजीव गोयल की अदालत ने कहा कि समाज को सुरक्षित रखने के लिए आरोपियों को सजा देना जरूरी होता है। हत्या जैसा अपराध समाज के लिए बहुत ही गंभीर है। ऐसे अपराध में दोषी रियायत के लायक नहीं होता। दोषी को छूट देने का मतलब समाज के अन्य अपराधियों का हौसला बढ़ाना है इसलिए उसे छूट नहीं दी जा सकती।
बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि आरोपी का पीछे भी कोई आपराधिक रिकार्ड नहीं है। उसके पिता की पहले ही मृत्यु हो चुकी है। उसकी मां और बहनों की देखभाल करने वाला कोई नहीं है इसलिए कम से कम सजा दी जाए। इस पर सरकारी वकील ने कहा जेपी सिंह ने कहा दोषी ने महिपाल की हत्या करके बहुत गंभीर अपराध किया है। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अदालत ने उम्रकैद की सजा सुनाई। साथ ही अदालत ने 45 हजार रुपये पीड़ित परिवार को देने के निर्देश दिए हैं।